बांदा की 'निर्भया' के साथ सिस्टम की क्रूरता: 5 माह बाद भी नहीं मिली 10 लाख की सरकारी मदद
बांदा/नरैनी |प्रलभ शरण चौधरी Truth India Times
बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जो सरकार के ‘महिला सुरक्षा’ और ‘त्वरित न्याय’ के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कालिंजर थाना क्षेत्र की एक 6 वर्षीय मासूम, जिसके साथ पांच महीने पहले रूह कंपा देने वाली दरिंदगी हुई थी, आज न केवल अपने घावों से लड़ रही है बल्कि सरकारी सिस्टम की बेरुखी का भी शिकार है। शासन द्वारा घोषित 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि पांच महीने बीत जाने के बाद भी पीड़िता के परिवार तक नहीं पहुंची है। न्याय और मदद की आस में भटक रहे परिवार की चीख अब ‘भागीरथी पार्टी (पी)’ के माध्यम से जिला प्रशासन के गलियारों तक पहुंची है।
25 जुलाई की वह काली रात: जब मानवता शर्मसार हुई
यह हृदयविदारक घटना 25 जुलाई 2025 की है। नरैनी तहसील के कालिंजर थाना क्षेत्र में रहने वाली 6 वर्षीय मासूम (काल्पनिक नाम पूजा) उस समय घर पर अकेली थी, जब उसके माता-पिता खेतों में मजदूरी करने गए थे। इसी का फायदा उठाकर पड़ोसी युवक अमित धुरिया (20) उसे बहला-फुसलाकर पास के सुनसान जंगल में ले गया।
वहां आरोपी ने मासूम के साथ न केवल दुष्कर्म किया, बल्कि उसकी पहचान मिटाने और उसे खामोश करने के लिए उसकी जीभ तक काट दी। दरिंदगी की हद पार करते हुए आरोपी ने उसके शरीर पर दांतों से कई गहरे घाव किए और उसे मरणासन्न हालत में छोड़कर भाग गया। ग्रामीणों ने जब मासूम को लहूलुहान और अचेत अवस्था में देखा, तब इस जघन्य अपराध का खुलासा हुआ।
कानपुर में चल रहा इलाज, अगले माह फिर होगा ऑपरेशन
पीड़िता की हालत इतनी नाजुक थी कि उसे बांदा जिला अस्पताल से तत्काल कानपुर के हैलेट अस्पताल रेफर कर दिया गया। पिछले पांच महीनों से यह मासूम जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। परिजनों के अनुसार, बच्ची की हालत अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं है और अगले महीने उसका एक और बड़ा ऑपरेशन होना तय है। मजदूर परिवार के पास इलाज के लिए पैसे खत्म हो चुके हैं, लेकिन सरकारी फाइलें अभी भी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं।
कागजों में दफन हुई 10 लाख की घोषणा
घटना के समय मचे बवाल और मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने पीड़िता के बेहतर इलाज और पुनर्वास के लिए 10 लाख रुपये की विशेष आर्थिक सहायता की घोषणा की थी। नियमतः ऐसी राशि तत्काल जारी होनी चाहिए, लेकिन पांच महीने बाद भी पीड़िता के बैंक खाते में फूटी कौड़ी नहीं आई है। भागीरथी पार्टी (पी) ने इस पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि यह प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
भागीरथी पार्टी (पी) ने खोला मोर्चा, डीएम को सौंपा ज्ञापन
शनिवार को भागीरथी पार्टी (पी) के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी बांदा से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने मुख्य रूप से दो मांगें रखी हैं:
- तत्काल भुगतान: शासन द्वारा घोषित 10 लाख रुपये की राशि बिना किसी देरी के पीड़िता के खाते में भेजी जाए ताकि उसका आगामी ऑपरेशन और इलाज बाधित न हो।
- कठोरतम सजा: आरोपी अमित धुरिया के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर उसे फांसी की सजा दिलाई जाए।
पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर 6 साल की बच्ची की जीभ काटने वाले अपराधी को अब तक फांसी या आजीवन कारावास नहीं मिला है, तो यह न्याय व्यवस्था की सुस्ती को दर्शाता है।
“सिस्टम की सुस्ती अपराधियों का हौसला बढ़ाती है”
स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब सरकार ‘मिशन शक्ति’ और ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ जैसे अभियान चला रही है, तो ऐसे जघन्य मामलों में देरी क्यों हो रही है? पीड़िता के पिता ने रोते हुए बताया, “हमें न्याय से ज्यादा अब अपनी बेटी की जान की फिक्र है। इलाज महंगा है और सरकारी मदद केवल अखबारों की सुर्खियों तक सिमट कर रह गई है।”
प्रलभ शरण चौधरी की विशेष रिपोर्ट: बांदा की इस बेटी का मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे समाज और प्रशासनिक मशीनरी के लिए एक परीक्षा है। क्या हम एक 6 साल की बच्ची को, जिसकी आवाज दरिंदे ने छीन ली, आर्थिक मदद और न्याय भी नहीं दे सकते? Truth India Times इस मामले की लगातार पैरवी करता रहेगा जब तक कि उस मासूम को उसका हक और अपराधी को सजा नहीं मिल जाती।
न्याय की आवाज, सत्य का साहस – ट्रुथ इंडिया टाइम्स
About The Author
Discover more from Truth India Times
Subscribe to get the latest posts sent to your email.