कानपुर में बुलडोजर एक्शन पर 'हाईवोल्टेज' ड्रामा
Kanpur/Truth India Times Digital Desk
कानपुर: कानपुर में सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने पहुंची आवास विकास परिषद की टीम को सोमवार को भारी विरोध और जबरदस्त हंगामे का सामना करना पड़ा। स्थिति उस वक्त तनावपूर्ण हो गई जब अभियान के विरोध में स्थानीय बुजुर्ग जेसीबी के ‘बकेट’ के ठीक आगे कूद गए और महिलाएं मशीन के बोनट पर चढ़ गईं। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को रुकता देख प्रशासन को सख्ती बरतनी पड़ी। मौके पर पीएसी (PAC) बुलानी पड़ी, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर पकड़ा और हिरासत में लिया।
घंटों चले इस हाईवोल्टेज ड्रामे, आंसुओं और पुलिस की सख्ती के बीच बुलडोजर अपना काम करता रहा।
क्या है पूरा मामला?
कानपुर के आवास विकास परिषद क्षेत्र में करोड़ों की बेशकीमती जमीन पर लंबे समय से अवैध निर्माण और अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही थीं। विभाग का दावा है कि कई बार नोटिस देने के बावजूद कब्जाधारियों ने जमीन खाली नहीं की। इसी क्रम में आज आवास विकास की टीम, प्रवर्तन दल और स्थानीय पुलिस के साथ बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची थी।
जैसे ही पीला पंजा (जेसीबी) अवैध निर्माण को ढहाने के लिए आगे बढ़ा, वहां मौजूद बाशिंदों का सब्र जवाब दे गया। देखते ही देखते पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया और चीख-पुकार मच गई।
जेसीबी के आगे लेटे बुजुर्ग: ‘पहले हमें मारो, फिर घर तोड़ो’
कार्रवाई शुरू होते ही एक बुजुर्ग अपनी जान की परवाह किए बिना सीधे चलती हुई जेसीबी के सामने कूद गए। वे मशीन के बकेट को पकड़कर जमीन पर लेट गए और चिल्लाने लगे, “मेरा घर तोड़ने से पहले मुझे मार दो, मैं अब कहां जाऊंगा?” ड्राइवर को तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर मशीन रोकनी पड़ी।
बुजुर्ग की हालत देख वहां मौजूद अन्य लोग भी उग्र हो गए। पुलिसकर्मी जब तक बुजुर्ग को वहां से हटाते, तब तक महिलाओं का एक समूह सामने आ गया।
बोनट पर चढ़ीं महिलाएं, पुलिस से हुई तीखी नोकझोंक
माहौल उस वक्त और गरमा गया जब घर की महिलाएं और बच्चियां बुलडोजर के सामने दीवार बनकर खड़ी हो गईं। कुछ महिलाएं गुस्से में जेसीबी के टायरों के पास बैठ गईं, तो कुछ मशीन के ऊपर चढ़कर बोनट पर बैठ गईं। उनका कहना था कि वे अपनी मेहनत की कमाई से बनाए गए आशियाने को अपनी आंखों के सामने टूटता नहीं देख सकतीं।
महिला पुलिसकर्मियों ने जब उन्हें हटाने की कोशिश की, तो भारी धक्का-मुक्की शुरू हो गई। महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था। वे अधिकारियों के पैरों में गिरकर मोहलत मांगती रहीं, लेकिन अधिकारियों के पास कोर्ट और शासन के सख्त आदेश थे, जिसके चलते वे पीछे हटने को तैयार नहीं थे।
जब बुलानी पड़ी PAC और पुलिस ने दिखाई सख्ती
विरोध इतना बढ़ गया कि स्थानीय पुलिस के लिए भीड़ को काबू करना मुश्किल हो गया। लोग ईंट-पत्थर लेकर विरोध करने की चेतावनी देने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पीएसी (Provincial Armed Constabulary) की टुकड़ी और अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।
अतिरिक्त फोर्स आते ही पुलिस ने एक्शन मोड में काम शुरू किया। उपद्रव कर रहे और सरकारी काम में बाधा डाल रहे लोगों को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पकड़ा। जो लोग जेसीबी के आगे से हटने को तैयार नहीं थे, उन्हें महिला पुलिस और पीएसी के जवानों ने जबरन खींचकर हटाया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी गलियों में भागे, जिनका पीछा करके पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
अधिकारियों का बयान: ‘सरकारी जमीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं’
मौके पर मौजूद आवास विकास के अधिकारियों ने बताया कि यह जमीन सरकार की है और इस पर अवैध रूप से पक्के निर्माण कर लिए गए थे। उन्होंने कहा, “हमने नियमानुसार पहले ही नोटिस जारी कर दिए थे और खुद अतिक्रमण हटाने का समय दिया था। लेकिन जब लोगों ने कब्जा नहीं हटाया, तो हमें यह कार्रवाई करनी पड़ी। विरोध करना उनका अधिकार हो सकता है, लेकिन सरकारी काम में बाधा डालने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
विरोध की वजह: ‘हम कहां जाएं?’
दूसरी ओर, जिन लोगों के घर तोड़े जा रहे थे, उनका दर्द अलग ही कहानी बयां कर रहा था। स्थानीय निवासी रमेश (परिवर्तित नाम) ने रोते हुए कहा, “हमने अपनी जिंदगी भर की कमाई यहां लगा दी। जब जमीन खरीदी थी तब किसी ने नहीं रोका, आज अचानक आकर सब तोड़ रहे हैं। हमारे छोटे-छोटे बच्चे हैं, हम इस ठंड में उन्हें लेकर कहां जाएं?”
कब्जाधारियों का आरोप है कि उन्हें सामान निकालने का भी उचित समय नहीं दिया गया और प्रशासन ने तानाशाही रवैया अपनाया।
कई निर्माण जमींदोज, कार्रवाई जारी
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में आखिरकार प्रशासन ने अपना अभियान जारी रखा। पुलिस द्वारा भीड़ को खदेड़ने के बाद जेसीबी ने गरजते हुए कई अवैध निर्माणों, दुकानों और बाउंड्री वॉल को जमींदोज कर दिया। मलबे के ढेर और टूटते घरों के बीच लोगों का आक्रोश और बेबसी साफ दिखाई दे रही थी।
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान अभी रुकने वाला नहीं है। चिन्हित किए गए सभी अवैध निर्माणों को हटाया जाएगा। वहीं, पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने और हंगामा करने के आरोप में कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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