हाईकोर्ट ने 'कस्टोडियल डेथ' मामले में सजा पर रोक लगाने से किया इनकार
उन्नाव | प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उन्नाव के चर्चित बलात्कार मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से एक और बड़ा झटका लगा है। सोमवार को अदालत ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत (कस्टोडियल डेथ) के मामले में सेंगर की सजा को निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि सेंगर को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा।
क्या है दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला?
दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उसने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) द्वारा सुनाई गई 10 साल की सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। सेंगर के वकीलों ने स्वास्थ्य और अन्य कानूनी आधारों पर सजा के निलंबन की अपील की थी। हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता और मामले के तथ्यों को देखते हुए राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानून के दायरे में है और इस स्तर पर सजा को निलंबित करने का कोई ठोस आधार नजर नहीं आता।
क्या था कस्टोडियल डेथ का मामला?
यह मामला अप्रैल 2018 का है, जब उन्नाव की नाबालिग पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। आरोप था कि कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई अतुल सिंह सेंगर ने पुलिस के साथ मिलकर पीड़िता के पिता को झूठे मुकदमे (आर्म्स एक्ट) में फंसाया था।
हिरासत के दौरान पीड़िता के पिता के साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी, जिसके कारण अस्पताल ले जाते समय उनकी मृत्यु हो गई। इस मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। मार्च 2020 में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने सेंगर को इस साजिश और गैर-इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास और 10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
सेंगर पर पहले से है उम्रकैद का साया
कुलदीप सिंह सेंगर पहले से ही 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। दिसंबर 2019 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने उसे नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का दोषी पाया था और ‘मरते दम तक जेल’ की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उस पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
केस की पृष्ठभूमि और सीबीआई जांच
उन्नाव कांड उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित आपराधिक घटनाओं में से एक रहा है। जब पीड़िता ने मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की थी, तब यह मामला राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप पर मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर किया गया और जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई।
सीबीआई की जांच में पाया गया कि सेंगर ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर न केवल पीड़िता का शोषण किया, बल्कि उसके पूरे परिवार को खत्म करने की साजिश रची। पीड़िता के पिता की मौत इसी साजिश का एक हिस्सा थी ताकि रेप केस को दबाया जा सके।
पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट के इस फैसले पर पीड़िता के परिजनों ने राहत की सांस ली है। पीड़ित पक्ष के वकीलों का कहना है कि कुलदीप सेंगर जैसा प्रभावशाली व्यक्ति यदि जेल से बाहर आता है, तो गवाहों की जान को खतरा हो सकता है। “न्याय की जीत हुई है। हम चाहते हैं कि दोषी अपने किए की पूरी सजा भुगते,” पीड़िता की ओर से जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा गया।
आगे क्या होगा?
सजा के निलंबन की याचिका खारिज होने के बाद अब कुलदीप सिंह सेंगर के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प बचा है। हालांकि, दो अलग-अलग मामलों में सजायाफ्ता होने के कारण उसे ऊपरी अदालतों से राहत मिलना काफी मुश्किल नजर आ रहा है। फिलहाल, वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में अपनी सजा काट रहा है।
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