'बंटी टैक्स' के खिलाफ पार्षदों का सिरमुंडवाकर अनूठा प्रदर्शन
कानपुर | प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
कानपुर नगर निगम में भ्रष्टाचार और ‘बंटी टैक्स’ के आरोपों को लेकर छिड़ा संग्राम अब बेहद निजी और आक्रामक मोड़ पर पहुँच गया है। रविवार को नगर निगम के मुख्य गेट पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसे देखकर राहगीर और कर्मचारी दंग रह गए। मेयर के बेटे बंटी पांडेय पर कमीशनखोरी और अवैध वसूली के आरोप लगाते हुए पार्षदों ने अपना सिर मुंडवाकर विरोध दर्ज कराया। पार्षदों ने संकल्प लिया है कि जब तक यह कथित भ्रष्टाचार बंद नहीं होता, तब तक हर दिन एक नया पार्षद अपना मुंडन कराएगा।
नगर निगम बना ‘मुंडन स्थल’, गेट पर ही बिछी दरी
रविवार की सुबह से ही नगर निगम के गेट पर पार्षदों का जमावड़ा शुरू हो गया था। विरोध का यह तरीका इतना अनूठा था कि पार्षदों ने साथ में एक नाई (Hairsmith) को भी बुलाया था। गेट पर ही दरी बिछाई गई और पार्षदों ने बैठकर एक-एक कर अपने बाल मुंडवाने शुरू कर दिए।
पार्षदों का कहना था कि कानपुर नगर निगम में विकास कार्यों से ज्यादा ‘कमीशन का खेल’ हावी हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी फाइल को आगे बढ़ाने या क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए ‘बंटी टैक्स’ देना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना इस अदृश्य टैक्स के कोई भी ठेकेदार काम करने को तैयार नहीं है और न ही अधिकारी फाइलों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।
मेयर के बेटे पर सीधा निशाना: क्या है ‘बंटी टैक्स’?
प्रदर्शनकारी पार्षदों ने सीधे तौर पर मेयर के बेटे बंटी पांडेय को निशाने पर लिया है। पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम के प्रशासनिक कार्यों में मेयर के बेटे का हस्तक्षेप इतना बढ़ गया है कि वे समानांतर सत्ता चला रहे हैं। ठेकों के आवंटन से लेकर भुगतान तक में एक निश्चित प्रतिशत (कमीशन) की मांग की जा रही है, जिसे पार्षदों ने ‘बंटी टैक्स’ का नाम दिया है।
पार्षदों ने मीडिया से कहा, “हम जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं, लेकिन हमें अपने ही वार्ड में काम कराने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। भ्रष्टाचार की दीमक नगर निगम को खोखला कर रही है। हमने कई बार मेयर से शिकायत की, लेकिन उन्होंने अपने बेटे का बचाव किया। अब हम अपना सम्मान दांव पर लगाकर यह मुंडन करा रहे हैं।”
आश्वासन के बाद थमा हाई-वोल्टेज ड्रामा
जब मुंडन कराने का सिलसिला शुरू हुआ और भीड़ बढ़ने लगी, तो नगर निगम प्रशासन और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में संगठन के बड़े नेताओं ने दखल दिया। पार्षदों और संगठन के बीच करीब दो घंटे तक चली वार्ता के बाद प्रदर्शन को फिलहाल स्थगित किया गया।
संगठन की ओर से पार्षदों को आश्वासन दिया गया है कि उनके आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि कोई बाहरी व्यक्ति निगम के कार्यों में हस्तक्षेप कर रहा है, तो उसे तुरंत रोका जाएगा। इस आश्वासन के बाद पार्षदों ने आंदोलन वापस लिया, लेकिन चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर स्थिति नहीं सुधरी, तो वे सामूहिक रूप से पद से इस्तीफा देंगे।
विपक्ष को मिला मुद्दा, मेयर की चुप्पी पर सवाल
पार्षदों के इस ‘मुंडन सत्याग्रह’ ने विपक्षी दलों को एक बड़ा हथियार दे दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब सत्ताधारी दल के अपने ही पार्षद भ्रष्टाचार से इतने त्रस्त हैं कि उन्हें सिर मुंडवाना पड़ रहा है, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी। दूसरी ओर, मेयर की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे संशय और बढ़ गया है।
निष्कर्ष: साख की लड़ाई में कौन जीतेगा?
कानपुर नगर निगम में अक्सर पार्षदों और अधिकारियों के बीच विवाद होते रहते हैं, लेकिन यह पहली बार है जब ‘परिवारवाद’ और ‘अवैध वसूली’ के आरोपों ने इतना उग्र रूप लिया है। पार्षदों द्वारा अपने बाल मुंडवाना न केवल एक विरोध है, बल्कि यह जिला प्रशासन और राज्य सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी है। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह अपने ही पार्षदों के इन संगीन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है।
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