उन्नाव में खाद माफियाओं पर प्रशासन का हंटर
Unnao/Truth India Times Digital Desk
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में किसानों को खेती के सीजन में खाद की किल्लत और कालाबाजारी से बचाने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान छेड़ा है। जिलाधिकारी के निर्देश पर मंगलवार को जिले की सभी छह तहसीलों में उर्वरक की दुकानों पर एक साथ सघन छापेमारी की गई। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान मानकों की अनदेखी और अनियमितता पाए जाने पर एक दुकान का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि 11 अन्य दुकानों को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले के उर्वरक विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है।
प्रमुख सचिव के आदेश पर जिलाधिकारी का एक्शन
दरअसल, उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव (कृषि) ने प्रदेश भर में उर्वरकों की गुणवत्ता और उचित मूल्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने जिले की सभी तहसीलों (सदर, बीघापुर, बांगरमऊ, सफीपुर, हसनगंज और पुरवा) को कवर करने के लिए तीन विशेष संयुक्त टीमें गठित कीं। इन टीमों में राजस्व विभाग के उप जिलाधिकारियों (SDM) के साथ कृषि विभाग के बड़े अधिकारियों को शामिल किया गया था।
तीन टीमों ने पूरे जिले को खंगाला
प्रशासन की ओर से की गई इस छापेमारी की योजना इतनी गुप्त थी कि दुकानदारों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। टीमों ने निम्नलिखित क्षेत्रों में जांच की:
- पहली टीम (सदर और बीघापुर): उप कृषि निदेशक रविचंद्र प्रकाश और संबंधित एसडीएम ने सदर और बीघापुर तहसील की दुकानों का स्टॉक रजिस्टर, पीओएस मशीन और उर्वरक की बोरी पर अंकित मूल्यों की जांच की।
- दूसरी टीम (बांगरमऊ और सफीपुर): जिला कृषि अधिकारी शशांक और क्षेत्रीय एसडीएम ने बांगरमऊ व सफीपुर तहसील क्षेत्रों में छापेमारी की। यहां कुछ दुकानों पर स्टॉक में विसंगतियां पाई गईं।
- तीसरी टीम (हसनगंज और पुरवा): वरिष्ठ प्राविधिक सहायक (ग्रुप ए) अनुराग कुमार और संबंधित एसडीएम ने हसनगंज व पुरवा तहसील क्षेत्रों में मोर्चा संभाला। यहां दुकानों पर उर्वरक के नमूनों की जांच की गई और किसानों से फीडबैक लिया गया।
एक लाइसेंस सस्पेंड, 11 पर लटकी तलवार
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई दुकानों पर स्टॉक रजिस्टर और पीओएस मशीन में दर्ज मात्रा में अंतर था। कुछ दुकानदार निर्धारित मूल्य से अधिक पर खाद बेचने की फिराक में थे। गंभीर अनियमितता पाए जाने पर एक दुकान का लाइसेंस मौके पर ही निलंबित कर दिया गया। वहीं, 11 अन्य दुकानदारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है कि क्यों न उनकी दुकानों को भी सील कर दिया जाए।
किसानों को राहत देने की कोशिश
जिला कृषि अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक (Quality Fertilizer) और उचित मूल्य (Fixed Rate) पर खाद उपलब्ध कराना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भी विक्रेता खाद की जमाखोरी या ऊंचे दामों पर बिक्री करता पाया गया, तो उस पर न केवल लाइसेंस निलंबन बल्कि एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रशासन की अपील: रसीद जरूर लें
जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी दुकान से उर्वरक खरीदते समय पक्की रसीद अवश्य लें। यदि कोई दुकानदार रसीद देने से मना करता है या बोरी पर छपे दाम से अधिक पैसे मांगता है, तो इसकी शिकायत तुरंत तहसील कार्यालय या जिला कृषि अधिकारी से करें।
निष्कर्ष: जारी रहेगा अभियान
उन्नाव प्रशासन ने साफ कर दिया है कि उर्वरक की दुकानों पर यह औचक निरीक्षण आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर पैनी नजर रखी जा रही है जहां से किसानों की शिकायतें अधिक मिल रही हैं। इस कार्रवाई से उम्मीद जगी है कि अब किसानों को सरकारी दरों पर बिना किसी परेशानी के खाद मिल सकेगी।
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