दो दिवसीय विराट दंगल का भव्य समापन
कमसिन (बांदा) | प्रलभ शरण चौधरी Truth India Times
बांदा/कमसिन। बुंदेलखंड की माटी में कुश्ती और दंगल की परंपरा सदियों पुरानी है। इसी परंपरा को जीवंत करते हुए कमसिन की ग्राम पंचायत मवई बुजुर्ग स्थित गोसाईं तालाब के पास आयोजित दो दिवसीय ‘विराट दंगल और मेले’ का भव्य समापन हुआ। इस दंगल में न केवल राष्ट्रीय स्तर के पुरुष पहलवानों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया, बल्कि महिला पहलवानों ने भी अखाड़े में उतरकर पुरुष प्रधान समाज की धारणाओं को चुनौती दी। दो दिनों तक चले इस खेल उत्सव ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ दूर-दराज से आए खेल प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
राष्ट्रीय पहलवानों ने बिखेरा जलवा
दंगल में उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों से आए नामचीन पहलवानों ने हिस्सा लिया। अखाड़े में उतरते ही हुकुम सिंह कुसमरा (हमीरपुर) और वीरेंद्र टेढ़ा के बीच हुई कुश्ती ने दर्शकों की धड़कनें बढ़ा दीं। वहीं सुरेश मथुरा, शाहबाज अलीगढ़, शिवा हाथरस और अंकुर आगरा की फुर्ती और तकनीक देख लोग दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर हो गए। इसके अलावा राधेश्याम मिरगहनी, सूरज हरियाणा, मोनू अलीगढ़, फहीम हाथरस, शिव विलास पलरा, राजेश मर्का और अभिलाष पलरा जैसे पहलवानों ने भी अपने दांव-पेंचों से खूब वाहवाही बटोरी।
महिला कुश्ती बनी मुख्य आकर्षण, लामा की बेटी ने मारी बाजी
इस वर्ष के दंगल की सबसे खास बात ‘महिला कुश्ती’ रही। अखाड़े में जब महिला पहलवान उतरीं, तो पूरे पांडाल ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। कड़े मुकाबले में लामा (बांदा) की महिला पहलवान ने अपनी प्रतिद्वंद्वी को चित करते हुए जीत हासिल की। उनकी इस जीत ने यह संदेश दिया कि बुंदेलखंड की बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
रोमांचक मोड़: सुरक्षित रही 51,000 की इनामी राशि और गदा
दंगल का मुख्य आकर्षण ₹51,000 का नकद पुरस्कार और एक भव्य ‘गदा’ थी। नियमानुसार इसे प्राप्त करने के लिए किसी एक पहलवान का अंतिम विजेता (टाइटल होल्डर) होना अनिवार्य था। आयोजक रामकिशुन प्रजापति उर्फ लल्लू पहलवान ने बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर के सभी प्रमुख पहलवानों के बीच हुई कुश्तियां बराबरी पर समाप्त हुईं। कड़ा मुकाबला होने के कारण कोई भी पहलवान निर्णायक रूप से विजेता नहीं बन सका। आयोजन समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यह इनामी राशि और प्रतिष्ठित गदा अब अगले वर्ष के दंगल में विजेता बनने वाले पहलवान को प्रदान की जाएगी।
दिग्गजों की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बल्देव प्रसाद वर्मा और भाजपा नेता व बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन के संस्थापक प्रवीण सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने पहलवानों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच मिलता है। बसपा जिलाध्यक्ष रामसेवक, सुखलाल बौद्ध और बीके सिंह बड़े भैया ने भी पहलवानों को आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर सिसोलर प्रधान विजय शंकर प्रजापति एडवोकेट, प्रधान बशगोपाल यादव, रामलाल प्रजापति सहित पुनीत प्रजापति, संतोष सविता और अंकुर जैसे युवा सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय रहे।
मेले में उमड़ी भीड़, खरीदारी का चला दौर
दंगल के साथ-साथ गोसाईं तालाब के मैदान में भव्य मेले का भी आयोजन हुआ। मेले में खिलौनों, घरेलू सामान, मिठाई और चाट-पकौड़ी की सैकड़ों दुकानें सजी थीं। मवई बुजुर्ग के साथ-साथ आसपास के दर्जनों गांवों से आए महिलाओं और बच्चों ने मेले का जमकर लुत्फ उठाया। ग्रामीण संस्कृति के इस मिलन स्थल पर देर शाम तक रौनक बनी रही।
आयोजक का संदेश
आयोजक लल्लू पहलवान ने सभी आगंतुकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य बुंदेलखंड की इस पारंपरिक खेल कला को बचाए रखना है। भले ही इस साल गदा किसी के हाथ न लगी हो, लेकिन पहलवानों ने जो खेल भावना दिखाई है, वही असली जीत है।”
प्रलभ शरण चौधरी की विशेष रिपोर्ट: कमसिन का यह दंगल इस बात का प्रमाण है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में कुश्ती को लेकर भारी उत्साह है। ऐसे आयोजनों से न केवल स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है, बल्कि भाईचारे और सौहार्द की भावना भी मजबूत होती है।
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