गंदगी देख भड़के डॉक्टर पवन
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के कड़े निर्देशों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। इसी क्रम में शनिवार को प्रदेश के महानिदेशक (स्वास्थ्य) डॉ. पवन कुमार अचानक उन्नाव पहुंचे। डीजी हेल्थ के इस औचक निरीक्षण ने जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के अधिकारियों व कर्मचारियों में खलबली मचा दी। निरीक्षण के दौरान जहां डॉक्टरों की उपस्थिति संतोषजनक मिली, वहीं अस्पताल परिसर में पसरी गंदगी को देख डीजी हेल्थ ने कड़ी नाराजगी जाहिर की और जिम्मेदार अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।
बिना सूचना के पहुंचे महानिदेशक, मच गया हड़कंप
शनिवार की सुबह जब जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में रोजाना की तरह मरीजों की भीड़ उमड़ रही थी, तभी अचानक डीजी हेल्थ डॉ. पवन कुमार का काफिला अस्पताल परिसर में दाखिल हुआ। उनके अचानक आगमन की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। डॉ. पवन कुमार ने बिना किसी औपचारिकता के सीधे ओपीडी (OPD), इमरजेंसी वार्ड और जनरल वार्डों का रुख किया।
मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन प्राथमिकता
निरीक्षण के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए डॉ. पवन कुमार ने स्पष्ट किया कि यह दौरा कोई सामान्य दौरा नहीं था। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए। मेरा यहाँ आने का एकमात्र उद्देश्य यह देखना था कि धरातल पर सरकारी योजनाएं और सुविधाएं आम जनता तक कितनी पारदर्शिता के साथ पहुँच रही हैं।”
गंदगी देख बिफरे डीजी हेल्थ, सुपरवाइजर को लगाई फटकार
निरीक्षण के दौरान डॉ. पवन कुमार ने अस्पताल के विभिन्न कोनों, शौचालय और वार्डों की सफाई व्यवस्था को बारीकी से देखा। अस्पताल परिसर के कुछ हिस्सों में गंदगी और अव्यवस्था देख उनका पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर मौजूद सफाई सुपरवाइजर को बुलाकर सख्त लहजे में कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर स्वच्छता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
उन्होंने दो टूक शब्दों में निर्देश दिए, “अगर अस्पताल ही साफ नहीं रहेगा, तो मरीज बीमारी से कैसे उबरेगें? गंदगी फैलाना और सफाई के नाम पर खानापूर्ति करना अब नहीं चलेगा।” उन्होंने संबंधित ठेकेदार और सफाई व्यवस्था देख रहे अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि सुधार नहीं हुआ तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
ओपीडी संचालन और डॉक्टरों की उपस्थिति पर सख्त निर्देश
महानिदेशक ने ओपीडी का निरीक्षण करते हुए पाया कि अधिकांश डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। हालांकि, आई सर्जन डॉ. संजीव के संदर्भ में, जो सीएमएस और एमएस का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं, उन्होंने व्यवस्था को और बेहतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्यों की व्यस्तता के कारण ओपीडी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
डॉ. पवन कुमार ने डॉक्टरों को निम्नलिखित निर्देश दिए:
- समय की पाबंदी: सभी चिकित्सक निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंचें।
- केबिन न रहे खाली: राउंड लेने के तुरंत बाद डॉक्टर अपनी ओपीडी सीट पर बैठें। ओपीडी के समय में केबिन खाली मिलना अनुशासनहीनता मानी जाएगी।
- अन्य विशेषज्ञ: यदि मुख्य सर्जन व्यस्त हैं, तो विभाग के अन्य आई सर्जन नियमित रूप से ओपीडी में बैठकर मरीजों का परामर्श सुनिश्चित करें।
मरीजों से सीधा संवाद: “मुफ्त इलाज ही सरकार का संकल्प”
निरीक्षण के दौरान डीजी हेल्थ ने वार्डों में भर्ती मरीजों और ओपीडी में पर्चा बनवा रहे तीमारदारों से भी बात की। उन्होंने मरीजों से पूछा कि क्या उन्हें दवाइयां अस्पताल से मिल रही हैं या बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। मरीजों ने इलाज और डॉक्टरों के व्यवहार पर संतोष जताया, जो अस्पताल प्रशासन के लिए राहत की बात रही।
इसके बावजूद, डॉ. पवन कुमार ने स्टाफ नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ को सख्त चेतावनी दी कि अस्पताल में आने वाली गरीब जनता से किसी भी प्रकार का अनधिकृत शुल्क या ‘सुविधा शुल्क’ वसूला जाना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सभी जांचें, दवाइयां और सेवाएं पूर्णतः निशुल्क और पारदर्शी तरीके से मिलनी चाहिए।
भविष्य के लिए चेतावनी
निरीक्षण के अंत में डीजी हेल्थ ने स्पष्ट किया कि यह सिलसिला थमने वाला नहीं है। प्रदेश भर के अस्पतालों का इसी तरह आकस्मिक निरीक्षण किया जाता रहेगा ताकि व्यवस्थाओं में निरंतरता बनी रहे। उन्होंने जिला अस्पताल प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और ओपीडी की कतारों को व्यवस्थित करने के निर्देश दिए।
इस औचक निरीक्षण के बाद जिला अस्पताल के गलियारों में सन्नाटा पसरा रहा और कर्मचारी अपनी कमियों को छिपाने की जद्दोजहद में जुटे नजर आए। अब देखना यह होगा कि महानिदेशक की इस फटकार के बाद उन्नाव के स्वास्थ्य केंद्रों की तस्वीर कितनी बदलती है।
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