'क्राइम कंट्रोल' में फेल रहे 4 थानेदार
कानपुर | प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने शहर की बिगड़ती कानून व्यवस्था और थानों की सुस्त कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया है। बुधवार को हुई हाई-लेवल क्राइम मीटिंग के दौरान कमिश्नर ने न केवल अपराध के आंकड़ों की समीक्षा की, बल्कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को दो टूक लहजे में चेतावनी भी दी। बैठक में शहर के 4 थानों को अपराध नियंत्रण में पूरी तरह ‘फेल’ पाया गया, जबकि साउथ जोन की परफॉर्मेंस सबसे बेहतर रही।
“पुलिसवाला हो या आम नागरिक, कानून सबके लिए बराबर”
क्राइम मीटिंग के दौरान पुलिस कमिश्नर का तेवर काफी सख्त नजर आया। उन्होंने हालिया सचेंडी और बिल्हौर की घटनाओं का हवाला देते हुए पुलिस अधिकारियों को नसीहत दी कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
कमिश्नर रघुवीर लाल ने कहा, “कानून सबके लिए एक समान है। अगर किसी पुलिसकर्मी ने अपराधी को संरक्षण दिया या दोषी को बचाने की कोशिश की, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। वर्दी का रौब अपराधी को बचाने के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेवा के लिए है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार या ढिलाई बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
ये 4 थाने रडार पर, साउथ जोन ने मारी बाजी
समीक्षा बैठक के दौरान अपराध की दर, पेंडिंग विवेचनाओं और अपराधियों पर कार्रवाई के आधार पर थानों की रैंकिंग तय की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के 4 प्रमुख थाने क्राइम कंट्रोल करने में सबसे फिसड्डी साबित हुए हैं। इन थानों के प्रभारियों को अल्टीमेटम दिया गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर सुधार नहीं दिखा, तो उन्हें लाइन हाजिर कर दिया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर, साउथ जोन की पुलिसिंग को सबसे प्रभावी माना गया है। साउथ जोन में न केवल गंभीर अपराधों के खुलासे तेजी से हुए, बल्कि गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराधियों की कमर तोड़ने में भी सफलता मिली है। कमिश्नर ने साउथ जोन के अधिकारियों की पीठ थपथपाई और अन्य जोन को उनसे सीख लेने की सलाह दी।
बिल्हौर और सचेंडी जैसी घटनाओं से लें सबक
पुलिस कमिश्नर ने जिले के सभी एसीपी और थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्रों में ‘बीट पुलिसिंग’ को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि सचेंडी और बिल्हौर में जो घटनाएं हुईं, वे पुलिस की इंटेलिजेंस फेलियर का नतीजा थीं। अगर लोकल इंटेलिजेंस सक्रिय होती, तो विवादों को हिंसा में बदलने से रोका जा सकता था।
कमिश्नर के मुख्य निर्देश:
- रात्रि गश्त: रात 12 बजे से सुबह 4 बजे के बीच गश्त को और सघन किया जाए।
- हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी: हर थाने के टॉप-10 अपराधियों की गतिविधियों पर चौबीस घंटे नजर रखी जाए।
- जनता से संवाद: थानों में आने वाले फरियादियों के साथ मर्यादित व्यवहार हो और उनकी समस्याओं का त्वरित निस्तारण किया जाए।
लापरवाही पर गिरेगी गाज
बैठक के अंत में कमिश्नर ने सभी अधिकारियों को ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का पालन करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि आंकड़े बाजी की जगह जमीन पर बदलाव दिखना चाहिए। अपराधियों में पुलिस का खौफ और आम जनता में सुरक्षा का भाव पैदा करना ही हमारी प्राथमिकता है। इस बैठक के बाद अब शहर के उन 4 थानों में हड़कंप मचा हुआ है जो रेड जोन में शामिल हैं।
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