घर में घुसकर पीटने वाले दबंग दे रहे थे धमकी
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाली एक बेहद दर्दनाक और आक्रोशित कर देने वाली घटना सामने आई है। कल्याणपुर थाना क्षेत्र में न्याय की उम्मीद खो चुके एक युवक ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। यह आत्मघाती कदम उसने तब उठाया जब पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें खुला छोड़ दिया और आरोपी लगातार पीड़ित परिवार को मुकदमा वापस लेने की धमकी दे रहे थे। इस घटना ने कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा विवाद? बुलेट की आवाज से शुरू हुई थी रंजिश
पूरे मामले की जड़ बीते 11 जनवरी की एक मामूली घटना में छिपी है। कल्याणपुर के खुर्द निवासी अभिषेक दीक्षित के मुताबिक, उनके पड़ोस में रहने वाले विशाल कटियार की बुलेट से निकलने वाली तेज आवाज (पटाखा) को लेकर उनके बड़े भाई अनुराग दीक्षित से विवाद हुआ था। यह विवाद इतना बढ़ा कि विशाल कटियार, शुभम कटियार, संजू कटियार और उनके करीब 10-12 साथियों ने अभिषेक के घर पर धावा बोल दिया।
दबंगों ने घर में घुसकर अभिषेक की मां गीता देवी और भाई अनुराग की बेरहमी से पिटाई की। इस हमले में मां को गंभीर अंदरूनी चोटें आईं और अनुराग का सिर फट गया था। घटना के बाद पुलिस ने अभिषेक की तहरीर पर नामजद और अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू हुआ।
मुख्यमंत्री की चौखट तक पहुंचा मामला, फिर भी नहीं चेती पुलिस
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी कल्याणपुर पुलिस ने आरोपियों को हाथ तक नहीं लगाया। कार्रवाई न होने से परेशान होकर अभिषेक दीक्षित बीते सप्ताह लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने पहुंचा था। मुख्यमंत्री के कड़े रुख और पुलिस आयुक्त के निर्देश के बाद तत्कालीन चौकी प्रभारी विनय तिवारी को लापरवाही के आरोप में लाइन हाजिर कर दिया गया।
लगातार हो रही प्रशासनिक फेरबदल के बावजूद धरातल पर स्थिति नहीं बदली। नए चौकी प्रभारी और थाने की पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के बजाय फाइल दबाए बैठी रही। इधर, जेल जाने के बजाय खुलेआम घूम रहे आरोपी अनुराग और उसके परिवार पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाने लगे।
आरोपियों की धमकी और पुलिस की चुप्पी: अनुराग ने लगा ली आग
पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपी लगातार धमकी दे रहे थे कि “पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी, केस वापस ले लो वरना अंजाम बुरा होगा।” शनिवार को इसी प्रताड़ना और पुलिस की निष्क्रियता से टूटकर अनुराग दीक्षित ने आत्मघाती कदम उठा लिया। उसने खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली।
घर के अंदर धू-धू कर जलते युवक को देख चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने तुरंत 112 नंबर पर सूचना दी और आग बुझाकर अनुराग को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल उसे उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।
एसीपी का बयान: “जांच की जा रही है”
घटना की सूचना मिलते ही कल्याणपुर एसीपी आशुतोष कुमार और थाने की फोर्स मौके पर पहुंची। मामले पर सफाई देते हुए एसीपी आशुतोष कुमार ने बताया, “एक युवक द्वारा पेट्रोल डालकर आग लगाने की जानकारी मिली है। मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। यदि इस प्रकरण में किसी भी पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है या लापरवाही उजागर होती है, तो उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
क्षेत्र में तनाव और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
प्रलभ शरण चौधरी की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। जनता का सवाल है कि जब मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में आ चुका था और एक चौकी प्रभारी पर गाज गिर चुकी थी, तो फिर स्थानीय पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया? क्या पुलिस आरोपियों को संरक्षण दे रही थी?
कानपुर में अपराध और अपराधियों पर लगाम कसने के दावों के बीच, एक पीड़ित का खुद को आग लगाना यह दर्शाता है कि थानों के चक्कर काटकर आम आदमी किस कदर टूट चुका है। फिलहाल पुलिस गांव में तैनात है और मामले को शांत कराने की कोशिश की जा रही है।
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