पूर्व मंत्री के नेतृत्व में व्यापारियों ने घेरी तहसील
बबेरू (बांदा) | प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद अंतर्गत बबेरू कस्बे में सोमवार को उस समय माहौल गर्मा गया, जब मुख्य चौराहे के स्थानांतरण (शिफ्टिंग) के विरोध में व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा। पूर्व मंत्री शिव शंकर सिंह पटेल के नेतृत्व में सैकड़ों व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने तहसील परिसर का घेराव किया और घंटों तक धरने पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
क्या है पूरा मामला?
प्रशासन द्वारा बबेरू के मुख्य चौराहे को कमासिन रोड पर स्थानांतरित किए जाने की योजना बनाई गई है। जैसे ही यह खबर कस्बे में फैली, व्यापारियों में हड़कंप मच गया। व्यापारियों का तर्क है कि मुख्य चौराहा ही कस्बे की व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र है। यदि इसे यहां से हटाया गया, तो सैकड़ों दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा और वर्षों से स्थापित बाजार पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
पूर्व मंत्री ने संभाली कमान: “अन्याय नहीं होने देंगे”
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पूर्व मंत्री शिव शंकर सिंह पटेल ने तहसील परिसर में गरजते हुए कहा कि प्रशासन का यह निर्णय पूरी तरह से जनविरोधी है। उन्होंने कहा, “बबेरू मुख्य चौराहा इस कस्बे की पहचान है। व्यापारियों ने खून-पसीने से अपनी दुकानें खड़ी की हैं। बिना किसी ठोस विकल्प और व्यापारियों की सहमति के इस तरह का स्थानांतरण तानाशाही है। हम किसी भी कीमत पर व्यापारियों का उत्पीड़न नहीं होने देंगे।”
पटेल ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इस फैसले को तुरंत वापस नहीं लिया, तो यह आंदोलन केवल तहसील तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे जनपद में उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
व्यापारियों की मुख्य मांगें और चिंताएं
तहसील घेराव के दौरान व्यापारियों ने उपजिलाधिकारी (SDM) को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा। व्यापारियों की मुख्य चिंताएं निम्नलिखित हैं:
- आर्थिक नुकसान: चौराहा शिफ्ट होने से ग्राहकों का आवागमन बदल जाएगा, जिससे पुरानी दुकानों की बिक्री शून्य हो जाएगी।
- बेरोजगारी का डर: दुकानों पर काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे।
- संपत्ति का मूल्य: मुख्य चौराहे पर स्थित जमीनों और दुकानों की कीमत में भारी गिरावट आएगी।
- व्यावहारिक कठिनाई: व्यापारियों का कहना है कि कमासिन रोड पर शिफ्टिंग से यातायात की समस्या हल होने के बजाय और जटिल हो जाएगी।
प्रशासन का रुख और सुरक्षा व्यवस्था
व्यापारियों के भारी जमावड़े को देखते हुए तहसील परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारियों को समझाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों का तर्क है कि चौराहे को ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने और कस्बे के सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से शिफ्ट करने का प्रस्ताव है। हालांकि, व्यापारियों के कड़े रुख को देखते हुए फिलहाल प्रशासन बैकफुट पर नजर आ रहा है।
धरना स्थल पर घंटों चला हंगामा
दोपहर से शुरू हुआ धरना शाम तक जारी रहा। प्रदर्शनकारी ‘व्यापारी एकता जिंदाबाद’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगाते रहे। कस्बे के मुख्य बाजारों से होते हुए व्यापारी जुलूस की शक्ल में तहसील पहुंचे थे, जिससे कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। स्थानीय लोगों का भी व्यापारियों को भरपूर समर्थन मिल रहा है, क्योंकि यह मामला केवल दुकानदारों का नहीं बल्कि आम जनता की सुविधा से भी जुड़ा है।
आगे की रणनीति
पूर्व मंत्री शिव शंकर सिंह पटेल ने स्पष्ट किया है कि वे प्रशासन को 48 घंटे का समय दे रहे हैं। यदि इस अवधि में शिफ्टिंग की प्रक्रिया पर रोक लगाने का लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो व्यापारी अपने प्रतिष्ठान अनिश्चितकाल के लिए बंद कर देंगे और चक्का जाम करने को मजबूर होंगे।
निष्कर्ष: विकास बनाम विरासत की लड़ाई
बबेरू का यह विवाद अब ‘विकास के प्रशासनिक दावों’ और ‘व्यापारियों की आजीविका’ के बीच की जंग बन चुका है। प्रशासन जहां इसे जाम की समस्या का समाधान बता रहा है, वहीं व्यापारी इसे अपनी आर्थिक हत्या मान रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार और जिला प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे का क्या बीच का रास्ता निकालता है।
About The Author
Discover more from Truth India Times
Subscribe to get the latest posts sent to your email.