"ड्राइवर हैं देश के विकास की रीढ़, इन्हें मिले सम्मान"
Banda/Truth India Times Digital Desk
बांदा। ऑल उत्तर प्रदेश वेलफेयर एसोसिएशन ने ड्राइवरों के प्रति समाज और सरकार के नजरिए को बदलने और उन्हें उचित सम्मान दिलाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। सोमवार को एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बांदा जिलाधिकारी (DM) के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक 13 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। एसोसिएशन का स्पष्ट कहना है कि ड्राइवर देश की अर्थव्यवस्था और विकास की रीढ़ हैं, लेकिन आज भी वे मूलभूत सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा के लिए तरस रहे हैं।
कोरोना काल के ‘असली हीरो’ की अनदेखी का आरोप
एसोसिएशन ने ज्ञापन में याद दिलाया कि जब कोरोना महामारी के दौरान पूरा देश घरों में बंद था, तब ड्राइवर ही थे जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों पर गाड़ियां चलाईं। चाहे ऑक्सीजन की सप्लाई हो, दवाइयां हों या आवश्यक खाद्य सामग्री, ड्राइवरों ने बिना रुके और बिना खाए-पिए देश की नब्ज को चलने दिया। एसोसिएशन का कहना है कि इतने बड़े योगदान के बावजूद ड्राइवरों को वह दर्जा और सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार हैं।
1 सितंबर को घोषित हो ‘ड्राइवर दिवस’
एसोसिएशन की सबसे प्रमुख मांगों में से एक 1 सितंबर को ‘ड्राइवर दिवस’ के रूप में आधिकारिक घोषणा करना है। उनका तर्क है कि जिस तरह देश में किसान दिवस, शिक्षक दिवस और मजदूर दिवस मनाए जाते हैं, उसी तरह ड्राइवरों के श्रम को सम्मान देने के लिए एक विशेष दिन होना चाहिए। इससे समाज में ड्राइवरों के प्रति सम्मान बढ़ेगा।
पेंशन, बीमा और सामाजिक सुरक्षा की मांग
एसोसिएशन ने ड्राइवरों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं:
- पेंशन योजना: 55 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद ड्राइवरों के लिए एक सम्मानजनक पेंशन योजना शुरू की जाए।
- दुर्घटना बीमा: ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर आश्रितों को 20 लाख रुपए का बीमा लाभ दिया जाए।
- दिव्यांगता लाभ: दुर्घटना में अपंग होने पर 10 लाख रुपए और इलाज के लिए कम से कम 5 लाख रुपए की तत्काल राशि सुनिश्चित की जाए।
- प्रोविडेंट फंड (PF): ड्राइवरों के लिए भी सरकारी नियमानुसार पीएफ की व्यवस्था हो, ताकि उनके बच्चों को उच्च शिक्षा मिल सके।
‘द्वितीय श्रेणी के सैनिक’ का दर्जा और आवास योजना
एसोसिएशन ने मांग की है कि ड्राइवरों को ‘द्वितीय श्रेणी के सैनिक’ का दर्जा दिया जाए, क्योंकि वे भी सीमाओं के भीतर रहकर देश की सेवा करते हैं। इसके साथ ही, आवास योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर ड्राइवरों को घर बनाने के लिए 5 लाख रुपए की सहायता प्रदान करने की अपील भी की गई है।
लाइसेंस शुल्क और बुनियादी सुविधाएं
ज्ञापन में लाइसेंस रिन्यूअल और बनवाने की फीस पर भी सवाल उठाए गए हैं। एसोसिएशन ने मांग की है कि लाइसेंस शुल्क को 15,000 रुपए से कम किया जाए, ताकि गरीब ड्राइवरों पर आर्थिक बोझ न पड़े। इसके अतिरिक्त, नेशनल हाईवे और प्रमुख सड़कों पर ड्राइवरों के लिए निम्नलिखित सुविधाओं की मांग की गई है:
- आधुनिक पार्किंग स्थल।
- स्वच्छ विश्राम गृह (Dormitories)।
- उच्च स्तरीय शौचालय और स्नानगृह।
स्वतंत्र कानूनी प्रावधान की अपील
ड्राइवरों को अक्सर सड़क दुर्घटनाओं के दौरान भीड़ के गुस्से और कानूनी पेचीदगियों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए एसोसिएशन ने मांग की है कि ड्राइवर समाज के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष कानूनी प्रावधान बनाए जाएं, ताकि उन्हें बिना वजह उत्पीड़न से बचाया जा सके।
निष्कर्ष
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने के दौरान एसोसिएशन के सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करते हुए आंदोलन को और तेज करेंगे। उनका कहना है कि अब समय आ गया है जब सरकार ड्राइवरों को केवल ‘गाड़ी चलाने वाला’ न समझकर उन्हें राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा माने।
ज्ञापन की मुख्य 13 मांगें एक नजर में:
- 1 सितंबर को ‘ड्राइवर दिवस’ घोषित हो।
- 55 साल के बाद पेंशन की सुविधा।
- 20 लाख का मृत्यु बीमा और 10 लाख का अपंगता बीमा।
- लाइसेंस फीस में बड़ी कटौती।
- ड्राइवरों को द्वितीय श्रेणी के सैनिक का दर्जा।
- हाईवे पर पार्किंग और विश्राम गृह की व्यवस्था।
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