होटल रॉयल ऑर्बिट में भाजपा नेता और कथा आयोजक समर्थकों के बीच खूनी संघर्ष
प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times
बांदा: बुंदेलखंड की धरती पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा के समापन के बाद जहां शहर में शांति और आध्यात्मिकता का माहौल होना चाहिए था, वहीं देर रात बांदा के एक प्रतिष्ठित होटल में भारी बवाल हो गया। शहर के ‘होटल रॉयल ऑर्बिट’ में कमरे को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद इस कदर बढ़ा कि भाजपा नेता और कथा आयोजक के समर्थकों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। इस मारपीट की घटना ने न केवल पुलिसिया सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है।
होटल के कमरे ने बिगाड़ी ‘शांति’
पूरी घटना बांदा शहर के सिविल लाइंस स्थित होटल रॉयल ऑर्बिट की है। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के मुताबिक, बागेश्वर बाबा की कथा के सफल आयोजन के बाद आयोजन समिति के लोग होटल में ठहरे हुए थे। इसी दौरान भाजपा नेता ब्रजभूषण शरण सिंह के समर्थकों और कथा के मुख्य आयोजक प्रवीण सिंह के समर्थकों के बीच होटल के कमरे के आवंटन को लेकर कहासुनी शुरू हुई।
विवाद की शुरुआत महज एक कमरे की चाबी और ‘पहले कौन’ के अहंकार से हुई, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि दोनों पक्षों की ओर से पहले गाली-गलौज हुई और फिर होटल की लॉबी ही अखाड़े में तब्दील हो गई।
वायरल वीडियो में दिखा तांडव
सोशल मीडिया पर इस घटना के कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे रसूखदार नेता के समर्थक और आयोजक पक्ष के लोग एक-दूसरे पर हमलावर हैं। होटल के फर्नीचर को नुकसान पहुँचाया गया और लॉबी में मौजूद स्टाफ और अन्य मेहमानों के बीच अफरातफरी का माहौल बन गया।
वीडियो में कुछ लोग बीच-बचाव करते दिख रहे हैं, लेकिन सत्ता और रसूख की हनक में डूबे समर्थक किसी की भी सुनने को तैयार नहीं थे। वायरल फुटेज में मारपीट के दौरान सुरक्षा गार्ड भी असहाय नजर आए।
आमने-सामने दो प्रभावशाली पक्ष
यह मामला इसलिए भी तूल पकड़ रहा है क्योंकि इसमें शामिल दोनों ही पक्ष काफी प्रभावशाली हैं। एक तरफ भाजपा नेता ब्रजभूषण सिंह के समर्थक हैं, जिनका जिले की राजनीति में अपना वजन है, तो दूसरी तरफ प्रवीण सिंह हैं, जिन्होंने धीरेंद्र शास्त्री जैसे बड़े संत की कथा का सफल आयोजन कराया है। इस घटना ने आयोजन की सफलता पर भी एक कड़वा धब्बा लगा दिया है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कथा के दौरान भी कुछ प्रोटोकॉल और पास को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही थी, जिसका गुबार होटल में कमरे की बुकिंग को लेकर फूट पड़ा।
पुलिस की भूमिका और जांच
होटल में हंगामे की सूचना मिलने पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी। पुलिस ने होटल के सीसीटीवी कैमरों को अपने कब्जे में ले लिया है। क्षेत्राधिकारी (CO) और कोतवाली प्रभारी का कहना है कि दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि, खबर लिखे जाने तक किसी भी पक्ष की ओर से गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। हाई-प्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस भी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। होटल मैनेजमेंट ने भी संपत्ति को हुए नुकसान की शिकायत दर्ज कराई है।
सत्ता का रसूख या भक्ति का अहंकार?
बांदा के प्रबुद्ध नागरिकों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि एक तरफ शहर में ‘राम राज’ और ‘सनातन’ की बातें की जा रही थीं, वहीं दूसरी तरफ कथा के तुरंत बाद इस तरह का आचरण निंदनीय है। क्या यह सत्ता का मद है या फिर केवल अपनी वरिष्ठता साबित करने की जंग?
होटल रॉयल ऑर्बिट जैसी सार्वजनिक जगह पर हुई इस मारपीट ने बांदा की छवि को बाहर से आए मेहमानों की नजर में भी धूमिल किया है। अब देखना यह है कि क्या बांदा पुलिस बिना किसी राजनीतिक दबाव के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेगी या इस मामले को भी आपसी समझौते की चादर से ढंक दिया जाएगा।
Truth India Times की विशेष टिप्पणी
जब धर्म और राजनीति का मेल होता है, तो मर्यादा की उम्मीद की जाती है। बांदा की इस घटना ने साबित कर दिया है कि रसूखदारों के लिए मर्यादा महज भाषणों तक सीमित है। होटल में हुई यह गुंडागर्दी उस भक्ति के संदेश को कमजोर करती है जिसे बागेश्वर बाबा ने तीन दिनों तक बांदा की जनता को दिया था।
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