"DM साहब! हमें शराबियों से बचा लीजिए"
Unnao/Truth India Times Digital Desk
उन्नाव। (न्यूज़ डेस्क) उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो लोकतंत्र और समाज की नैतिकता पर सवालिया निशान खड़ा करती है। जहाँ एक ओर सरकार ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी ओर उन्नाव के वार्ड नंबर 25 की मासूम बच्चियाँ हाथ जोड़कर जिलाधिकारी (DM) से गुहार लगा रही हैं कि उनके रास्ते से शराब का ठेका हटा दिया जाए। नशेड़ियों की गाली-गलौज और सड़कों पर पसरी दहशत के बीच इन बच्चों का ‘बचपन’ और ‘भविष्य’ दोनों दम तोड़ रहे हैं।
कोचिंग और स्कूल का रास्ता… या नशे का अड्डा?
मामला सदर तहसील क्षेत्र के लोधानहार पुलिया के पास का है। यहाँ बीच आबादी में स्थित एक देशी शराब के ठेके ने स्थानीय बच्चों और महिलाओं का जीना मुहाल कर दिया है। बच्चों का आरोप है कि सुबह हो या शाम, यहाँ नशेड़ियों का मेला लगा रहता है। सरेआम सड़कों पर शराब पी जाती है और उसके बाद शुरू होता है गाली-गलौज और अश्लील फब्तियों का दौर।
इस रास्ते से गुजरने वाली मासूम बच्चियों के लिए स्कूल या कोचिंग जाना किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं है। वायरल वीडियो में बच्चियाँ डरी हुई आंखों से अपनी व्यथा सुना रही हैं कि कैसे नशेड़ी उन्हें घूरते हैं और गंदी भाषा का प्रयोग करते हैं।
“शिक्षक भी आने से डरते हैं, हमारी पढ़ाई बर्बाद हो रही”
यह मामला केवल डर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने बच्चों की शिक्षा की जड़ें हिला दी हैं। स्थानीय बच्चियों ने बताया कि इलाके के कोचिंग शिक्षक भी अब नियमित रूप से पढ़ाने आने में कतराते हैं। नशेड़ियों के जमावड़े के कारण बाहरी शिक्षक इस क्षेत्र में आने से डरते हैं, जिससे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का भविष्य अंधकार में है।
एक छात्रा ने रुंधे हुए गले से कहा, “हमें स्कूल जाने में डर लगता है। मम्मी-पापा हमें अकेले नहीं भेजते और वो खुद हर समय हमारे साथ नहीं रह सकते। क्या हमारी पढ़ाई से ज्यादा जरूरी यह शराब का ठेका है?”
सोशल मीडिया पर ‘दहशत का वीडियो’ वायरल
मासूम बच्चियों द्वारा जिलाधिकारी से की गई यह मार्मिक अपील अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई है। वीडियो में बच्चियों की मासूमियत और उनके चेहरे पर साफ झलक रहा खौफ लोगों के दिलों को झकझोर रहा है। लोग ट्विटर (X) और फेसबुक पर उन्नाव प्रशासन और यूपी सरकार को टैग कर पूछ रहे हैं कि क्या भविष्य के इन कर्णधारों को शराबियों के रहमोकरम पर छोड़ दिया जाएगा?
नियमों की धज्जियाँ उड़ाता ‘आबादी के बीच’ का ठेका
आबकारी विभाग के नियमों के अनुसार, शराब की दुकान शिक्षण संस्थानों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों से एक निश्चित दूरी पर होनी चाहिए। लेकिन लोधानहार पुलिया का यह ठेका इन तमाम नियमों को ठेंगा दिखा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कई बार लिखित शिकायत कर चुके हैं, लेकिन शराब माफियाओं के रसूख के आगे प्रशासन की फाइलें दबी रह जाती हैं।
वार्डवासियों का आरोप है कि ठेके के कारण न केवल बच्चे, बल्कि राहगीर और महिलाएं भी असुरक्षित महसूस करती हैं। शाम ढलते ही यहाँ असामाजिक तत्वों का डेरा जमा हो जाता है, जिससे कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।
प्रशासन के लिए परीक्षा की घड़ी
बच्चों की इस साहसी अपील के बाद अब गेंद जिलाधिकारी के पाले में है। क्या प्रशासन उन मासूमों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा जो देश का भविष्य हैं, या फिर राजस्व के लालच में इस ‘नशे की दुकान’ को वहीं रहने देगा?
स्थानीय लोगों की मांग:
- शराब के ठेके को तत्काल घनी आबादी और स्कूल के रास्ते से हटाया जाए।
- इलाके में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए ताकि नशेड़ियों के जमावड़े पर अंकुश लग सके।
- बच्चों की सुरक्षा और निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित की जाए।
खबर का विश्लेषण (Point of View):
यह खबर केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि उस कड़वी हकीकत का आइना है जहाँ बच्चों को अपनी शिक्षा के अधिकार के लिए ‘नशे के सौदागरों’ से लड़ना पड़ रहा है। अगर इन बच्चियों की पुकार अनसुनी रही, तो यह समाज के रूप में हमारी सामूहिक हार होगी।
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