दोस्त ही निकला 'आस्तीन का सांप', सेल्समैन से 3.90 लाख की लूट का खुलासा
कानपुर | प्रलभ शरण चौधरी Truth India Times
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर कमिश्नरेट अंतर्गत स्वरूप नगर इलाके में शराब ठेके के सेल्समैन के साथ हुई लाखों की लूट का पुलिस ने शुक्रवार को सनसनीखेज खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में ऑटो सवार 6 शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी लूट की पटकथा किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि पीड़ित के ही एक करीबी दोस्त ने लिखी थी। आरोपी को शराब में मिलावट करने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था, जिसका बदला लेने और कर्ज चुकाने के लिए उसने अपने साथियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।
क्या थी घटना?
बीते दिनों स्वरूप नगर थाना क्षेत्र में शराब ठेके का सेल्समैन दिनभर की बिक्री के करीब 3.90 लाख रुपये लेकर जा रहा था, तभी ऑटो सवार बदमाशों ने उसे घेर लिया और रुपयों से भरा बैग छीनकर फरार हो गए थे। शहर के पॉश इलाके में हुई इस वारदात ने पुलिस की चौकसी पर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद डीसीपी (सेंट्रल) के निर्देश पर क्राइम ब्रांच और स्वरूप नगर पुलिस की कई टीमें गठित की गई थीं।
मुखबिर और सर्विलांस ने खोला राज
पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और संदिग्ध ऑटो की तलाश शुरू की। शुक्रवार शाम को पुलिस को सटीक सूचना मिली कि लूट में शामिल गिरोह ककवन की ओर भागने की फिराक में है। पुलिस ने घेराबंदी कर 6 आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में मुख्य साजिशकर्ता शिवम और उसका साथी समीर (निवासी ककवन) शामिल हैं। इनके अलावा चार अन्य बदमाशों को भी पुलिस ने जेल भेजने की तैयारी कर ली है।
बदले की आग और कर्ज का बोझ बनी वजह
पूछताछ में मास्टरमाइंड शिवम ने जो खुलासा किया, उसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। शिवम ने बताया कि वह पहले उसी शराब ठेके पर काम करता था जहाँ पीड़ित सेल्समैन कार्यरत है। कुछ समय पहले शिवम को शराब में पानी की मिलावट करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था, जिसके बाद मालिक ने उसे बेइज्जत कर नौकरी से निकाल दिया था।
बेरोजगार होने के बाद शिवम पर कर्ज का बोझ बढ़ गया था। उसने अपमान का बदला लेने और पैसों की किल्लत दूर करने के लिए अपने दोस्त समीर के साथ मिलकर सेल्समैन को लूटने की योजना बनाई। उसे बखूबी पता था कि सेल्समैन किस समय और किस रास्ते से लाखों का कैश लेकर निकलता है।
ऑटो को बनाया ‘क्राइम व्हीकल’
आरोपियों ने वारदात के लिए एक ऑटो का इस्तेमाल किया ताकि भीड़भाड़ वाले इलाके में किसी को शक न हो। योजना के मुताबिक, शिवम ने दूर से सेल्समैन की रेकी की और जैसे ही वह सुनसान मोड़ पर पहुँचा, ऑटो सवार बदमाशों ने उसे दबोच लिया। वारदात के बाद सभी ने रकम आपस में बांट ली थी। पुलिस ने इनके पास से लूटी गई रकम का बड़ा हिस्सा, अवैध तमंचे और वारदात में इस्तेमाल ऑटो बरामद कर लिया है।
पुलिस का पक्ष
डीसीपी सेंट्रल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह एक सोची-समीझी साजिश थी। मास्टरमाइंड को ठेके की आंतरिक व्यवस्था की पूरी जानकारी थी। पुलिस टीम की तत्परता से महज कुछ ही दिनों में गिरोह को दबोच लिया गया। पकड़े गए सभी आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है। टीम को सफलता के लिए उचित पुरस्कार देने की भी घोषणा की गई है।
प्रलभ शरण चौधरी की विशेष रिपोर्ट: “भरोसे का कत्ल”
कानपुर की यह घटना हमें चेतावनी देती है कि अपराधी अक्सर हमारे आसपास के ही लोग होते हैं। ‘दोस्त’ बनकर जानकारी जुटाना और फिर उसे अपराध में तब्दील कर देना आजकल के गिरोहों का नया तरीका है। व्यापारियों और कैश ले जाने वाले कर्मचारियों को अपनी गतिविधियों को गोपनीय रखने की सख्त जरूरत है।
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