37 हजार अनफिट गाड़ियां उगल रही धुआं
कन्नौज | प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
इत्र की खुशबू के लिए मशहूर कन्नौज की आबोहवा इन दिनों जहरीली होती जा रही है। शहर की सड़कों पर दौड़ रहे ‘बीमार’ वाहन आम जनमानस के फेफड़ों में धुआं भर रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो जिले में करीब 37,593 ऐसे वाहन सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन या तो काफी समय पहले खत्म हो चुका है या फिर वे तकनीकी रूप से अनफिट हैं। परिवहन विभाग की तमाम सख्ती के दावों के बावजूद ये कंडम वाहन न केवल नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि लोगों की सेहत के लिए भी बड़ा खतरा बन गए हैं।
अस्पताल की ओपीडी फुल: हर दूसरा व्यक्ति सांस का मरीज
बढ़ते वायु प्रदूषण का सीधा और घातक असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखने लगा है। जिला अस्पताल की स्थिति चिंताजनक है, जहाँ रोजाना 90 से 100 मरीज केवल खांसी और अस्थमा (दमा) की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस शक्ति बसु ने बताया कि ओपीडी में आने वाला हर दूसरा मरीज सांस लेने में तकलीफ की बात कह रहा है। पुराने और अनफिट वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं (पार्टिकुलेट मैटर) फेफड़ों में गहराई तक जाकर गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहा है। इसके अलावा हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से लोगों की आंखों में जलन और पानी आने की शिकायतें आम हो गई हैं।
प्रशासन की ढिलाई: नियमों को ठेंगा दिखा रहे डग्गामार वाहन
नियमों के मुताबिक, 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों का सड़कों पर चलना पूरी तरह प्रतिबंधित है। लेकिन कन्नौज की सड़कों पर नजारा कुछ और ही है। यहां धुआं छोड़ती डग्गामार बसें, कबाड़ हो चुके पुराने ट्रैक्टर और कंडम ट्रक बेखौफ दौड़ रहे हैं। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के पीछे इन ‘बीमार’ वाहनों को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन की ढिलाई के कारण ये वाहन सड़कों से हट नहीं रहे हैं, जिसका खामियाजा बच्चों और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है।
वायु गुणवत्ता (AQI) पर खतरा
अगर समय रहते इन अनफिट वाहनों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो शहर की वायु गुणवत्ता आने वाले दिनों में और भी बदतर हो सकती है। सड़कों पर दौड़ते ये ‘धुआं बम’ न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि शहर के पारिस्थितिकी तंत्र को भी बिगाड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह: ऐसे करें बचाव
प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर को देखते हुए डॉक्टरों ने नागरिकों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
- मास्क का प्रयोग: घर से बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें।
- आंखों का ख्याल: आंखों में जलन होने पर उन्हें रगड़ने के बजाय ठंडे पानी से बार-बार धोएं।
- समय का चुनाव: सुबह और शाम के समय, जब प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है, उस दौरान सैर या व्यायाम करने से बचें।
- बच्चों-बुजुर्गों का ध्यान: सांस के पुराने मरीजों को प्रदूषण वाली जगहों से दूर रखें।
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