सफाई ड्यूटी से तंग आकर किशोरी ने पिया फिनायल
Kanpur/Truth India Times Digital Desk
कानपुर, नवाबगंज: उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित नवाबगंज के राजकीय बाल गृह (बालिका) यूनिट-2 से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ रहने वाली एक 16 वर्षीय किशोरी ने संस्थान के भीतर फिनायल पीकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि किशोरी को सजा के तौर पर या जबरन सफाई की ड्यूटी पर लगाया गया था, जिससे वह बेहद तनाव में थी। आनन-फानन में उसे हैलट अस्पताल के बाल रोग विभाग में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टर उसकी जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
माता-पिता जेल में, बेटी सरकारी संरक्षण में भी असुरक्षित
इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि पीड़ित किशोरी के माता-पिता अपहरण के एक मामले में जेल में बंद हैं। परिवार का सहारा छिन जाने के बाद प्रशासन ने किशोरी को ‘सुरक्षित’ रखने के लिए नवाबगंज स्थित राजकीय बाल गृह में भेजा था। लेकिन, जहाँ उसे सुरक्षा और संबल मिलना चाहिए था, वहीं उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की बात सामने आ रही है।
एक महीने की ‘सफाई ड्यूटी’ बनी गले की फांस
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बालिका गृह के भीतर बच्चियों से साफ-सफाई का काम कराया जाता है। पीड़ित किशोरी की ड्यूटी पिछले एक महीने से लगातार सफाई कार्य में लगाई गई थी। किशोरी ने इसका विरोध भी किया था, लेकिन प्रशासन ने उसकी एक न सुनी। सोमवार को सफाई के काम को लेकर संस्थान के भीतर झगड़ा हुआ, जिसके बाद हताशा और गुस्से में आकर किशोरी ने वहां रखे फिनायल को गटक लिया।
जैसे ही किशोरी की हालत बिगड़ी और वह बेहोश होकर गिरने लगी, बालिका गृह के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। उसे तुरंत एम्बुलेंस के जरिए हैलट अस्पताल पहुँचाया गया। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि किशोरी की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन उसे ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठते सवाल
यह घटना राजकीय बाल गृह की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है:
- बाल श्रम का उल्लंघन: क्या सरकारी संरक्षण में रहने वाली नाबालिग बच्चियों से सफाई कराना न्यायसंगत है? क्या यह बाल श्रम और मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है?
- निगरानी में चूक: जब किशोरी मानसिक तनाव में थी, तो काउंसलर या वहां मौजूद स्टाफ ने उसे क्यों नहीं संभाला?
- फिनायल तक पहुँच: एक संवेदनशील संस्थान में खतरनाक रसायन (फिनायल) बच्चों की पहुँच में इतनी आसानी से कैसे था?
पहले से ही सदमे में थी किशोरी
किशोरी पहले से ही अपने माता-पिता के जेल जाने के कारण गहरे सदमे में थी। ऐसे में उसे सहानुभूति और उचित माहौल की जरूरत थी। लेकिन आरोपों के अनुसार, उसे सफाई जैसे कामों में झोंक दिया गया। यह मामला दर्शाता है कि सरकारी शेल्टर होम्स में रहने वाले बच्चों की मानसिक स्थिति पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
जांच के घेरे में संस्थान के अधिकारी
इस घटना के बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी और बाल कल्याण समिति (CWC) की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बावजूद, कानपुर के इस बालिका गृह में इस तरह की घटना होना प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।
अब देखना यह है कि क्या इस मामले में दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई होती है, या हर बार की तरह इसे भी ‘मामूली विवाद’ बताकर दबा दिया जाएगा। Truth India Times इस मामले की तह तक जाएगा और पीड़ित किशोरी को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाता रहेगा।
Truth India Times की खास टिप्पणी:
“संरक्षण के नाम पर शोषण कब तक? जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में दिखने लगें, तो समाज की उम्मीदें टूटने लगती हैं। नवाबगंज की यह घटना कानपुर प्रशासन के चेहरे पर एक तमाचा है।”
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