पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में 'चक्का जाम': हाईकोर्ट बेंच की मांग पर सड़कों पर उतरे वकील
Truth India Times Digital Desk
मेरठ/पश्चिमी यूपी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर बुधवार को जबरदस्त उबाल देखा गया। ‘हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति’ के आह्वान पर पश्चिम उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में पूर्ण बंदी रही। इस आंदोलन का सबसे व्यापक असर मेरठ में देखने को मिला, जहाँ वकीलों के समर्थन में व्यापारिक संगठनों ने बाजार बंद रखे और सुरक्षा कारणों से स्कूल-कॉलेजों में भी ताले लटके रहे।
1200 संगठनों का मिला समर्थन
आंदोलन की अगुवाई कर रहे अधिवक्ताओं को समाज के हर वर्ग का साथ मिल रहा है। संघर्ष समिति के मुताबिक, पश्चिमी यूपी के लगभग 1200 से अधिक संगठनों ने इस बंद को अपना समर्थन दिया है। मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और बागपत जैसे प्रमुख जिलों में अधिवक्ता सुबह से ही सड़कों पर उतर आए और केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
“बेंच नहीं तो वोट नहीं” का नारा
मेरठ में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वकीलों ने साफ कर दिया कि जब तक पश्चिमी यूपी के करोड़ों लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के लिए यहाँ हाईकोर्ट की बेंच स्थापित नहीं होती, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। वकीलों का तर्क है कि मेरठ से प्रयागराज की दूरी लगभग 600-700 किलोमीटर है, जिससे वादकारियों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।
स्कूल-कॉलेज और व्यापार रहा ठप
बंद के चलते मेरठ और आसपास के जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। सड़कों पर वकीलों के जुलूस के कारण कई जगहों पर लंबा जाम लगा। आवश्यक सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात किया है।
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