500 रुपये रिश्वत लेते दीवान का वीडियो वायरल
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
बांदा। उत्तर प्रदेश की मित्र पुलिस एक बार फिर अपने ही कारनामों की वजह से चर्चा में है। बांदा जिले के फतेहगंज थाने से भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने महकमे की छवि पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। यहाँ तैनात एक दीवान का रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) पलाश बंसल ने कड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपित दीवान को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है और मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
500 रुपये के लिए ईमान का सौदा
वायरल वीडियो फतेहगंज थाने में तैनात दीवान वीर सिंह का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, यह वीडियो करीब तीन से चार महीने पुराना है। दीवान वीर सिंह एक विवाद के आरोपित राजेंद्र सिंह के घर किसी मामले के सिलसिले में गए थे। वहाँ उन्होंने मामले को न्यायालय से खत्म कराने और कानूनी प्रक्रिया में ढील देने के नाम पर परिजनों से रिश्वत की मांग की।
वीडियो में साफ़ देखा और सुना जा सकता है कि दीवान वीर सिंह परिजनों से कह रहे हैं कि “पांच सौ रुपये से कम में बात नहीं होती है।” वह परिजनों को काम पूरा होने का पूरा भरोसा दिला रहे हैं। इसी दौरान पीड़ित पक्ष ने चालाकी से दीवान का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जिसमें वह रुपये लेकर अपनी जेब में रखते हुए दिखाई दे रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप
शनिवार की रात जैसे ही यह वीडियो विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, पुलिस प्रशासन में खलबली मच गई। भ्रष्टाचार के इस खुले खेल ने बांदा पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। वीडियो के व्यापक प्रचार-प्रसार के बाद मामला पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के संज्ञान में पहुँचा।
एसपी पलाश बंसल की सख्त कार्रवाई
भ्रष्टाचार के प्रति “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाते हुए एसपी पलाश बंसल ने देर रात ही कार्रवाई के निर्देश दिए। एसपी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह वीडियो कुछ महीने पुराना प्रतीत हो रहा है, लेकिन अपराध की प्रकृति गंभीर है। आरोपित दीवान वीर सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है।
एसपी ने इस पूरे प्रकरण की विभागीय जांच सीओ अतर्रा को सौंपी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आरोपित के खिलाफ कठोर दंडात्मक और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
भ्रष्टाचार पर लगाम की चुनौती
बांदा में पुलिस कर्मियों द्वारा रिश्वतखोरी का यह कोई पहला मामला नहीं है, लेकिन सरेआम वीडियो सामने आने से विभाग की काफी किरकिरी हो रही है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि थानों में छोटे-छोटे कामों के लिए अक्सर इस तरह की अवैध वसूली की जाती है। पुलिस अधीक्षक की इस त्वरित कार्रवाई से महकमे के अन्य लापरवाह कर्मचारियों में हड़कंप व्याप्त है।
अब देखना यह होगा कि सीओ अतर्रा की जांच रिपोर्ट में क्या निकलकर आता है और क्या आरोपित दीवान पर सेवा संबंधी कोई बड़ी कार्रवाई होती है या नहीं। फिलहाल, इस वीडियो ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार की जड़ें थानों के भीतर कितनी गहरी हैं।
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