नसीमुद्दीन सिद्दीकी का 17 जनवरी को बड़े आंदोलन का ऐलान
बांदा | प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
बांदा के ऐतिहासिक और खेलों की नर्सरी कहे जाने वाले राइफल क्लब मैदान की नीलामी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस बेशकीमती मैदान को निजी हाथों में जाने से बचाने के लिए पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने हुंकार भर दी है। सिद्दीकी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि मैदान की नीलामी प्रक्रिया को आधिकारिक रूप से नहीं रोका गया, तो 17 जनवरी को बांदा की धरती पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
सिद्दीकी ने जोर देकर कहा कि यह मैदान किसी एक राजनीतिक दल, विशेष व्यक्ति या जाति की जागीर नहीं है, बल्कि यह बांदा के हर नागरिक और आने वाली पीढ़ी के भविष्य से जुड़ा सार्वजनिक स्थल है।
भ्रम और स्थगित धरने की पूरी कहानी
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि मैदान की नीलामी रोकने को लेकर बीते कुछ दिनों से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने साझा किया कि 8 जनवरी को उन्हें सूत्रों और शासन स्तर से यह जानकारी मिली थी कि मुख्यमंत्री ने जनभावनाओं को देखते हुए नीलामी पर रोक लगाने के निर्देश दे दिए हैं।
इस सकारात्मक सूचना के बाद, उन्होंने सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए 11 जनवरी को प्रस्तावित अपना पूर्व निर्धारित धरना स्थगित कर दिया था। हालांकि, जब उन्होंने जिला प्रशासन और जिलाधिकारी से इस संबंध में पुष्टि करनी चाही, तो पता चला कि शासन से नीलामी रोकने का कोई भी आधिकारिक लिखित आदेश अब तक प्रशासन के पास नहीं पहुँचा है। इसी प्रशासनिक ढुलमुल रवैये और आदेश की अनुपलब्धता के कारण अब 17 जनवरी को आर-पार की लड़ाई का मन बनाया गया है।
हॉकी के जादूगर और राष्ट्रीय खिलाड़ियों की यादें
मैदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पूर्व मंत्री भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि राइफल क्लब मैदान सिर्फ मिट्टी का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि बांदा का गौरवशाली इतिहास है। यह वही मैदान है जहाँ हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जैसे वैश्विक दिग्गजों ने अपने खेल का प्रदर्शन किया था।
उन्होंने आगे कहा कि यह मैदान वॉलीबॉल के दर्जनों राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की जन्मस्थली रहा है। बांदा के युवाओं के लिए खेल अभ्यास का यह एकमात्र प्रमुख स्थान है। यदि इसे नीलाम कर दिया गया, तो जिले की खेल प्रतिभाएं दम तोड़ देंगी और ऐतिहासिक विरासत हमेशा के लिए मिट जाएगी।
दलगत राजनीति से ऊपर उठा समर्थन
राइफल क्लब मैदान को बचाने की यह मुहिम अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर बांदा की पूरी राजनीतिक बिरादरी एकजुट नजर आ रही है। सिद्दीकी के अनुसार, इस मैदान को बचाने के लिए कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और यहाँ तक कि भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय विधायक भी मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से अनुरोध कर चुके हैं।
नेताओं का कहना है कि विकास के नाम पर खेल के मैदानों को खत्म करना शहर के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर सभी दलों का एक सुर में बोलना यह साबित करता है कि जनता इस नीलामी के सख्त खिलाफ है।
17 जनवरी के आंदोलन की तैयारी
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने घोषणा की है कि 17 जनवरी को होने वाले इस धरने में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित, शहर अध्यक्ष अफसाना शाह, महिला जिलाध्यक्ष सीमा खान, और मुमताज अली समेत सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता और खेल प्रेमी शामिल होंगे।
आंदोलनकारियों की मांग स्पष्ट है:
- शासन तत्काल लिखित आदेश जारी कर नीलामी प्रक्रिया को पूर्णतः निरस्त करे।
- इस मैदान को भविष्य के लिए ‘स्पोर्ट्स जोन’ के रूप में संरक्षित घोषित किया जाए।
- खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए मैदान का सुंदरीकरण कराया जाए।
निष्कर्ष: बांदा की साख का सवाल
बांदा जैसे शहर में जहाँ सार्वजनिक मनोरंजन और खेलों के लिए गिने-चुने स्थान बचे हैं, वहां राइफल क्लब जैसे मैदान की नीलामी ने प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शासन जनभावनाओं और ऐतिहासिक धरोहर की रक्षा करेगा, या फिर पूंजीपतियों के हित में इस मैदान की बलि चढ़ा दी जाएगी? 17 जनवरी का धरना बांदा की इस विरासत का भविष्य तय करेगा।
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