आबकारी विभाग ने 'एक्सपायर' हो चुकी 39 पेटी विदेशी शराब पर चलवाया लोडर; प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी
बांदा। प्रलभ शरण चौधरी / ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में आबकारी विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक्सपायर हो चुकी अंग्रेजी शराब के जखीरे को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों की पैनी निगरानी में रस्तोगी स्थित आबकारी शराब गोदाम पर यह निस्तारण प्रक्रिया संपन्न हुई। लोडर के जरिए शराब की बोतलों और केन को चकनाचूर कर यह सुनिश्चित किया गया कि यह घातक स्टॉक किसी भी सूरत में बाजार या जनता तक न पहुँच सके।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, बांदा के मुख्य आबकारी गोदाम में ‘मैकडॉवेल नंबर 1’ ब्रांड की करीब 39 पेटियां काफी समय से रखी हुई थीं। विभागीय ऑडिट के दौरान यह पाया गया कि इस शराब की मियाद (Expiry Date) एक वर्ष से अधिक समय पहले ही समाप्त हो चुकी है। नियमानुसार, एक्सपायर शराब स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक और जानलेवा हो सकती है, जिसके बाद आबकारी विभाग ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजकर इसके निस्तारण की अनुमति मांगी थी।
पारदर्शिता के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय समिति
मामले की संवेदनशीलता और राजस्व हितों को देखते हुए जिलाधिकारी ने शराब के निस्तारण में पूर्ण पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए। इसके लिए तीन सदस्यीय उच्चाधिकार समिति का गठन किया गया। समिति में जिलाधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में सिटी मजिस्ट्रेट संदीप केला, जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र और सहायक आबकारी आयुक्त (प्रवर्तन-2) शामिल रहे।
इन तीनों वरिष्ठ अधिकारियों की प्रत्यक्ष मौजूदगी में गोदाम से शराब की पेटियों को बाहर निकाला गया। इसके बाद एक लोडर की मदद से शराब के केन और बोतलों को जमीन पर बिछाकर नष्ट किया गया।
दुरुपयोग रोकने के लिए उठाया गया कदम
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि एक्सपायर शराब को नष्ट करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यदि यह शराब किसी भी तरह से बाजार में पहुँच जाती या चोरी छिपे बेची जाती, तो यह गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती थी। साथ ही, पुराने स्टॉक को नष्ट करने से राजस्व की गणना में भी स्पष्टता आती है।
ट्रुथ इंडिया टाइम्स का विश्लेषण: आखिर क्यों ‘एक्सपायर’ हुई इतनी शराब?
यद्यपि प्रशासन ने इसे नष्ट कर अपनी जिम्मेदारी निभाई है, लेकिन ट्रुथ इंडिया टाइम्स कुछ अहम सवाल उठाता है जिनका समाधान सरकार और विभाग को खोजना चाहिए:
- स्टॉक मैनेजमेंट पर सवाल: आखिर 39 पेटी शराब गोदाम में रखी-रखी एक्सपायर कैसे हो गई? क्या स्टॉक रोटेशन (First-In-First-Out) का पालन नहीं किया गया?
- राजस्व का नुकसान: शराब का एक्सपायर होना सीधे तौर पर सरकारी राजस्व का नुकसान है। विभाग को यह जांच करनी चाहिए कि क्या यह मांग की कमी थी या प्रबंधन की लापरवाही।
- निरीक्षण की निरंतरता: क्या अन्य जनपदों के गोदामों में भी इसी तरह का एक्सपायर्ड स्टॉक पड़ा है? इसकी नियमित जांच के लिए एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम की आवश्यकता है।
समाधान की दिशा में सुझाव
सरकार और आबकारी मुख्यालय को इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
- डिजिटल इन्वेंट्री: प्रत्येक शराब की बोतल और पेटी के लिए क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग हो, जो एक्सपायरी से 3 महीने पहले ही अलर्ट जारी कर दे।
- बिक्री की समीक्षा: जिन क्षेत्रों में कुछ विशेष ब्रांड्स की बिक्री कम है, वहां से स्टॉक को समय रहते दूसरे केंद्रों पर स्थानांतरित करने की नीति बनाई जाए।
- नियमित ऑडिट: जिला स्तर पर हर तीन महीने में स्टॉक का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) अनिवार्य हो।
बांदा में हुई यह कार्रवाई एक ओर जहां नियमों के पालन का संदेश देती है, वहीं दूसरी ओर विभागीय सतर्कता पर भी ध्यान आकर्षित करती है। फिलहाल, पूरी प्रक्रिया की वीडियो ग्राफी कराई गई है और नष्ट की गई शराब के अवशेषों का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित किया गया है।
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