कचेहरी पुल के नीचे 'गुंडई' और 'कब्जे' पर भड़की ABVP
प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times
उन्नाव। जिला मुख्यालय की नाक के नीचे चल रहे अवैध साम्राज्य और बेलगाम होते जा रहे अतिक्रमणकारियों के खिलाफ अब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने मोर्चा खोल दिया है। कचेहरी पुल के नीचे न केवल यातायात को बंधक बनाया जा रहा है, बल्कि वहां जमे दबंगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने छात्रों के साथ मारपीट तक की। प्रशासन की चुप्पी और आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी न होने पर परिषद के छात्रों ने सिटी मजिस्ट्रेट का घेराव कर तीखे सवाल दागे हैं।
कचेहरी के नीचे ‘अवैध कब्जा’: प्रशासन की अनदेखी का परिणाम
शहर का सबसे व्यस्ततम इलाका कहा जाने वाला कचेहरी पुल के नीचे का क्षेत्र आज बदहाली और अवैध कब्जों का केंद्र बन चुका है। एबीवीपी पदाधिकारियों का आरोप है कि सड़क किनारे अवैध रूप से लगाई गई अस्थायी दुकानों और ठेलों ने पैदल चलने तक की जगह नहीं छोड़ी है।
हैरानी की बात यह है कि जहाँ जिला प्रशासन, न्यायालय और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का जमावड़ा रहता है, वहीं उनकी आंखों के सामने यह अवैध कब्जा फल-फूल रहा है। इससे न केवल वकील और फरियादी परेशान हैं, बल्कि स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र और आम नागरिक हर दिन घंटों जाम में फंसते हैं। सवाल यह उठता है कि नगर पालिका और जिला प्रशासन ने अब तक इस अतिक्रमण पर अपनी आंखें क्यों मूंद रखी हैं?
24 दिसंबर की घटना: क्या कानून का डर खत्म हो चुका है?
विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र 24 दिसंबर 2024 को हुई वह शर्मनाक घटना है, जिसमें कुछ दुकानदारों ने खरीदारी करने आए एबीवीपी के छात्रों के साथ सरेआम मारपीट की थी। छात्रों का कहना है कि उन्होंने कानून का सम्मान करते हुए तत्काल पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि—“क्या उन्नाव में अपराधियों को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है? आखिर क्यों पुलिस इन दबंगों पर हाथ डालने से कतरा रही है?”
सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन: छात्रों का अल्टीमेटम
बड़ी संख्या में कचेहरी पहुंचे एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने सिटी मजिस्ट्रेट राजू राज को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से दो प्रमुख मांगें रखी गई हैं:
- कचेहरी पुल के नीचे से तत्काल अवैध अतिक्रमण हटाया जाए ताकि यातायात सुगम हो सके।
- 24 दिसंबर की मारपीट के फरार आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए।
छात्रों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को हल्के में लिया या केवल कागजी आश्वासन दिया, तो विद्यार्थी परिषद सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
जवाबदेही से बचता प्रशासन? सिटी मजिस्ट्रेट का आश्वासन
विरोध के स्वर तेज होते देख सिटी मजिस्ट्रेट राजू राज ने छात्रों को शांत कराने का प्रयास किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामला संज्ञान में है और नगर पालिका सहित संबंधित विभागों से इस पर रिपोर्ट तलब की गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही अतिक्रमण हटाने के लिए नियमानुसार अभियान चलाया जाएगा और पुलिस अधिकारियों को फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के कड़े निर्देश दिए जाएंगे।
हालांकि, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे आश्वासन पहले भी कई बार मिल चुके हैं, लेकिन कुछ दिनों की ‘दिखावटी’ कार्रवाई के बाद स्थिति फिर जस की तस हो जाती है। अब देखना यह है कि क्या इस बार प्रशासन एबीवीपी के दबाव में कोई ठोस और स्थाई समाधान निकाल पाता है या नहीं।
जनता के सवाल: प्रशासन के नाम
- क्या कचेहरी जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर बिना ‘सांठगांठ’ के इतना बड़ा अतिक्रमण संभव है?
- पुलिस की नाक के नीचे छात्रों को पीटने वाले आरोपी अब तक कैसे फरार हैं?
- नगर पालिका की ‘एंटी-एनक्रोचमेंट’ सेल केवल गरीब रेहड़ी वालों पर चलती है या इन संगठित कब्जाधारियों पर भी कोई कार्रवाई होगी?
उन्नाव की जनता अब कागजी वादों से थक चुकी है, उसे जमीन पर कार्रवाई चाहिए।
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