नरमुंड पहनकर नाचे अघोरी
प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times
कानपुर (बिल्हौर)। औद्योगिक नगरी कानपुर के बिल्हौर क्षेत्र में रविवार को महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘भूत-भावन’ भगवान शिव की भव्य और अलौकिक बारात निकाली गई, जिसमें आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। इस शोभायात्रा का सबसे मुख्य आकर्षण वे कलाकार थे, जिन्होंने शिवगणों और अघोरियों का रूप धरकर नरमुंडों की माला पहनकर सड़क पर तांडव किया। ढोल-नगाड़ों की थाप और “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच पूरा बिल्हौर शिवमय हो गया।
नरमुंड माला और मसान की होली जैसा दृश्य
रविवार दोपहर जब बिल्हौर की गलियों से भगवान शिव की सवारी निकली, तो दृश्य काशी के मणिकर्णिका घाट जैसा जीवंत हो उठा। शिवगणों के रूप में सजे कलाकारों ने अपने गले में नरमुंडों (खोपड़ियों) की माला पहन रखी थी और शरीर पर भस्म लपेटे हुए थे। इन कलाकारों ने जब सड़क पर नृत्य करना शुरू किया, तो वहां मौजूद श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। ऐसा लग रहा था मानो साक्षात शिव अपनी टोली के साथ कैलाश से धरती पर उतर आए हों। भूत-प्रेत और पिशाच बने कलाकारों के ‘तांडव’ नृत्य ने वातावरण में एक अलग ही रोमांच भर दिया।
हनुमान जी का भव्य रूप और भगवा का उल्लास
शोभायात्रा में केवल शिवगण ही नहीं, बल्कि पवनपुत्र हनुमान का रूप धरे कलाकार ने भी सबका मन मोह लिया। गदा लेकर ऊंचे रथ पर सवार हनुमान जी के जयकारों से आसमान गूंज उठा। भक्ति में सराबोर हनुमान जी ने रथ पर ही नृत्य कर अपनी श्रद्धा प्रकट की। पूरी बारात के दौरान सैकड़ों की संख्या में युवा हाथों में भगवा ध्वज लेकर चल रहे थे। लहराते हुए भगवा झंडे और हवा में उड़ते गुलाल ने उत्सव को और भी भव्य बना दिया।
रथों पर सवार देवी-देवता और भव्य झांकियां
शिव बारात में केवल भूत-प्रेत ही नहीं, बल्कि हिंदू धर्म के विभिन्न देवी-देवताओं की सजीव झांकियां भी शामिल थीं। सजावटी रथों पर सवार शिव-पार्वती की जोड़ी को देखने के लिए छतों और बालकनियों पर लोगों की भारी भीड़ जमा रही। महिलाओं ने जगह-जगह आरती उतारकर बाबा भोलेनाथ का स्वागत किया। स्थानीय बैंड बाजों की मधुर धुन पर नाचते-गाते शिवभक्तों की टोली जिस मार्ग से गुजरी, वहां पुष्पवर्षा की गई।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भारी भीड़
बिल्हौर के मुख्य बाजारों और चौराहों से गुजरी इस शोभायात्रा को लेकर स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर तैनात रहा। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद मोर्चा संभाला।
आयोजकों का संदेश: “महाशिवरात्रि का यह पर्व हमें सिखाता है कि भगवान शिव सबको स्वीकार करते हैं, चाहे वे देवता हों या भूत-प्रेत। बिल्हौर की यह बारात आपसी भाईचारे और सनातनी संस्कृति का प्रतीक है। हर साल की तरह इस बार भी भक्तों का उत्साह दोगुना रहा।”
देर रात तक चला भंडारा और प्रसाद वितरण
शोभायात्रा के समापन के बाद बिल्हौर के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। जगह-जगह ठंडई और फलाहार के स्टॉल लगाए गए थे। श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जो देर रात तक जारी रहा। लोगों ने पूरी श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण किया और बाबा भोलेनाथ से सुख-समृद्धि की कामना की।
बिल्हौर की इस ऐतिहासिक शिव बारात ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कानपुर की धरती पर शिव भक्ति का रंग सबसे गहरा चढ़ता है।
मुख्य आकर्षण:
- अघोरी नृत्य: नरमुंड माला पहनकर शिवगणों का तांडव।
- हनुमान झांकी: गदा लेकर रथ पर सवार हनुमान जी का नृत्य।
- ध्वज प्रदर्शन: पूरी यात्रा के दौरान लहराते रहे सैकड़ों भगवा झंडे।
- भक्ति मार्ग: बिल्हौर के मुख्य बाजार से निकली भव्य सवारी।
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