कानपुर में मानवता शर्मसार: ब्लॉक कैंपस में नवजात को नोंचता रहा कुत्ता, 'नाल' भी नहीं हुई थी अलग
प्रलभ शरण चौधरी/कानपुर/Truth India Times
कानपुर: औद्योगिक नगरी कानपुर से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने न केवल समाज की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार कर दिया है। चौबेपुर ब्लॉक कैंपस में सोमवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक आवारा कुत्ता एक नवजात शिशु के शव को अपने मुंह में दबाए घूमता नजर आया। दृश्य इतना भयावह था कि देखने वालों की रूह कांप गई। जिस मासूम ने अभी दुनिया में ठीक से आंखें भी नहीं खोली थीं, उसे पैदा होते ही अपनों ने ही मौत के मुंह में धकेल दिया।
कुत्ते के मुंह में था मासूम: पहचान करना भी मुश्किल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सोमवार शाम चौबेपुर ब्लॉक परिसर में एक कुत्ता किसी वस्तु को बुरी तरह नोंच रहा था। पास जाकर देखने पर लोगों के होश उड़ गए; वह एक नवजात शिशु का शरीर था। बच्चे के शरीर से ‘नाल’ (Umbilical Cord) तक अलग नहीं हुई थी, जिससे स्पष्ट है कि जन्म के चंद घंटों के भीतर ही उसे फेंक दिया गया था। कुत्ते ने मासूम के शव को इस कदर क्षत-विक्षत कर दिया था कि यह पहचानना भी मुश्किल हो गया कि वह बालक था या बालिका। स्थानीय लोगों ने तुरंत शोर मचाकर कुत्ते को भगाया और चौबेपुर थाना पुलिस को सूचित किया।
लोकलाज या अपराध? पुलिस खंगाल रही CCTV
सूचना मिलते ही चौबेपुर थाना इंचार्ज आशिष चौबे भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि बच्चा किसका था और उसे वहां किसने फेंका।
- हत्या या परित्याग: पुलिस इस बिंदु पर जांच कर रही है कि क्या बच्चा मृत पैदा हुआ था या उसे जिंदा ही मरने के लिए फेंक दिया गया था। यदि उसे जिंदा फेंका गया, तो यह हत्या की श्रेणी में आएगा।
- अवैध संबंध या मजबूरी: आशंका जताई जा रही है कि लोकलाज के डर से या ‘अनचाही संतान’ होने के कारण किसी ने इस अमानवीय कृत्य को अंजाम दिया है।
- CCTV पर नजर: थाना प्रभारी ने बताया कि ब्लॉक कैंपस और आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही, हाल ही में प्रसव कराने वाली महिलाओं का डेटा भी स्थानीय अस्पतालों और आशा बहुओं से मांगा जा रहा है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: ‘इंसानियत मर चुकी है’
इस घटना के बाद इलाके के लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन सुरक्षित प्रसव और बच्चों के संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं, लेकिन फिर भी ऐसी घटनाएं समाज के माथे पर कलंक हैं। वहां मौजूद एक स्थानीय नागरिक ने भावुक होकर कहा, “अगर पालना नहीं था, तो कहीं सुरक्षित जगह छोड़ देते, लेकिन कुत्तों के आगे फेंक देना दरिंदगी की पराकाष्ठा है। क्या हम इतने संवेदनहीन हो चुके हैं कि एक नन्हीं जान हमें बोझ लगने लगी?”
बड़ा सवाल: जब ‘आश्रय पालना’ मौजूद है, तो फेंकना क्यों?
कानपुर जैसी आधुनिक सुविधाओं वाले जिले में ऐसी घटना होना और भी दुखद है। उत्तर प्रदेश सरकार और मां भगवती विकास संस्थान के सहयोग से कानपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज (हैलट) समेत कई जिलों में ‘आश्रय पालना स्थल’ संचालित किए जा रहे हैं।
क्या है ‘आश्रय पालना’ और कैसे करता है काम?
संस्था के संस्थापक और योग गुरु देवेन्द्र अग्रवाल के प्रयासों से राजस्थान के बाद यूपी के कानपुर, लखनऊ, मेरठ और गोरखपुर जैसे शहरों में यह अनूठी पहल शुरू की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य मासूमों की जान बचाना और उन्हें सुरक्षित भविष्य देना है।
- गोपनीयता की गारंटी: अगर कोई परिजन बच्चे को पालने में सक्षम नहीं है या किसी अन्य कारण से उसे छोड़ना चाहता है, तो वह ‘आश्रय पालना’ में बच्चे को चुपचाप रखकर जा सकता है। वहां कोई सीसीटीवी कैमरा या पहचान पूछने वाला व्यक्ति नहीं होता। आपकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है।
- हाईटेक सेंसर सिस्टम: पालने में बच्चे को रखने के ठीक 2 मिनट बाद लेबर रूम या डॉक्टर के पास एक सेंसर अलार्म बजता है। इससे मेडिकल टीम को तुरंत पता चल जाता है कि कोई मासूम आया है।
- तत्काल मेडिकल केयर: अलार्म बजते ही डॉक्टरों की टीम बच्चे को अपनी देखरेख में ले लेती है। उसकी जांच की जाती है और फिर उसे राजकीय शिशु गृह भेज दिया जाता है, जहां से कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें गोद (Adoption) दिया जा सकता है।
परित्याग नहीं, समाधान ढूंढें
देवेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि राजस्थान में इस संस्था ने अब तक 100 से ज्यादा बच्चों को सुरक्षित रूप से स्वीकार किया है और 86 से ज्यादा मासूमों की जान बचाई है। कानपुर की जनता को भी यह समझना होगा कि मासूमों को झाड़ियों, नालों या सुनसान जगहों पर फेंकना दंडनीय अपराध है। यदि मजबूरी है, तो ‘आश्रय पालना’ जैसा सुरक्षित विकल्प अपनाएं।
कानूनी पहलू: होगी सख्त कार्रवाई
पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। भारतीय न्याय संहिता के तहत, नवजात को असुरक्षित छोड़ना और उसकी जान जोखिम में डालना एक गंभीर संज्ञेय अपराध है, जिसमें लंबी जेल की सजा का प्रावधान है। पुलिस ने अपील की है कि यदि किसी के पास इस घटना से जुड़ी कोई भी जानकारी हो, तो वह तुरंत पुलिस को सूचित करे।
निष्कर्ष: चौबेपुर की यह घटना हमारे समाज के लिए एक चेतावनी है। एक ओर हम आधुनिकता का दम भरते हैं, वहीं दूसरी ओर एक नन्हीं सी जान को कुत्ते नोंचते मिलते हैं। शिक्षा, जागरूकता और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है ताकि भविष्य में कोई ‘नाल’ लगा मासूम किसी आवारा जानवर का निवाला न बने।
खबर के मुख्य अंश (Highlights):
- स्थान: चौबेपुर ब्लॉक कैंपस, कानपुर।
- शर्मनाक: कुत्ते ने मासूम के शव को बुरी तरह नोंचा, पहचान मुश्किल।
- जांच: पुलिस सीसीटीवी और प्रसव डेटा के जरिए आरोपियों की तलाश में जुटी।
- विकल्प: कानपुर मेडिकल कॉलेज में ‘आश्रय पालना’ की सुविधा उपलब्ध, पहचान रहती है गोपनीय।
- अपील: अनचाहे बच्चों को फेंके नहीं, सुरक्षित स्थान पर दें।
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