'मनरेगा बचाओ आंदोलन' के लखनऊ कूच से पहले कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित हाउस अरेस्ट, भारी पुलिस बल तैनात
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
बांदा। उत्तर प्रदेश में ‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’ को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित विधानसभा घेराव कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। इसी कड़ी में मंगलवार सुबह बांदा पुलिस ने कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर लिया। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
सुबह 7:30 बजे पुलिस का पहरा
मिली जानकारी के अनुसार, बांदा प्रशासन ने यह कार्रवाई मंगलवार सुबह लगभग 7:30 बजे की। पुलिस की एक टीम जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित के आवास पर पहुंची और उन्हें घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी। पुलिस का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बिना अनुमति के होने वाले विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए उठाया गया है। राजेश दीक्षित के घर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि वे समर्थकों के साथ लखनऊ के लिए रवाना न हो सकें।
क्या है ‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’?
कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (MGNREGA) कानून में किए गए बदलावों और नए ‘VB-G RAM G’ कानून के विरोध में देशभर में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ छेड़ रखा है। कांग्रेस का आरोप है कि नया कानून ग्रामीण मजदूरों के ‘काम के अधिकार’ को छीन रहा है और पंचायतों की शक्ति को कम कर रहा है।
इसी आंदोलन के तहत उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने 7 फरवरी से 15 फरवरी के बीच प्रदेशव्यापी रणनीति बनाई थी, जिसके अंतिम चरण में आज लखनऊ स्थित विधानसभा का घेराव किया जाना था। बांदा से सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ राजेश दीक्षित को लखनऊ पहुंचना था।
“लोकतंत्र की हत्या कर रही सरकार” – राजेश दीक्षित
नजरबंद किए जाने के बाद राजेश दीक्षित ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने फोन पर मीडिया से बात करते हुए कहा,
“यह सरकार लोकतंत्र की हत्या कर रही है। हम शांतिपूर्ण ढंग से मजदूरों और गरीबों के हक की आवाज उठाने लखनऊ जा रहे थे, लेकिन पुलिसिया तंत्र का उपयोग कर हमें रोका जा रहा है। मनरेगा गरीबों की लाइफलाइन है और इसे खत्म करने की साजिश को हम सफल नहीं होने देंगे। भले ही मुझे घर में कैद कर दिया जाए, लेकिन कांग्रेस का हर कार्यकर्ता आज सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराएगा।”
जिले भर में अलर्ट, कार्यकर्ताओं की धरपकड़
राजेश दीक्षित की गिरफ्तारी और हाउस अरेस्ट की खबर फैलते ही बांदा के अन्य प्रमुख कांग्रेस नेताओं के घरों के बाहर भी पुलिस की हलचल बढ़ गई है। प्रशासन को अंदेशा है कि जिलाध्यक्ष को रोकने के बाद कार्यकर्ता छोटे-छोटे समूहों में निजी वाहनों या ट्रेनों के जरिए लखनऊ कूच कर सकते हैं। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि कांग्रेस ने 10 जनवरी से इस 45 दिवसीय आंदोलन की शुरुआत की थी। पार्टी की मुख्य मांगें हैं:
- नए VB-G RAM G कानून को वापस लिया जाए।
- मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।
- मजदूरों को 100 दिन के काम की कानूनी गारंटी सुनिश्चित हो।
- पंचायती राज संस्थाओं के अधिकारों में कटौती बंद हो।
बांदा में हुई इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश प्रशासन विपक्षी दलों के इस बड़े प्रदर्शन को लेकर पूरी तरह चौकन्ना है। अब देखना यह होगा कि जिलाध्यक्ष की नजरबंदी के बावजूद बांदा से कितनी संख्या में कार्यकर्ता लखनऊ पहुंच पाते हैं।
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