कानपुर-उन्नाव गंगा पुल बना 'डेथ ट्रैप'
प्रलभ शरण चौधरी/Truth India Times
कानपुर/उन्नाव: उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख औद्योगिक शहरों, कानपुर और उन्नाव को जोड़ने वाली लाइफलाइन यानी ‘पुराना गंगा पुल’ इस समय खुद अपनी सांसे गिन रहा है। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) की रिपोर्ट आए 5 महीने बीत चुके हैं, जिसमें पुल को जर्जर बताकर तुरंत मरम्मत की सिफारिश की गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि फाइलों के फेर में फंसी मरम्मत की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। रोजाना हजारों लोग जान जोखिम में डालकर इस पुल से गुजरने को मजबूर हैं।
1975 में बना पुल अब मांग रहा है ‘आराम’
लगभग 50 साल पुराना यह पुल (निर्माण वर्ष 1975) अपनी मियाद पूरी कर चुका है। भारी यातायात के दबाव के कारण पुल के स्लैब में दरारें आ चुकी हैं और बेयरिंग पूरी तरह घिस चुकी हैं। पुल पर से जब कोई भारी वाहन गुजरता है, तो इसमें होने वाला कंपन (Vibration) इतना अधिक होता है कि दुपहिया वाहन सवारों के हाथ-पांव कांप जाते हैं।
फुटपाथ गायब, रेलिंग टूटी: सुरक्षा के नाम पर सिर्फ पत्थर
पुल की हालत इतनी बदतर है कि पैदल चलने वालों के लिए बना फुटपाथ कई जगहों से गायब हो चुका है। सुरक्षा के नाम पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ‘कार्यकुशलता’ देखिए—जहाँ फुटपाथ टूटा है, वहाँ सिर्फ बड़े-बड़े पत्थर रख दिए गए हैं। टूटी हुई रेलिंग और गहरे गड्ढों के कारण रात के समय यहाँ सफर करना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है।
DPR के नाम पर 5 महीने से चल रही ‘खानापूर्ति’
अगस्त 2024 में CRRI ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा था कि पुल की बड़ी मरम्मत अनिवार्य है। इसके बाद NHAI ने अगस्त 2025 में मरम्मत शुरू करने का आश्वासन दिया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 5 महीने बीत जाने के बाद भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तक तैयार नहीं हो पाई है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर पंकज यादव ने पहले पुल बंद कर मरम्मत की बात कही थी, लेकिन अब अधिकारियों का नया राग है कि मरम्मत जनवरी 2026 से पहले संभव नहीं है।
जाम का झाम: घंटों बर्बाद कर रहे यात्री
जर्जर सड़क और गड्ढों के कारण वाहनों की गति धीमी हो जाती है। नतीजा यह है कि इस पुल पर आए दिन 2 से 3 किलोमीटर लंबा जाम लगा रहता है। एम्बुलेंस से लेकर स्कूली बसें तक इस जाम में फंसी रहती हैं। ट्रैफिक का बढ़ता दबाव पुल की उम्र और कम कर रहा है, जिससे भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
मरम्मत का इतिहास और वर्तमान संकट
- 1975: पुल का निर्माण।
- 2009: पहली बड़ी मरम्मत।
- 2021: बेयरिंग बदली गई (जो मात्र 3 साल में फिर जवाब दे गई)।
- 2024 (अगस्त): CRRI ने जर्जर घोषित कर मरम्मत की सिफारिश की।
- वर्तमान स्थिति: टेंडर प्रक्रिया और DPR के नाम पर काम लटका हुआ है।
Truth India Times का कड़ा सवाल:
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? मोरबी (गुजरात) जैसे पुल हादसों से क्या कानपुर NHAI ने कोई सबक नहीं लिया? अगर जनवरी 2026 तक मरम्मत टलती है, तो क्या यह जर्जर ढांचा अगले एक साल तक हजारों टन वजन का बोझ सह पाएगा?
हजारों लोगों की जान से खिलवाड़ बंद होना चाहिए। विभाग को कागजी कार्यवाही से बाहर निकलकर तुरंत युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू करना चाहिए।
प्रमुख बिंदु (Highlight Box):
- चेतावनी: CRRI की रिपोर्ट ने पुल को बताया असुरक्षित।
- लापरवाही: 5 महीने में नहीं बनी मरम्मत की DPR।
- डेडलाइन: अब जनवरी 2026 के बाद मरम्मत की बात कह रहे अधिकारी।
- खतरा: स्लैब में दरारें और अत्यधिक कंपन से पुल गिरने का डर।
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