धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा की तैयारियां पूरी
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
बांदा। बुंदेलखंड की धरती एक बार फिर आध्यात्मिक रंग में रंगने को तैयार है। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ‘हनुमंत कथा’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर बांदा ही नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड और पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं और प्रशासन ने भी सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं।
15 जनवरी को भव्य कलश यात्रा से होगा आगाज
आयोजन की औपचारिक शुरुआत 15 जनवरी को एक भव्य कलश यात्रा के साथ होगी। फाउंडेशन के संस्थापक प्रवीण सिंह ने बताया कि यह कलश यात्रा शहर के ऐतिहासिक रामलीला मैदान से शुरू होगी। यात्रा बाबूलाल चौराहा जैसे प्रमुख स्थलों से गुजरते हुए राइफल क्लब में जाकर संपन्न होगी। इस कलश यात्रा में हजारों महिलाओं के शामिल होने की उम्मीद है, साथ ही विभिन्न देवी-देवताओं की सजीव झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पूरे यात्रा मार्ग को भगवा झंडों और फूलों से सजाया गया है।
16 से 20 जनवरी तक बहेगी ज्ञान की गंगा
मुख्य कार्यक्रम ‘हनुमंत कथा’ का शुभारंभ 16 जनवरी को होगा, जो लगातार 20 जनवरी तक चलेगी। बांदा के मवई बाईपास क्षेत्र में स्थित लगभग सौ बीघे के विशाल मैदान को इसके लिए तैयार किया गया है। आयोजकों का अनुमान है कि इस ‘आस्था के महाकुंभ’ में प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने और धीरेंद्र शास्त्री के दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
आधुनिक तकनीक: पहली बार बांदा में ‘जर्मन हैंगर’ पंडाल
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता और चर्चा का विषय यहाँ बना विशाल पंडाल है, जिसे अत्याधुनिक ‘जर्मन हैंगर’ तकनीक से तैयार किया गया है। प्रवीण सिंह के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस तकनीक का चुनाव किया गया है।
जर्मन हैंगर पंडाल की मुख्य विशेषताएं:
- स्तंभ रहित ढांचा (No Pillars): इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि पंडाल के बीच में कोई खंभा नहीं होता। इससे हजारों श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के सीधे व्यासपीठ को देख सकेंगे।
- वॉटरप्रूफ और फायर-रेसिस्टेंट: यह ढांचा पूरी तरह से अग्निरोधी और जलरोधक है। एल्युमिनियम और उच्च गुणवत्ता वाले सिंथेटिक फैब्रिक से बने होने के कारण यह अचानक होने वाली बारिश या तेज हवाओं को झेलने में पूरी तरह सक्षम है।
- बेहतर वेंटिलेशन: पंडाल की ऊंचाई काफी अधिक रखी गई है, जिससे भारी भीड़ होने के बावजूद हवा का प्रवाह (Air Circulation) बना रहेगा और श्रद्धालुओं को उमस या घुटन महसूस नहीं होगी।
जिला प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था
लाखों की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मवई बाईपास की ओर जाने वाले रास्तों पर यातायात प्रबंधन (Traffic Management) के लिए विशेष योजना बनाई गई है ताकि आम जनता को असुविधा न हो। पार्किंग के लिए कथा स्थल से कुछ दूरी पर अलग-अलग जोन बनाए गए हैं। शुद्ध पेयजल, मोबाइल शौचालय और स्वास्थ्य कैंपों की व्यवस्था भी बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन द्वारा सुनिश्चित की गई है।
बुंदेलखंड में उत्साह का माहौल
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के आगमन को लेकर बांदा के होटलों, धर्मशालाओं और निजी निवासों में मेहमानों का तांता लगना शुरू हो गया है। स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों में भी इस आयोजन को लेकर सकारात्मक ऊर्जा है, क्योंकि इतने बड़े स्तर के कार्यक्रम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है।
बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अनुशासन बनाए रखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। 16 जनवरी से शुरू होने वाली यह कथा बांदा के इतिहास में आध्यात्मिक दृष्टि से एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है।
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