बांदा में खनन पट्टों का सख्त प्रशासनिक निरीक्षण: मानकों के भीतर संचालन की पुष्टि, अवैध खनन पर प्रशासन की पैनी नज़र

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में खनन गतिविधियों में पारदर्शिता और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों पर, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) और खान अधिकारी ने संयुक्त रूप से जिले के स्वीकृत बालू/मोरम खनन क्षेत्रों का गहन औचक निरीक्षण किया। यह प्रशासनिक कार्रवाई अवैध खनन को रोकने और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्वीकृत क्षेत्र के भीतर हो रहा था खनन

निरीक्षण टीम सबसे पहले मर्काखादर गांव के खंड संख्या 04 में स्वीकृत बालू/मोरम खनन पट्टा क्षेत्र पहुँची। यहाँ की गई विस्तृत जाँच में पाया गया कि पट्टाधारक द्वारा खनन और परिवहन का कार्य अपने स्वीकृत क्षेत्र की सीमाओं के भीतर ही किया जा रहा था।

प्रशासनिक टीम ने यह जाँच अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग करते हुए की। स्वीकृत क्षेत्र के सटीक जियोकॉर्डिनेट्स के आधार पर तैयार की गई KML (Keyhole Markup Language) फाइल का उपयोग किया गया और इसका मिलान मौके पर गाटा संख्या तथा क्षेत्रफल से किया गया। यह भी पुष्टि की गई कि खनन पट्टा क्षेत्र में सीमा स्तंभ/पिलर भी अपने निर्धारित स्थानों पर सही तरीके से लगे हुए हैं। यह निरीक्षण इस बात की पुष्टि करता है कि पट्टाधारक द्वारा निर्धारित भौगोलिक सीमाओं और मानकों का सख्ती से पालन किया जा रहा है।

खंड संख्या 03 की भी हुई जाँच

इसके अतिरिक्त, टीम ने ग्राम मर्काखादर के खंड संख्या 03 में स्वीकृत बालू/मोरम खनन क्षेत्र का भी जायजा लिया। हालांकि, इस खंड के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) प्राप्त करने की प्रक्रिया अभी चल रही है, फिर भी प्रशासन ने यहाँ अग्रिम तैयारी और मानकों की जाँच की।

खंड संख्या 03 में, रिप्लेनिशमेंट स्टडी में उल्लिखित खनिज की मात्रा की जाँच के लिए ड्रोन कैमरा और जीपीएस जैसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जब खनन कार्य शुरू हो, तो वह वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से हो, जिससे पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो।

जिला प्रशासन का यह संयुक्त और तकनीक-आधारित निरीक्षण स्पष्ट संकेत देता है कि बांदा में खनन नियमों के उल्लंघन को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन लगातार यह सुनिश्चित कर रहा है कि वैध खनन ही हो और उससे प्राप्त राजस्व का उपयोग जिले के विकास कार्यों में किया जा सके।

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