मौत के साये में अतर्रा के ग्रामीण: सड़कों पर झूल रहे हाईटेंशन तार
अतर्रा (बांदा) |प्रलभ शरण चौधरी Truth India Times
बांदा/अतर्रा। विकास के दावों और बिजली व्यवस्था में सुधार के बड़े-बड़े वादों के बीच अतर्रा के ग्रामीण क्षेत्रों से डरा देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। यहाँ बिजली विभाग की घोर लापरवाही के कारण गाँवों की सड़कों और रास्तों पर मौत के तार झूल रहे हैं। कहीं तार जमीन से महज कुछ फिट की ऊँचाई पर हैं, तो कहीं जर्जर खंभे किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। ग्रामीण लंबे समय से सुधार की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन विभाग की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है।
सड़कों पर बिछा है ‘मौत का जाल’
अतर्रा के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य सड़कों और खेतों के ऊपर से गुजरने वाले विद्युत तार काफी नीचे तक लटक आए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि साइकिल सवार और दुपहिया वाहन चालकों को इन तारों के नीचे से गुजरते समय अपनी जान हथेली पर रखनी पड़ती है। कई स्थानों पर तो तार जमीन के इतने करीब हैं कि किसी भी समय कोई राहगीर या मवेशी इसकी चपेट में आ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि ऊंचे लोडर वाहनों या ट्रैक्टर-ट्रॉली के गुजरने के दौरान अक्सर इन तारों से चिंगारियां निकलती हैं, जिससे आग लगने का भय बना रहता है। विशेष रूप से बच्चों के लिए ये तार ‘साइलेंट किलर’ बने हुए हैं, जो खेलते समय अनजाने में इनके करीब पहुंच सकते हैं।
पशुओं और खेती पर भी संकट
ग्रामीण भारत में पशुपालन आजीविका का मुख्य साधन है। ऊंचे घास या झाड़ियों में छिपे ये झूलते तार चरागाहों में चर रहे मवेशियों के लिए काल बन सकते हैं। तेज हवा चलने पर ये तार आपस में टकराते हैं, जिससे निकलने वाली चिंगारियां सूखी फसलों में आग लगा सकती हैं। हाल के दिनों में हुई छिटपुट घटनाओं के बाद भी बिजली विभाग ने सुरक्षा ऑडिट करने की जहमत नहीं उठाई है।
“शिकायतों का अंबार, कार्रवाई सिफर”
क्षेत्रीय ग्रामीणों में विद्युत विभाग के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जर्जर खंभों और झूलते तारों की समस्या को लेकर टोल-फ्री नंबर से लेकर स्थानीय सब-स्टेशन तक दर्जनों बार शिकायतें दर्ज कराई गईं। ग्रामीणों का कहना है कि लाइनमैन और कर्मचारी आते हैं, मुआयना करते हैं और ‘ऊपर से तार नहीं मिल रहे’ या ‘बजट नहीं है’ जैसा बहाना बनाकर चले जाते हैं।
ग्रामीणों ने दो-टूक कहा है कि विभाग शायद किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है। उनका सवाल है कि क्या प्रशासन तभी जागेगा जब कोई मासूम इन तारों की भेंट चढ़ जाएगा?
विभाग का पक्ष: फिर वही पुराना आश्वासन
इस गंभीर समस्या को लेकर जब Truth India Times ने विद्युत विभाग के एसडीओ (SDO) विमलेश कुमार से बात की, तो उन्होंने हमेशा की तरह वही रटा-रटाया जवाब दिया। उन्होंने कहा, “ग्रामीण क्षेत्रों से झूलते तारों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। हम जल्द ही टीम भेजकर उन स्थानों को चिन्हित करेंगे जहाँ तार ज्यादा नीचे हैं। मरम्मत कार्य और जर्जर पोल बदलने की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर जल्द ही पूरा किया जाएगा।”
हालांकि, एसडीओ के इस आश्वासन पर ग्रामीणों को अब भरोसा नहीं रहा। उनका कहना है कि ऐसे आश्वासन पहले भी कई बार मिल चुके हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
मुख्य मांगें:
- तारों की खिंचाई: सभी ढीले और झूलते तारों को तुरंत खींचकर टाइट किया जाए।
- जर्जर खंभों का बदलाव: जो बिजली के खंभे झुक गए हैं या गल चुके हैं, उन्हें फौरन सीमेंटेड पोल से बदला जाए।
- एबीसी केबलिंग: घनी आबादी वाले ग्रामीण इलाकों में नंगे तारों की जगह सुरक्षित केबल (ABC) डाली जाए।
प्रलभ शरण चौधरी की विशेष टिप्पणी: अतर्रा का ग्रामीण अंचल आज आधुनिकता की दौड़ में पीछे छूटता नजर आ रहा है, जहाँ बुनियादी सुरक्षा भी एक चुनौती बनी हुई है। बिजली विभाग को यह समझना होगा कि बिजली का बिल वसूलने में जितनी तेजी दिखाई जाती है, वैसी ही तत्परता सुरक्षा इंतजामों में भी जरूरी है। यदि जल्द ही इन तारों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो आने वाले समय में कोई भी अप्रिय घटना पूरे विभाग को कटघरे में खड़ा कर देगी।
जनता की समस्या, हमारी प्राथमिकता – ट्रुथ इंडिया टाइम्स
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