दहेज की वेदी पर चढ़ी खुशियाँ, बुलेट के लिए विवाहिता को भूखा रख पीटा
बांदा/बबेरू | उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में दहेज लोभियों की एक और शर्मनाक करतूत सामने आई है। यहाँ एक विवाहिता को बुलेट मोटरसाइकिल की मांग पूरी न होने पर न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि उसे दाने-दाने को मोहताज कर घर से बाहर निकाल दिया गया। बबेरू कोतवाली पुलिस ने पीड़िता की तहरीर के आधार पर उसके पति, सास-ससुर और देवरों सहित कुल सात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
शादी के चंद महीनों बाद ही शुरू हुआ प्रताड़ना का खेल
मामला बबेरू कोतवाली क्षेत्र का है, जहाँ की रहने वाली एक युवती का विवाह बड़े ही अरमानों के साथ 7 मई 2025 को फतेहपुर जिले के खखरेडू थाना क्षेत्र के मकसूदनपुर (खरकल) निवासी शिवशंकर (पुत्र नरोत्तमदास प्रजापति) के साथ हुआ था। पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार बेटी के सुखद भविष्य के लिए शादी में 3 लाख रुपये नकद और करीब डेढ़ लाख रुपये मूल्य का घरेलू सामान व उपहार दिए थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिन हाथों में उन्होंने अपनी बेटी सौंपी है, वे रक्षक नहीं बल्कि भक्षक निकलेंगे।
कलेवा से ही शुरू हो गई थी बुलेट की डिमांड
पीड़िता द्वारा पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, लालच की नींव शादी के दिन ही पड़ गई थी। आरोप है कि कलेवा की रस्म के दौरान ही ननद अभिलाषा उर्फ लक्ष्मी, देवर अरुण उर्फ शिवप्रसाद और महेश उर्फ शिवदत्त ने विदाई रोकने की धमकी दी थी। उनका कहना था कि जब तक बुलेट मोटरसाइकिल नहीं मिलेगी, तब तक बहू की विदाई नहीं होने देंगे। उस समय जैसे-तैसे समझा-बुझाकर मामला शांत कराया गया, लेकिन ससुराल पहुँचते ही जुल्मों का सिलसिला तेज हो गया।
दिन में सिर्फ एक बार खाना और रोज की मारपीट
ससुराल में पीड़िता का जीवन नर्क के समान बना दिया गया। पीड़िता का आरोप है कि पति शिवशंकर, ससुर नरोत्तमदास, सास श्यामकलिया और देवर उसे आए दिन गालियां देते और मारपीट करते थे। क्रूरता की हद तो तब पार हो गई जब विवाहिता को दिन में केवल एक बार भोजन दिया जाने लगा। उसे बुनियादी सुविधाओं से वंचित कर दिया गया और लगातार मायके से अतिरिक्त दहेज लाने का दबाव बनाया जाने लगा।
“जल्दी आओ वरना ये मार डालेंगे…”
बीती 8 दिसंबर 2025 को पीड़िता के सब्र का बांध टूट गया। उसने किसी तरह पड़ोसी के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर अपने पिता को गुप्त रूप से फोन किया। पीड़िता ने रोते हुए कहा, “पिताजी, मुझे यहाँ से ले जाओ, वरना ये लोग मुझे जान से मार डालेंगे।” बेटी की चीख सुनकर घबराए परिजन तत्काल उसके ससुराल मकसूदनपुर पहुँचे। वहाँ की स्थिति देख पिता दंग रह गए और अपनी बेटी को बचाकर वापस अपने घर ले आए।
पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों की तलाश
मायके पहुँचकर पीड़िता ने अपने साथ हुई पूरी आपबीती सुनाई, जिसके बाद बबेरू कोतवाली में मामले की लिखित शिकायत की गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है:
- शिवशंकर (पति)
- नरोत्तमदास (ससुर)
- श्यामकलिया (सास)
- महेश उर्फ शिवदत्त (देवर)
- अरुण उर्फ शिवप्रसाद (देवर)
- शिवनारायण उर्फ गणेश (देवर)
- अभिलाषा उर्फ लक्ष्मी (ननद)
बबेरू कोतवाली प्रभारी ने बताया कि दहेज उत्पीड़न और मारपीट सहित विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।
समाज के लिए एक गंभीर सवाल
यह घटना एक बार फिर समाज के उस कुरूप चेहरे को उजागर करती है, जहाँ आज भी बेटियों को प्यार और सम्मान के बजाय दहेज की वस्तु समझा जाता है। सात महीने पहले जिस घर को पीड़िता ने अपना माना, वहीं के सदस्यों ने महज एक मोटरसाइकिल के लिए उसे भूखा रखा और घर से निकाल दिया। अब न्याय की उम्मीद पुलिस और कानून पर टिकी है।
रिपोर्ट: प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times
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