केन नदी में अवैध मछली शिकार पर बवाल
Banda/Truth India Times Digital Desk
बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली केन नदी इन दिनों माफियाओं और दबंगों के अवैध कारोबार का अड्डा बन गई है। ताजा मामला अवैध मछली शिकार से जुड़ा है, जिसे लेकर चटगन और पथरी गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी (DM) कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि हमीरपुर जिले का एक संगठित गिरोह फर्जी रसीदों के दम पर स्थानीय पुलिस और प्रशासन की आंखों में धूल झोंक रहा है और विरोध करने पर ग्रामीणों को अवैध हथियारों के दम पर डराया-धमकाया जा रहा है।
20-25 लोगों का गिरोह, फर्जीवाड़े का खेल
शिकायतकर्ता कमलेश निषाद के नेतृत्व में पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि मौदहा (हमीरपुर) का एक गिरोह पिछले काफी समय से केन नदी के जल क्षेत्र में कब्जा जमाए हुए है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि इस गिरोह का सरगना रईस खान नाम का व्यक्ति है, जो अपने साथ 20 से 25 हथियारबंद लोगों को लेकर नदी पर आता है। यह गिरोह बिना किसी वैध पट्टे या सरकारी अनुमति के बड़े पैमाने पर जाल डालकर मछलियां पकड़ रहा है। जब पुलिस मौके पर पहुंचती है, तो ये लोग कथित तौर पर फर्जी रसीदें और फर्जी दस्तावेज दिखाकर उन्हें गुमराह कर देते हैं।
मत्स्य विभाग के अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
ग्रामीणों ने केवल माफियाओं पर ही नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र पर भी सवाल उठाए हैं। डीएम को सौंपे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि रईस खान और उसके साथी बांदा मत्स्य विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से इस अवैध काम को अंजाम दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग के मौन समर्थन के कारण ही इन दबंगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे स्थानीय मछुआरों को नदी के पास फटकने तक नहीं दे रहे हैं।
आजीविका पर संकट: ‘भूखे मर रहे हैं बच्चे’
चटगन से पथरी गांव तक का पूरा बेल्ट निषाद समुदाय और उन परिवारों का है, जिनका जीवन सदियों से केन नदी पर ही निर्भर रहा है। कमलेश निषाद ने बताया, “मछली पकड़ना हमारा पुश्तैनी व्यवसाय है। इसी से हमारे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घर का चूल्हा जलता है। लेकिन अब इन बाहरी दबंगों ने हमें अपनी ही नदी से बेदखल कर दिया है। अगर हमें मछली नहीं पकड़ने दी गई, तो हमारे सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी।”
हथियारों का प्रदर्शन और अप्रिय घटना का डर
ग्रामीणों के अनुसार, यह मामला केवल अवैध शिकार तक सीमित नहीं रह गया है। गिरोह के पास अवैध असलहे (हथियार) होने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी स्थानीय लोग अपनी हक की बात करते हैं, तो रईस खान और ‘बाबा’ नामक व्यक्ति अपने साथियों के साथ हथियार दिखाकर उन्हें जान से मारने की धमकी देते हैं। इस वजह से पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो कभी भी नदी के किनारे कोई बड़ा खून-खराबा या अप्रिय घटना घट सकती है।
DM से मांग: तत्काल दर्ज हो FIR
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि:
- रईस खान और ‘बाबा’ के खिलाफ अवैध मछली शिकार और धोखाधड़ी की धाराओं में तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
- इनके पास मौजूद दस्तावेजों और रसीदों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- स्थानीय ग्रामीणों को सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि वे निर्भय होकर अपना व्यवसाय कर सकें।
- केन नदी के इस जल क्षेत्र को अवैध शिकार से मुक्त कराया जाए।
प्रशासनिक रुख
जिलाधिकारी कार्यालय ने ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मत्स्य विभाग और संबंधित थाना पुलिस को जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि दस्तावेजों में हेराफेरी पाई गई और बिना पट्टे के शिकार की पुष्टि हुई, तो आरोपियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष: केन नदी के प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों का पहला अधिकार है, लेकिन माफिया राज की वजह से गरीब तबका अपनी आजीविका खो रहा है। अब देखना यह है कि बांदा प्रशासन इन दबंगों के रसूख के आगे झुकता है या गरीब ग्रामीणों को उनका अधिकार वापस दिलाता है।
खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- गिरोह का सरगना: रईस खान (मौदहा, हमीरपुर)।
- आरोप: फर्जी रसीदें दिखाकर पुलिस को गुमराह करना और अवैध असलहों से डराना।
- प्रभावित क्षेत्र: चटगन और पथरी गांव के पास केन नदी का तट।
- मुख्य मांग: अवैध मछली शिकार पर रोक और आरोपियों की गिरफ्तारी।
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