कानपुर में शस्त्र प्रेमियों का इंतजार खत्म: 3 साल बाद 174 लोगों को मिले शस्त्र लाइसेंस
प्रलभ शरण चौधरी/कानपुर/Truth India Times
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में शस्त्र लाइसेंस (Arms License) की चाह रखने वाले और वरासत की कानूनी प्रक्रिया में फंसे लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। जिला प्रशासन ने पिछले तीन वर्षों से लंबित पड़े 174 वरासत मामलों का निस्तारण करते हुए नए शस्त्र लाइसेंस जारी कर दिए हैं। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है जो अपने पूर्वजों के शस्त्रों को अपने नाम कराने के लिए लंबे समय से कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे थे।
3 साल का सूखा हुआ खत्म
कानपुर में पिछले कुछ वर्षों से शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया काफी धीमी रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022, 2023 और 2024 के दौरान जिले में एक भी वरासत (Inheritance) शस्त्र लाइसेंस जारी नहीं किया गया था। इस लंबी अवधि के दौरान सैंकड़ों फाइलें धूल फांक रही थीं। लाइसेंस न मिलने के कारण कई शस्त्र या तो मालखानों में जमा थे या उनके कानूनी उत्तराधिकारी असमंजस की स्थिति में थे।
चालू वर्ष में जिलाधिकारी (DM) ने इस ओर विशेष ध्यान दिया और लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। इसके परिणामस्वरूप, अब तक कुल 174 वरासत लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं, जिससे तीन साल से चला आ रहा गतिरोध टूट गया है।
क्या है ‘वरासत’ शस्त्र लाइसेंस?
जब किसी शस्त्र लाइसेंस धारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके शस्त्र को कानूनन उसके उत्तराधिकारी (पुत्र, पुत्री, पत्नी या सगे संबंधी) के नाम स्थानांतरित किया जाता है। इसे ही ‘वरासत लाइसेंस’ कहा जाता है। नियमतः, लाइसेंस धारक की मृत्यु के बाद शस्त्र को संबंधित थाने या गन हाउस में जमा करना अनिवार्य होता है। इसके बाद उत्तराधिकारी को डीएम कार्यालय में वरासत के लिए आवेदन करना होता है। पुलिस वेरिफिकेशन और जिलाधिकारी की मंजूरी के बाद ही यह लाइसेंस उत्तराधिकारी के नाम पर जारी होता है।
डीएम से लगाई थी गुहार, तब मिली राहत
लंबे समय से फाइलों के न बढ़ने से परेशान होकर वरासत श्रेणी के आवेदकों ने जिलाधिकारी से मिलकर अपनी समस्या बताई थी। आवेदकों का कहना था कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं और पुलिस वेरिफिकेशन पूरा होने के बावजूद उनके लाइसेंस अटके हुए हैं। जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग को सख्त निर्देश दिए कि वरासत से जुड़े मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।
प्रशासन के इस सक्रिय रुख के बाद आवेदनों की स्क्रूटनी तेज हुई और 174 भाग्यशाली आवेदकों के हाथ में उनके शस्त्र लाइसेंस पहुंच गए।
शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया और सख्ती
हालांकि प्रशासन ने वरासत मामलों में राहत दी है, लेकिन नए शस्त्र लाइसेंस जारी करने को लेकर अभी भी बेहद सख्त मानक अपनाए जा रहे हैं।
- पुलिस रिपोर्ट: आवेदक का आपराधिक इतिहास खंगाला जाता है।
- सत्यापन: शस्त्र रखने की आवश्यकता और सुरक्षा कारणों का मूल्यांकन होता है।
- डीएम का विवेक: जिलाधिकारी सभी रिपोर्टों के आधार पर संतुष्ट होने के बाद ही अंतिम मुहर लगाते हैं।
हथियारों का शौक और कानपुर का रसूख
कानपुर में शस्त्रों को रसूख और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। जिले में शस्त्र लाइसेंस की मांग हमेशा से अधिक रही है। वरासत के मामलों में देरी होने से कई पुराने और कीमती हथियार खराब होने की कगार पर थे। प्रशासन के इस फैसले से न केवल लोगों का कानूनी हक मिला है, बल्कि सरकारी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा भी बढ़ा है।
निष्कर्ष: लंबित फाइलों को भी जल्द मिलेगी मंजूरी
जिला प्रशासन का कहना है कि 174 लाइसेंस जारी होने के बाद अभी भी कुछ आवेदन प्रक्रिया के अधीन हैं। जिन आवेदकों के कागजात और पुलिस रिपोर्ट सही पाई जाएगी, उन्हें भी जल्द ही लाइसेंस आवंटित कर दिए जाएंगे। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी तरीके से सभी जायज मामलों का निस्तारण किया जाएगा।
खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- कुल जारी लाइसेंस: 174 (वरासत श्रेणी में)।
- अवधि: 2022 से 2024 तक एक भी लाइसेंस जारी नहीं हुआ था।
- प्रमुख कारण: उत्तराधिकार के मामलों में कानूनी अड़चनें और प्रशासनिक देरी।
- ताजा अपडेट: चालू वर्ष में DM के निर्देश पर हुआ त्वरित निस्तारण।
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