बांदा पुलिस की बड़ी कामयाबी: अंतरराज्यीय एटीएम ठग गिरफ्तार, कार्ड बदलकर उड़ाता था लाखों; ₹19,500 बरामद
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
बांदा। उत्तर प्रदेश की बांदा पुलिस ने एटीएम कार्ड बदलकर मासूम लोगों की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय अपराधी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। कोतवाली नगर पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय ठगों के नेटवर्क को करारा झटका लगा है। पुलिस ने अभियुक्त के पास से ठगी की गई रकम का एक हिस्सा बरामद कर लिया है, जबकि उसके फरार साथी की तलाश में दबिश दी जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
घटनाक्रम की शुरुआत 20 फरवरी 2026 को हुई, जब कोतवाली नगर क्षेत्र के निवासी सुनील कुमार ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित सुनील के अनुसार, 16 फरवरी 2026 को वह एक एटीएम बूथ पर पैसे निकालने गए थे। वहां मौजूद दो अज्ञात युवकों ने मदद करने के बहाने बड़ी ही चतुराई से उनका एटीएम कार्ड बदल लिया। पीड़ित को इस धोखाधड़ी की भनक तब लगी जब उनके खाते से पैसे कटने के संदेश प्राप्त हुए।
शिकायत मिलते ही बांदा पुलिस हरकत में आई और कोतवाली नगर पुलिस टीम ने तत्काल अज्ञात अभियुक्तों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच की कमान संभाली।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
बांदा पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में गठित टीम ने इस मामले को सुलझाने के लिए आधुनिक और पारंपरिक दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी साक्ष्यों (Digital Evidence) का गहन विश्लेषण किया। सर्विलांस टीम की मदद से संदिग्धों की पहचान सुनिश्चित की गई।
मुखबिर की सटीक सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने पल्हरी नहर रोड, बड़ा बाईपास के पास घेराबंदी की। यहां से पुलिस ने एक अभियुक्त को दबोच लिया। पूछताछ के दौरान अभियुक्त ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उसने अपने साथी रवि उर्फ भीमा के साथ मिलकर 16 फरवरी को सुनील कुमार के साथ ठगी की वारदात को अंजाम दिया था।
ठगी का तरीका: ‘मदद के नाम पर धोखा’
गिरफ्तार अभियुक्त ने पूछताछ में पुलिस के सामने ठगी के जिस तरीके (Modus Operandi) का खुलासा किया, वह चौंकाने वाला है। उसने बताया कि वह और उसका साथी अक्सर ऐसे एटीएम बूथों को निशाना बनाते थे जहां सुरक्षा गार्ड नहीं होते थे। वे वहां ऐसे लोगों की तलाश करते थे जो बुजुर्ग हों या जिन्हें तकनीकी जानकारी की कमी के कारण पैसे निकालने में परेशानी हो रही हो।
- भरोसा जीतना: ठग पहले मदद के बहाने पीड़ित के करीब जाते थे।
- पिन चोरी: जब पीड़ित ट्रांजैक्शन कर रहा होता, तो वे बातों में उलझाकर या पीछे से झांककर गुप्त पिन नंबर देख लेते थे।
- कार्ड की अदला-बदली: जैसे ही मौका मिलता, वे हाथ की सफाई दिखाते हुए पीड़ित का असली कार्ड अपने पास रख लेते और उसे उसी बैंक का दूसरा मिलता-जुलता कार्ड थमा देते थे।
- खाता खाली करना: पीड़ित के जाने के तुरंत बाद वे दूसरे एटीएम में जाकर सारा पैसा निकाल लेते थे।
बरामदगी और फरार अपराधी की तलाश
पुलिस ने गिरफ्तार अभियुक्त के कब्जे से चोरी किए गए 19,500 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, यह अपराधी एक अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा है जो यूपी के अलावा पड़ोसी राज्यों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम देता रहा है। फिलहाल, इस गिरोह का दूसरा सदस्य रवि उर्फ भीमा फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
बांदा पुलिस की अपील
इस सफलता के बाद बांदा पुलिस ने आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि:
- एटीएम के अंदर किसी भी अनजान व्यक्ति की मदद न लें।
- अपना पिन नंबर डालते समय कीपैड को दूसरे हाथ से ढंक लें।
- यदि कोई कार्ड बदलने की कोशिश करे या संदिग्ध लगे, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
- एटीएम से बाहर निकलते समय यह सुनिश्चित करें कि कार्ड आपका ही है।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह ने बांदा और आसपास के जिलों में और कितनी वारदातों को अंजाम दिया है। अभियुक्त को जेल भेज दिया गया है और उसके आपराधिक इतिहास की कुंडली खंगाली जा रही है।
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