अतर्रा में सड़क निर्माण में 'खेल'
अतर्रा (बांदा) | प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
बांदा जिले की अतर्रा नगर पालिका परिषद एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह विकास नहीं बल्कि विकास के नाम पर हो रही कथित ‘खानापूर्ति’ है। नगर के राजनगर वार्ड क्रमांक 05 में निर्माणाधीन सीसी सड़क और नाली निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार और मानकों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर ठेकेदार की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और शासन-प्रशासन से इस ‘घपले’ की जांच की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
वार्ड नंबर 5 के राजनगर मोहल्ले में इन दिनों सीसी रोड और नाली का निर्माण कार्य चल रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा कार्य पूरी तरह से गुणवत्ता विहीन है। मोहल्ले के निवासी अभय सिंह राजू, अरविंद, ममता, गोविंद और अनामिका ने बताया कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि ठेकेदार ने लागत बचाने के चक्कर में पुरानी जर्जर सड़क को पूरी तरह से उखाड़ा ही नहीं। कायदे से पुरानी सड़क की सफाई और खुदाई के बाद नई बेस तैयार होनी चाहिए थी, लेकिन यहाँ पुरानी सड़क के ऊपर ही सीमेंट और कंक्रीट का लेप लगाया जा रहा है।
मानकों की अनदेखी: न मोटाई सही, न मसाला
मोहल्ले वासियों के अनुसार, सड़क की मोटाई निर्धारित मानकों (DPR) से काफी कम रखी जा रही है। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि सड़क इतनी कमजोर बनाई जा रही है कि यह कुछ ही महीनों में टूटने लगेगी। इसके अलावा, नाली निर्माण में भी घटिया सामग्री के इस्तेमाल की बात सामने आई है।
“यह मार्ग केवल मोहल्ले का रास्ता नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों को अतर्रा नगर के मुख्य केंद्र से जोड़ने वाला एक प्रमुख संपर्क मार्ग है। यदि सड़क अभी से गुणवत्ता विहीन बनेगी, तो आने वाले समय में भारी वाहनों के दबाव से यहाँ बड़े गड्ढे हो जाएंगे और आम जनता का पैसा पानी में बह जाएगा।” – एक स्थानीय निवासी
अधिकारियों तक पहुँची शिकायत की गूँज
मामले की गंभीरता को देखते हुए वार्डवासियों ने केवल मौखिक विरोध नहीं किया, बल्कि इसे कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी उठाया है। नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अतर्रा नगर पालिका परिषद की अधिशासी अधिकारी (EO) विजेता गुप्ता को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपकर कार्य रोकने और जांच कराने की मांग की है।
इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मंडलायुक्त बाँदा–चित्रकूट धाम मंडल और जिलाधिकारी बाँदा को भी डाक के माध्यम से शिकायती पत्र भेजकर स्थलीय निरीक्षण की अपील की है।
प्रशासन का पक्ष: जांच के बाद होगी कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद नगर पालिका प्रशासन सक्रिय हुआ है। अतर्रा नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी विजेता गुप्ता ने मीडिया को जानकारी दी कि मोहल्ले वासियों का शिकायती पत्र उन्हें प्राप्त हो गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाएगा। यदि निर्माण कार्य मानकों के विपरीत पाया जाता है, तो ठेकेदार का भुगतान रोका जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विकास या विनाश: जनता के टैक्स का सवाल?
बांदा जिले में विकास कार्यों में अनियमितता का यह कोई पहला मामला नहीं है। अक्सर ठेकेदार और कनिष्ठ अभियंताओं (JE) की मिलीभगत से सरकारी धन के बंदरबांट की खबरें आती रहती हैं। राजनगर वार्ड 5 की जनता का यह सजग कदम अन्य वार्डों के लिए भी मिसाल है। लोगों का कहना है कि जब तक निर्माण कार्य की पूरी खुदाई कर नए सिरे से सही अनुपात में सामग्री का उपयोग नहीं होता, वे कार्य का विरोध जारी रखेंगे।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी हस्तक्षेप करता है और क्या दोषी ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर फाइलों में जांच दबाकर सड़क का निर्माण ‘जैसे-तैसे’ पूरा कर दिया जाएगा।
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