खून से लिखा 'UGC Roll Back'
बांदा | प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर छात्र राजनीति सुलग उठी है। पंडित जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय के छात्र नेताओं ने यूजीसी के नए कानूनों को छात्र विरोधी बताते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विरोध का स्तर इस कदर बढ़ा कि छात्र नेताओं ने अपने खून से पत्र लिखकर ‘UGC Roll Back’ का नारा बुलंद किया और इसे महाविद्यालय के प्राचार्य को सौंपकर केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुँचाने की मांग की।
खून से लिखा विरोध का संदेश
बांदा के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेजों में शुमार पंडित जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय के परिसर में मंगलवार को भारी संख्या में छात्र एकत्र हुए। छात्रों का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि यूजीसी द्वारा लागू किए जा रहे नए नियम न केवल शिक्षा के व्यवसायीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे बंद करने की साजिश हैं।
विरोध प्रदर्शन के दौरान सबसे चौंकाने वाला दृश्य तब सामने आया जब छात्र नेताओं ने एक सफेद कागज पर अपने खून से ‘UGC Roll Back’ लिखा। छात्रों का कहना है कि यह खून उनके आक्रोश और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने प्राचार्य को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि जब तक ये काले कानून वापस नहीं लिए जाते, उनका आंदोलन थमेगा नहीं।
नए नियमों पर छात्रों की आपत्ति
छात्रों की मुख्य नाराजगी यूजीसी द्वारा प्रस्तावित उन बदलावों को लेकर है जो पीएचडी प्रवेश, नेट (NET) परीक्षा के स्वरूप और स्वायत्तता के नाम पर कॉलेजों की फीस बढ़ाने की छूट देते हैं। छात्रों का तर्क है कि नई शिक्षा नीति की आड़ में यूजीसी ऐसे नियम थोप रहा है जिससे शोध (Research) का स्तर गिरेगा और केवल धनी वर्ग के छात्र ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
छात्र नेताओं ने बताया कि ग्रांट को लेकर भी नियमों में जो बदलाव किए जा रहे हैं, उससे ग्रामीण क्षेत्रों के महाविद्यालयों पर वित्तीय संकट गहरा जाएगा। बांदा जैसे बुंदेलखंड के पिछड़े इलाके में, जहां छात्र पहले ही संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं, वहां ऐसे नियम छात्रों के भविष्य को अंधकार में डाल देंगे।
प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन, दी बड़ी चेतावनी
महाविद्यालय के प्राचार्य को ज्ञापन सौंपते हुए छात्र प्रतिनिधियों ने एक सुर में कहा कि यह केवल एक शुरुआत है। अगर यूजीसी ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया और छात्रों की मांगों को अनसुना किया गया, तो यह आंदोलन बांदा की सड़कों से लेकर दिल्ली के गलियारों तक पहुंचेगा। छात्रों ने चेतावनी दी है कि वे आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन, चक्का जाम और कॉलेज में तालाबंदी करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
प्राचार्य ने छात्रों की भावनाओं को समझते हुए ज्ञापन स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि उनके इस विरोध पत्र और मांगों को उच्च अधिकारियों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तक प्रेषित कर दिया जाएगा।
बुंदेलखंड में छात्र राजनीति का नया केंद्र
बांदा हमेशा से छात्र राजनीति का गढ़ रहा है, लेकिन खून से पत्र लिखने की इस घटना ने प्रशासन को भी अलर्ट कर दिया है। कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और खुफिया विभाग भी इस उग्र प्रदर्शन पर नजर बनाए हुए है। प्रलभ शरण चौधरी की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रदर्शन में विभिन्न छात्र संगठनों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हिस्सा लिया, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।
निष्कर्ष
यूजीसी के नियमों पर देशव्यापी बहस के बीच बांदा के छात्रों का यह ‘खून से लिखा पत्र’ एक बड़े विद्रोह की ओर इशारा कर रहा है। क्या सरकार छात्रों की इन चिंताओं पर ध्यान देगी या फिर शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के नाम पर यह टकराव और बढ़ेगा? ‘Truth India Times’ इस पूरे मुद्दे पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
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