अतर्रा में मौत का जाल बने झूलते बिजली के तार
Banda/Truth India Times Digital Desk
बांदा (अतर्रा): उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के अतर्रा तहसील अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। यहां कई गांवों में बिजली के तार और खंभे इस कदर जर्जर हो चुके हैं कि वे कभी भी किसी बड़ी अनहोनी का सबब बन सकते हैं। झूलते हुए हाई-वोल्टेज तार कहीं जमीन को छू रहे हैं तो कहीं गलियों के बीच मौत बनकर लटक रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
जमीन के करीब लटक रही ‘मौत’
ग्रामीण इलाकों के मुख्य मार्गों और गलियों में बिजली के तार खतरनाक ढंग से नीचे लटक आए हैं। कई स्थानों पर तो ये तार जमीन से मात्र 5-6 फीट की ऊंचाई पर हैं। इससे राहगीरों, साइकिल सवारों और दुपहिया वाहन चालकों का निकलना दूभर हो गया है। सबसे ज्यादा खतरा कृषि कार्य के लिए निकलने वाले ट्रैक्टरों और ऊंचे मालवाहक वाहनों को है, जिनके इन तारों की चपेट में आने की आशंका हर वक्त बनी रहती है।
ग्रामीणों का दर्द: ‘सुनवाई सिर्फ कागजों पर’
क्षेत्र के निवासी राजाभैया, पप्पू, अरविंद और सूरज सहित दर्जनों ग्रामीणों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वे बिजली की इस जर्जर व्यवस्था से मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि, “हमने कई बार ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से बिजली विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है। विभाग शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।”
ग्रामीणों ने बताया कि जर्जर खंभे इतने कमजोर हो चुके हैं कि वे मामूली हवा में भी कांपने लगते हैं। कई खंभों के आधार (बेस) पूरी तरह सड़ चुके हैं, जो कभी भी गिरकर जान-माल का नुकसान कर सकते हैं।
बारिश और तेज हवा में बढ़ जाता है खतरा
क्षेत्र में जब भी मौसम खराब होता है या तेज हवाएं चलती हैं, तो ये झूलते तार आपस में टकराकर चिंगारियां छोड़ते हैं, जिससे पूरे गांव की बिजली तो गुल होती ही है, साथ ही शॉर्ट सर्किट से घरों के उपकरण जलने और आग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा, गांवों में घूमने वाले बेसहारा पशु और बाहर खेल रहे बच्चे भी इन लटकते तारों की आसान चपेट में आ सकते हैं। कई बार पशु इन तारों की चपेट में आकर दम तोड़ चुके हैं, लेकिन फिर भी विभाग की आंखें नहीं खुल रही हैं।
SDO का आश्वासन: ‘जल्द भेजी जाएगी टीम’
मामला बढ़ता देख और ग्रामीणों के कड़े विरोध के बाद विद्युत विभाग हरकत में आता दिख रहा है। अतर्रा के विद्युत उपमंडल अधिकारी (SDO) विमलेश कुमार ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा है कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने आश्वासन दिया कि, “जल्द ही संबंधित क्षेत्र में लाइनमैन और तकनीकी कर्मचारियों की टीम भेजी जाएगी। जहां तार ज्यादा झूल रहे हैं उन्हें खिंचवाया जाएगा और जर्जर खंभों को बदलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”
ग्रामीणों की चेतावनी: ‘काम न हुआ तो करेंगे आंदोलन’
विभागीय आश्वासन के बावजूद ग्रामीणों का भरोसा डगमगाया हुआ है। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर इन झूलते तारों को दुरुस्त नहीं किया गया और जर्जर खंभों को नहीं बदला गया, तो वे तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे ग्रामीण क्षेत्र का ‘फायर ऑडिट’ और ‘इलेक्ट्रिकल ऑडिट’ कराया जाए ताकि भविष्य में हादसों की गुंजाइश खत्म हो सके।
निष्कर्ष: लापरवाही पड़ सकती है भारी
बिजली विभाग की यह सुस्ती किसी निर्दोष की जान ले सकती है। प्रशासन को चाहिए कि वह SDO के आश्वासन को हकीकत में बदले और अतर्रा के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘जर्जर तार एवं खंभा बदलो अभियान’ को प्राथमिकता के आधार पर चलाए।
खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- समस्या: अतर्रा के गांवों में बिजली के तारों का अत्यधिक नीचे लटकना।
- खतरा: राहगीरों, बच्चों और मवेशियों के लिए जानलेवा स्थिति।
- विभागीय स्थिति: बार-बार शिकायत के बाद भी अब तक कार्रवाई शून्य।
- अधिकारी का दावा: SDO विमलेश कुमार ने टीम भेजकर मरम्मत का वादा किया।
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