वंदे भारत में चढ़ते समय फिसला यात्री, RPF जवान ने देवदूत बनकर बचाई जान
कानपुर | प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर सोमवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। नई दिल्ली से वाराणसी जा रही देश की प्रीमियम ट्रेन ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ में चढ़ने के प्रयास में एक यात्री प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच के गैप में गिरने ही वाला था कि तभी वहां तैनात RPF (रेलवे सुरक्षा बल) के जवान ने अपनी जान पर खेलकर उसे सुरक्षित खींच लिया। इस पूरी घटना ने स्टेशन पर मौजूद यात्रियों के रोंगटे खड़े कर दिए।
सामान खरीदने के चक्कर में फंसी जान
जानकारी के मुताबिक, पीड़ित यात्री नई दिल्ली से वाराणसी की यात्रा कर रहा था। जैसे ही ट्रेन कानपुर सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर रुकी, यात्री कुछ जरूरी सामान या पानी लेने के लिए नीचे उतरा। वह अपनी खरीददारी में थोड़ा व्यस्त हो गया, इसी बीच ट्रेन के चलने का सिग्नल हो गया। जब तक वह संभलता, वंदे भारत की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी।
ऑटोमैटिक दरवाजों ने बढ़ाई मुश्किल
वंदे भारत एक्सप्रेस की सबसे बड़ी विशेषता इसके ‘ऑटोमैटिक प्लग डोर्स’ हैं। सुरक्षा के लिहाज से ये दरवाजे ट्रेन चलने से पहले अपने आप बंद हो जाते हैं। यात्री जब दौड़कर कोच के पास पहुँचा, तो दरवाजे लॉक हो चुके थे। उसने चलती ट्रेन के साथ दौड़ते हुए दरवाजा खोलने या उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन पैर फिसलने के कारण वह अनियंत्रित होकर प्लेटफॉर्म पर गिर पड़ा।
यात्री का शरीर आधा प्लेटफॉर्म और आधा ट्रेन के पायदान के बीच लटक गया था। अगर वह कुछ सेकंड और वहां फंसा रहता, तो वह ट्रेन के नीचे जा सकता था, जो सीधे तौर पर जानलेवा साबित होता।
RPF जवान की फुर्ती ने बचाई जान
प्लेटफॉर्म पर मुस्तैद RPF के जवान ने जैसे ही यात्री को गिरते देखा, वह बिना एक पल गंवाए उसकी ओर लपका। जवान ने मजबूती से यात्री के हाथ और कपड़ों को पकड़कर उसे बाहर की ओर खींच लिया। यह सब इतना अचानक हुआ कि वहां खड़े अन्य लोग जब तक चिल्लाते, यात्री सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर वापस आ चुका था।
वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने RPF जवान की बहादुरी और सूझबूझ की जमकर तारीफ की। यात्री को मामूली खरोंचें आई हैं, लेकिन वह पूरी तरह सुरक्षित है।
रेलवे की अपील: “चलती ट्रेन पर न चढ़ें”
इस घटना के बाद कानपुर सेंट्रल स्टेशन के अधिकारियों ने एक बार फिर यात्रियों के लिए कड़ी चेतावनी जारी की है। रेलवे प्रशासन ने कहा है कि वंदे भारत जैसी अत्याधुनिक ट्रेनों में ऑटोमैटिक डोर सिस्टम होता है। एक बार दरवाजे बंद होने के बाद उन्हें बाहर से नहीं खोला जा सकता।
रेलवे ने यात्रियों को ये सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
- दो मिनट का ठहराव: कई स्टेशनों पर वंदे भारत का ठहराव मात्र 2 मिनट का होता है, ऐसे में प्लेटफॉर्म पर उतरना जोखिम भरा हो सकता है।
- समय का ध्यान: ट्रेन के हॉर्न और दरवाजों के सेंसर की आवाज पर तुरंत ध्यान दें।
- जान जोखिम में न डालें: अगर ट्रेन छूट रही है, तो उसे पकड़ने के लिए दौड़ें नहीं। अगला स्टेशन या वैकल्पिक व्यवस्था देखना बेहतर है।
यात्री का दर्द और राहत
हादसे का शिकार होने से बचे यात्री ने बताया कि वह घबराहट में था और उसे अंदाजा नहीं था कि दरवाजे इतनी जल्दी बंद हो जाएंगे। उसने भावुक होते हुए उस RPF जवान का धन्यवाद किया जिसने उसे नई जिंदगी दी। बाद में रेलवे अधिकारियों ने उसे प्राथमिक उपचार दिया और उचित सहायता प्रदान की।
निष्कर्ष: तकनीक अच्छी, लेकिन जागरूकता जरूरी
वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की प्रगति का प्रतीक है, लेकिन इसके साथ सफर करते समय यात्रियों को इसकी तकनीक को भी समझना होगा। स्टेशन पर सामान खरीदने की छोटी सी भूल जान पर भारी पड़ सकती है। कानपुर की इस घटना ने एक बार फिर रेल सुरक्षा की अहमियत को रेखांकित किया है।
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