बांदा में कुदरत की मार
प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में कुदरत के कहर ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। जसपुरा क्षेत्र में हुई बेमौसम आंधी, भारी बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी सोना उगलती फसलों को मिट्टी में मिला दिया है। इस आपदा से किसान गहरे सदमे और चिंता में हैं।
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता पुष्पेंद्र चुनाले ने किसानों की इस बदहाली पर गहरी संवेदना और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से पुरजोर अपील की है कि प्रभावित किसानों को बिना किसी देरी के उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
पुष्पेंद्र चुनाले ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से जसपुरा ब्लॉक में मुआवजे का वितरण पक्षपातपूर्ण रहा है। उनके अनुसार, सरकारी तंत्र केवल सत्ता पक्ष से जुड़े रसूखदार और बड़े किसानों को ही लाभ पहुँचाता है, जबकि छोटा और आम किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक जाता है। उन्होंने लेखपालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम किसान सभी दस्तावेज सौंपते हैं, लेकिन अंत में उन्हें या तो नगण्य मुआवजा मिलता है या ‘मानक’ का हवाला देकर उनके दावों को खारिज कर दिया जाता है।
सपा नेता ने तहसील पैलानी के अधिकारियों से मांग की है कि तत्काल राजस्व टीमों को गांवों में भेजकर फसलों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए। उन्होंने कहा कि जसपुरा का किसान पहले से ही खाद की किल्लत, बिजली संकट और आवारा पशुओं की मार झेल रहा था, अब इस ओलावृष्टि ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
शहरी मानसिकता पर तंज कसते हुए पुष्पेंद्र चुनाले ने कहा, “शहर के लोग इस मौसम को खुशनुमा कहकर आनंद लेते हैं, लेकिन वे यह नहीं समझते कि जिस अन्न से उनका पेट भरता है, उसे उगाने वाले किसान पर इस मौसम का क्या बीत रही है।”
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