ट्यूशन टीचर समेत 3 को उम्रकैद
कानपुर | प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उत्तर प्रदेश के कानपुर को झकझोर देने वाले चर्चित कुशाग्र हत्याकांड में आज न्याय की घड़ी आई। अदालत ने कारोबारी के 16 वर्षीय बेटे कुशाग्र की अपहरण के बाद हत्या करने के मामले में मुख्य आरोपी ट्यूशन टीचर रचिता, उसके बॉयफ्रेंड प्रभात और सहयोगी आर्यन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने मामले की क्रूरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि यह सजा साधारण नहीं होगी; तीनों दोषियों को अब ‘मरते दम तक’ जेल की सलाखों के पीछे रहना होगा।
हालांकि, इस फैसले के बाद अदालत परिसर में मौजूद कुशाग्र की मां सुनीता फफक कर रो पड़ीं। उन्होंने रुंधे गले से कहा, “मेरे बच्चे का क्या कसूर था? जिस तरह इन्होंने मेरे बेटे का गला दबाया, इन्हें भी फांसी होनी चाहिए थी।”
विश्वास की हत्या: ट्यूशन टीचर ही निकली मास्टरमाइंड
यह मामला केवल एक अपहरण या हत्या का नहीं, बल्कि ‘विश्वास के कत्ल’ की दास्तां है। कुशाग्र शहर के एक प्रतिष्ठित कपड़ा कारोबारी का बेटा था। मुख्य आरोपी रचिता उसे घर पर ट्यूशन पढ़ाने आती थी। कुशाग्र उसे ‘दीदी’ कहकर सम्मान देता था और परिवार भी उस पर अटूट भरोसा करता था। लेकिन रचिता ने अपने बॉयफ्रेंड प्रभात के साथ मिलकर कुशाग्र को रास्ते से हटाने और फिरौती वसूलने की खौफनाक साजिश रची।
बीते वर्ष, आरोपियों ने कुशाग्र को बहला-फुसलाकर अगवा किया और फिर उसके पिता से 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी। पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने फिरौती की रकम मिलने से पहले ही कुशाग्र की बेरहमी से गला दबाकर हत्या कर दी और शव को ठिकाने लगा दिया था।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “समाज में ऐसा अपराध अक्षम्य”
कानपुर की कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तीनों को दोषी माना। अभियोजन पक्ष ने दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी, वहीं बचाव पक्ष ने उम्र की दुहाई दी। अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि एक शिक्षिका द्वारा अपने ही छात्र की हत्या करना सामाजिक मूल्यों पर प्रहार है।
जज ने आदेश दिया कि तीनों दोषियों को प्राकृतिक मृत्यु (Natural Death) तक जेल में रखा जाए। यानी अब रचिता, प्रभात और आर्यन को जेल से रिहा होने का कोई कानूनी विकल्प नहीं मिलेगा। साथ ही तीनों पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है।
माँ की चीख: “मुझे इंसाफ नहीं मिला, उन्हें फांसी चाहिए”
फैसला आने के बाद कुशाग्र की मां सुनीता की आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “इन लोगों ने मेरे हंसते-खेलते घर को उजाड़ दिया। 30 लाख रुपये के लिए मेरे मासूम बच्चे की जान ले ली। कोर्ट ने उम्रकैद दी है, लेकिन मेरा मानना है कि ऐसे दरिंदों को जीने का कोई हक नहीं है। जब तक उन्हें फांसी नहीं होती, मेरी रूह को शांति नहीं मिलेगी।”
कुशाग्र के पिता ने भी दुख जताते हुए कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) में अपील करेंगे ताकि दोषियों को मृत्युदंड मिल सके।
पुलिस की मुस्तैदी और सीसीटीवी का रोल
इस केस को सुलझाने में कानपुर पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों का सहारा लिया था। सीसीटीवी फुटेज में कुशाग्र को आखिरी बार प्रभात के साथ जाते देखा गया था। पुलिस की कड़ी पूछताछ में जब रचिता टूटी, तब इस रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश का खुलासा हुआ। पुलिस ने महज कुछ ही दिनों में चार्जशीट दाखिल कर दी थी, जिसके परिणामस्वरूप आज यह फैसला संभव हो पाया।
निष्कर्ष: शिक्षकों पर भरोसे का संकट
कुशाग्र हत्याकांड ने कानपुर ही नहीं बल्कि पूरे देश के अभिभावकों को डरा दिया है। जिस गुरु को माता-पिता के बाद सबसे ऊंचा दर्जा दिया जाता है, जब वही कातिल बन जाए, तो समाज किस पर भरोसा करे? उम्रकैद का यह फैसला उन अपराधियों के लिए एक कड़ा सबक है जो चंद रुपयों की खातिर मासूमों की बलि चढ़ा देते हैं।
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