1000 ट्रकों में लगा 'जासूसी' सिस्टम
बांदा | (प्रलभ शरण चौधरी – ट्रुथ इंडिया टाइम्स)
बांदा। बुंदेलखंड में मौरंग (बालू) के अवैध खेल और ओवरलोडिंग के काले साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और खनिज विभाग ने अब ‘डिजिटल स्ट्राइक’ शुरू कर दी है। बांदा जिले की नदियों से निकलने वाले लाल सोने (मौरंग) के अवैध परिवहन पर लगाम कसने के लिए अब ट्रकों और डंपरों पर व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) का पहरा बिठा दिया गया है। अब कोई भी वाहन चालक या माफिया विभाग की नजरों से बचकर मौरंग चोरी नहीं कर पाएगा।
खनिज विभाग ने अब तक जिले के 1000 वाहनों में यह अत्याधुनिक सिस्टम लगा दिया है। विभाग का लक्ष्य कुल 1200 वाहनों को इस रडार पर लाने का है। इस तकनीक के लागू होते ही अवैध खनन और बिना रॉयल्टी के मौरंग ढोने वाले सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है।
कैसे काम करेगा यह ‘डिजिटल जासूस’?
व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) कोई साधारण GPS नहीं है, बल्कि यह खनिज विभाग के एकीकृत पोर्टल और अधिकारियों के मोबाइल फोन से सीधे जुड़ा हुआ है।
यह सिस्टम पल-पल की जानकारी साझा करेगा, जैसे:
- खदान की पहचान: वाहन ने किस अधिकृत खदान से मौरंग लोड की है।
- रूट की निगरानी: वाहन निर्धारित रास्ते से जा रहा है या रास्ता बदलकर अवैध तरीके से निकल रहा है।
- समय का हिसाब: यदि कोई ट्रक रास्ते में कहीं संदिग्ध रूप से रुकता है या जाम में फंसता है, तो उसका पूरा रिकॉर्ड मिनटों में अधिकारियों के डैशबोर्ड पर होगा।
- रॉयल्टी की जांच: सिस्टम यह भी बताएगा कि वाहन के पास वैध रॉयल्टी पर्ची है या वह फर्जी कागजात के दम पर चल रहा है।
एक चूक और 25 हजार का झटका
खनिज विभाग ने नियमों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। यदि कोई वाहन बिना वीटीएस (VTS) के परिवहन करता पाया गया या सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की गई, तो उस पर सीधे 25 हजार रुपये का जुर्माना ठोंका जाएगा। यह कार्रवाई मौके पर ही डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
प्रथम चरण में इस हाईटेक प्रणाली को बांदा और हमीरपुर जैसे महत्वपूर्ण खनन क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। इसकी सफलता के बाद इसे पूरे प्रदेश में अनिवार्य कर दिया जाएगा।
CCTV से लैस ‘चेक गेट’ बढ़ाएंगे सुरक्षा
सिर्फ ट्रैकिंग सिस्टम ही नहीं, बल्कि जमीन पर भी घेराबंदी मजबूत की गई है। बांदा जिले में मौरंग के प्रमुख निकास मार्गों पर तीन हाईटेक चेक गेट स्थापित किए गए हैं। इनमें से दो गेट नरैनी क्षेत्र में और एक गेट मटौंध थाना क्षेत्र में लगाया गया है।
ये चेक गेट 24 घंटे तीसरी आंख यानी CCTV कैमरों की निगरानी में रहेंगे। यहां से गुजरने वाले हर वाहन की फोटो और नंबर प्लेट का रिकॉर्ड ऑटोमैटिक पोर्टल पर अपलोड होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि वीटीएस में जो डेटा दिख रहा है, वह भौतिक रूप से सड़क पर चल रहे वाहन से मेल खाता है या नहीं।
16 खदानों पर सीधी नजर
बांदा जिले में वर्तमान में मौरंग का बड़ा कारोबार फैला हुआ है। जिले में सांड़ी, अमलोर खादर, मरौली-5, इटवां, सादी मदनपुर, सिंधनकला, तेरा, भदावल, मरका-4, पड़ोहरा और हटेटीपुरवा सहित कुल 16 मौरंग खदानें पूरी सक्रियता से संचालित हैं।
इन खदानों से रोजाना लगभग 1200 वाहन मौरंग लेकर विभिन्न जनपदों और राज्यों की ओर रवाना होते हैं। अब तक 1000 वाहनों में वीटीएस लग चुका है और शेष 200 वाहनों को भी जल्द ही इस सिस्टम से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। बिना इस सिस्टम के अब किसी भी वाहन को खदान के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
राजस्व चोरी पर लगेगा पूर्ण विराम
ट्रुथ इंडिया टाइम्स (प्रलभ शरण चौधरी) से बातचीत में विभागीय सूत्रों ने बताया कि अवैध खनन से सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगता था। माफिया अक्सर एक ही रॉयल्टी पर्ची पर कई बार चक्कर लगाते थे या निर्धारित खदान के बजाय प्रतिबंधित क्षेत्रों से खनन करते थे। वीटीएस लगने के बाद अब ऐसी ‘चलाकी’ करना नामुमकिन होगा। अधिकारी अपने ऑफिस में बैठकर ही जिले की पूरी खनिज गतिविधि को लाइव मैप पर देख सकेंगे।
प्रशासन का संदेश: नियमों का पालन करें या परिणाम भुगतें
बांदा जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि खनिज संपदा का दोहन केवल नियमों के दायरे में ही होगा। इस नई व्यवस्था से जहां एक ओर पारदर्शी व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर ईमानदारी से काम करने वाले पट्टाधारकों और ट्रांसपोर्टरों को बेवजह की पुलिसिया पूछताछ से निजात मिलेगी।
निष्कर्ष: बांदा में वीटीएस का लागू होना अवैध खनन के खिलाफ जंग में एक मील का पत्थर है। यह तकनीक न केवल नदियों के पर्यावरण को बचाने में मदद करेगी, बल्कि सरकारी खजाने में ईमानदारी की रॉयल्टी भी सुनिश्चित करेगी। अब देखना यह है कि क्या तकनीक के इस जाल को मौरंग माफिया काट पाएंगे या फिर खाकी और तकनीक का यह गठजोड़ उन्हें हमेशा के लिए बेदम कर देगा।
रिपोर्ट: प्रलभ शरण चौधरी, ट्रुथ इंडिया टाइम्स
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