उन्नाव में आशा वर्कर्स का फिर फूटा गुस्सा
Unnao/Truth India Times Digital Desk
उन्नाव: उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कही जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर अपनी लंबित मांगों पर अमल न होने के कारण उन्नाव में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। सोमवार को सैकड़ों की संख्या में जुटी आशा वर्कर्स ने सीएमओ कार्यालय का घेराव किया और सरकार तथा विभागीय अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें कई महीनों से मानदेय, प्रोत्साहन राशि और अन्य सुविधाओं का भुगतान नहीं किया गया है, जिसके कारण उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
कार्यकर्ताओं ने बताया कि शीर्ष स्तर से आश्वासन मिलने के बावजूद, उनके साथ धोखा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
शीर्ष स्तर के आश्वासन भी हुए बेअसर
आशा कार्यकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन और दस्तावेजों से पता चला है कि यह प्रदर्शन सिर्फ मानदेय में देरी का मामला नहीं, बल्कि सरकारी आश्वासनों पर अमल न होने का परिणाम है।
प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं के अनुसार, 6 अक्टूबर 2025 को मुख्यमंत्री स्तर से उन्हें आश्वासन मिला था कि उनकी लंबित मांगों और भुगतान का जल्द समाधान किया जाएगा। इसके बाद, 13 अक्टूबर 2025 को स्वास्थ्य मंत्री स्तर पर भी एक बैठक हुई थी, जहाँ 1 नवंबर 2025 से सभी मांगों के निस्तारण का भरोसा दिया गया था।
एक आक्रोशित आशा वर्कर ने कहा, “मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन को अब एक महीने से अधिक हो चुका है। दिवाली और छठ पूजा जैसे बड़े त्योहार बीत गए, लेकिन हमें फूटी कौड़ी नहीं मिली। हमारे बच्चों की फीस और घर का किराया रुका हुआ है। क्या हमें केवल झूठे आश्वासन पर ही जिंदा रहना होगा?”
वित्तीय संकट: बकाया मानदेय की लंबी लिस्ट
आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनकी वित्तीय स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। वर्ष 2025 के कई महीनों का बकाया मानदेय, राज्य वित्त प्रतिपूर्ति राशि, और विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों (जैसे टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम) के भुगतान अभी भी लंबित हैं। इस वित्तीय देरी के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
वेतन के अलावा, उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- सरकारी कर्मचारी का दर्जा: आशा और आशा संगिनियों को ‘मानद स्वयंसेवक’ के बजाय सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
- न्यूनतम वेतन की गारंटी: आशा कार्यकर्ताओं का न्यूनतम मानदेय 21 हजार रुपये प्रतिमाह और आशा संगिनियों का 28 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए।
- पेंशन और बीमा सुरक्षा: 45 वर्ष से अधिक आयु की आशा कार्यकर्ताओं के लिए सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक पेंशन की व्यवस्था हो। साथ ही, उनके लिए स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा और कार्य के दौरान दुर्घटना बीमा की सुविधा लागू की जाए।
- बेहतर संसाधन: उन्हें नियमित प्रशिक्षण दिया जाए और कार्य के लिए आवश्यक सुरक्षा संसाधन (मास्क, ग्लव्स, सैनिटाइज़र, आदि) उपलब्ध कराए जाएं।
चुनाव और सरकारी अभियानों में भी लगाते हैं ड्यूटी
कार्यकर्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि उन्हें न केवल स्वास्थ्य सेवाओं, बल्कि चुनाव ड्यूटी, जनगणना और विभिन्न सरकारी सर्वेक्षणों तथा अभियानों में भी लगाया जाता है, जो उनके मूल काम से अलग है। उन्होंने मांग की कि अतिरिक्त काम के लिए उन्हें अलग से भुगतान किया जाए और उन्हें जबरन गैर-स्वास्थ्य कार्यों में न लगाया जाए।
सीएमओ का जवाब, वर्कर्स का इनकार
प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे। सीएमओ कार्यालय की तरफ से उन्हें एक बार फिर जल्द भुगतान का आश्वासन दिया गया और कहा गया कि ज्ञापन को तत्काल शासन को भेजा जा रहा है।
लेकिन आशा कार्यकर्ताओं ने अब किसी भी मौखिक आश्वासन पर भरोसा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें लिखित में भुगतान की समय सीमा चाहिए और जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे अपना धरना प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगी।
फिलहाल, सीएमओ कार्यालय के बाहर आशा कार्यकर्ताओं का धरना जारी है और इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। यदि जल्द ही इन मांगों का समाधान नहीं होता है, तो उन्नाव में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
मुख्य मांगें एक नज़र में (Key Demands at a Glance):
| मांग (Demand) | वर्तमान स्थिति पर आरोप (Alleged Current Status) |
| रुका हुआ मानदेय | वर्ष 2025 के कई महीनों का बकाया लंबित। |
| कर्मचारी दर्जा | ‘मानद स्वयंसेवक’ के बजाय सरकारी कर्मचारी का दर्जा मांगा। |
| न्यूनतम मानदेय | आशा: ₹21,000/माह, आशा संगिनी: ₹28,000/माह करने की मांग। |
| सामाजिक सुरक्षा | 45+ आयु के लिए पेंशन, स्वास्थ्य, जीवन और दुर्घटना बीमा की मांग। |
| सरकारी आश्वासन | 6 अक्टूबर और 13 अक्टूबर 2025 के आश्वासनों पर अमल नहीं। |
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