2.82 करोड़ का जुर्माना, 92 वाहन जब्त
प्रलभ शरण चौधरी, ट्रुथ इंडिया टाइम्स
बांदा: बुंदेलखंड की धरती और केन नदी की जलधारा को जख्मी करने वाले खनन माफियाओं के खिलाफ दिसंबर 2025 का महीना कार्रवाई का दौर रहा। जिला प्रशासन की टास्क फोर्स ने बीते एक महीने में अवैध खनन, ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन के खिलाफ घेराबंदी करते हुए 2.82 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। इस दौरान 92 वाहनों को जब्त कर थानों में निरुद्ध किया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई ने उन कंपनियों की नींद उड़ा दी है जो स्वीकृत क्षेत्र से बाहर जाकर प्रकृति का दोहन कर रही थीं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जुर्माना इन माफियाओं के लिए पर्याप्त है या यह केवल एक वार्षिक औपचारिकता बनकर रह जाएगा?
मरौलीखादर से सिन्धनकलां तक: अवैध खनन की खुली लूट
दिसंबर महीने में हुई जांच ने यह साफ कर दिया है कि खनन पट्टे की आड़ में किस तरह ‘लूट की संस्कृति’ फल-फूल रही है।
- डेस्कोन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड: बांदा तहसील के मरौलीखादर में संजीव कुमार गुप्ता की कंपनी ने निर्धारित क्षेत्र की सीमाओं को लांघकर 25,886 घन मीटर बालू का अवैध खनन किया। प्रशासन ने इस पर 2.32 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा जुर्माना लगाया है।
- मेसर्स कविन कंस्ट्रक्शन: पैलानी तहसील के सिन्धनकलां में शशांक शेखर शुक्ला द्वारा स्वीकृत क्षेत्र के बाहर 5512 घन मीटर बालू का अवैध खनन पाया गया, जिस पर 49.60 लाख रुपये का जुर्माना लगा।
- मेसर्स ए.एस. ट्रेडर्स: सादीमदनपुर में अशोक कुमार सचान की कंपनी पर भी 917 घन मीटर अवैध खनन के लिए 8.25 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है।
ओवरलोडिंग: सड़कों को बर्बाद करने का खेल
प्रशासन ने 1 से 31 दिसंबर के बीच 92 वाहनों को ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन के आरोप में पकड़ा। इनमें से 47 वाहनों ने तो तत्काल शमन शुल्क भरकर खुद को छुड़ा लिया, जिससे सरकार को 16.69 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। यह दर्शाता है कि माफियाओं के लिए लाखों का जुर्माना देना कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि वे एक ही रात में इससे कहीं अधिक कमाई कर लेते हैं।
‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ के जरिए सरकार और सिस्टम से तीखे सवाल
कार्रवाई के आंकड़े प्रभावशाली लग सकते हैं, लेकिन जवाबदेही के पैमाने पर कई सवाल आज भी अनुत्तरित हैं:
- क्या जुर्माना काफी है? 2.82 करोड़ का जुर्माना उन करोड़ों के टर्नओवर के सामने ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। क्या इन कंपनियों के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए जाएंगे या जुर्माना भरकर इन्हें फिर से केन नदी का सीना छलनी करने की अनुमति मिल जाएगी?
- राजस्व और खनिज विभाग की चुप्पी: 6 और 7 दिसंबर को जब जांच हुई, तब हजारों घन मीटर खनन पाया गया। क्या यह खनन एक दिन में हुआ? स्थानीय लेखपाल, कानूनगो और खनिज निरीक्षक तब कहाँ थे जब सैकड़ों ट्रक नदी से अवैध बालू लेकर निकल रहे थे? क्या उन पर भी कोई कार्रवाई होगी?
- पर्यावरण की अपूर्णीय क्षति: 25 हजार घन मीटर बालू का अवैध दोहन नदी के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को नष्ट कर देता है। क्या सरकार ने इस जुर्माने में ‘एनवायर्नमेंटल डैमेज कॉस्ट’ (पर्यावरण क्षति लागत) को जोड़ा है? केवल राजस्व की चिंता करना क्या पर्यावरण के प्रति अपराध नहीं है?
- ओवरलोडिंग से टूटी सड़कें: बुंदेलखंड की सड़कें इन भारी ट्रकों के कारण समय से पहले दम तोड़ रही हैं। क्या वसूल किए गए जुर्माने का हिस्सा इन ग्रामीण सड़कों की मरम्मत में खर्च होगा?
प्रशासन का दावा: जारी रहेगी सख्ती
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दिसंबर में जारी नोटिसों के अनुपालन में अब तक 1.28 करोड़ रुपये का राजस्व जमा कराया जा चुका है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित टास्क फोर्स का कहना है कि वे डिजिटल मैपिंग और ड्रोन कैमरों का सहारा ले रहे हैं ताकि अवैध खनन के क्षेत्रों को चिन्हित किया जा सके। प्रशासन का दावा है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
निष्कर्ष: माफिया बनाम जनता
बांदा में खनन हमेशा से एक संवेदनशील और राजनीतिक मुद्दा रहा है। 2.82 करोड़ का जुर्माना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन जब तक इस धंधे में शामिल रसूखदारों और पर्दे के पीछे बैठे संरक्षकों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक केन नदी और बांदा की सड़कें सुरक्षित नहीं हैं। जनता को अब यह देखना है कि क्या यह ‘ऑपरेशन क्लीन’ जनवरी में भी इसी रफ्तार से जारी रहेगा या नए साल के जश्न में फिर से अवैध ट्रकों की गूंज सुनाई देगी।
ट्रुथ इंडिया टाइम्स के लिए प्रलभ शरण चौधरी की रिपोर्ट।
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