माघ मेला 2026: बांदा में रोडवेज की 'जनता बसें' भरेंगी फर्राटा: 10% सस्ता होगा सफरचित्रकूट धाम मंडल से चलेंगी 280 विशेष बसें, बांदा से होंगी 80 का संचालन
Banda/Truth India Times Digital Desk
उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026 में प्रयागराज में लगने वाले विश्व प्रसिद्ध माघ मेले के लिए बुंदेलखंड के श्रद्धालुओं को बड़ी राहत दी है। चित्रकूट धाम मंडल से कुल 280 विशेष बसें संचालित करने की विस्तृत योजना तैयार की गई है, जिससे लाखों श्रद्धालुओं का आवागमन सुगम हो सके। इन बसों का संचालन 1 जनवरी 2026 से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 तक जारी रहेगा।
मंडलवार बसों का आवंटन
परिवहन विभाग द्वारा जारी योजना के तहत, चित्रकूट धाम मंडल के विभिन्न डिपो से बसों का आवंटन इस प्रकार किया गया है, ताकि बुंदेलखंड के हर कोने से श्रद्धालु आसानी से पहुँच सकें:
- बांदा डिपो: 80 बसें
- महोबा डिपो: 80 बसें
- राठ डिपो: 65 बसें
- हमीरपुर डिपो: 55 बसें
इन 280 बसों का मुख्य लक्ष्य माघ मेले के छह प्रमुख स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की भीड़ को बिना किसी असुविधा के प्रयागराज के मेला स्थल तक पहुँचाना है।
15 मिनट में मिलेगी अगली बस
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, परिवहन विभाग ने फ्रिक्वेंसी (आवृत्ति) पर विशेष जोर दिया है। बांदा डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (ARM) मुकेश बाबू गुप्ता ने जानकारी दी कि तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए प्रत्येक 15 मिनट में एक बस संचालित की जाएगी।
बस सेवाओं का संचालन 1 जनवरी 2026 की सुबह 5 बजे से शुरू हो जाएगा। प्रयागराज में बसों को अस्थायी बस अड्डों – नेहरू पार्क और लेप्रोसी से संचालित किया जाएगा, जिन्हें विशेष रूप से माघ मेले के लिए विकसित किया गया है।
सुरक्षा और रखरखाव पर विशेष ध्यान
एआरएम मुकेश बाबू गुप्ता ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी बसों की तकनीकी स्थिति को दुरुस्त रखा जाएगा। व्यवस्थाओं में निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
- दृश्यता: सभी बसों में फॉग लैंप और हेडलाइट की अच्छी स्थिति सुनिश्चित की जाएगी।
- सुरक्षा: विंडो कैचर और हॉर्न की कार्यप्रणाली की जाँच की जाएगी।
- यात्री आराम: सीटों की दशा और साफ-सफाई पर विशेष जोर दिया जाएगा।
- पहचान: श्रद्धालुओं को सही बस पहचानने में आसानी हो, इसके लिए बसों पर रूट के अनुसार मेला स्टीकर लगाए जाएंगे।
आवागमन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति या तकनीकी खराबी से निपटने के लिए, सात सदस्यीय दो तकनीकी टीमें भी पूरे रूट पर तैनात रहेंगी। यह व्यापक व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं की उपलब्धता और सुविधा को ध्यान में रखकर की जा रही हैं।
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