कुलदीप सेंगर केस पर सदर विधायक पंकज गुप्ता का बड़ा बयान
प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उन्नाव | उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में शुमार कुलदीप सिंह सेंगर प्रकरण पर उन्नाव सदर से भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर विधायक पंकज गुप्ता ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। विधायक गुप्ता ने इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया और सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर कई गंभीर टिप्पणियां की हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस मामले में कानूनी दांव-पेंच एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
“साक्ष्य ही तय करेंगे न्याय की दिशा”
सदर विधायक पंकज गुप्ता ने दो-टूक शब्दों में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायालय ही वह सर्वोच्च स्थान है जहाँ न्याय की उम्मीद की जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुलदीप सिंह सेंगर मामले में न्यायालय को किसी भी बाहरी दबाव, चाहे वह मीडिया हो या सोशल मीडिया, से प्रभावित हुए बिना केवल और केवल साक्ष्यों (Evidence) के आधार पर फैसला लेना चाहिए।
विधायक ने कहा, “न्यायालय अपनी निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम कर रहा है। हमें न्यायिक प्रणाली पर पूर्ण विश्वास है कि सच बहुत जल्द सबके सामने आएगा। कानून की अपनी एक गति होती है और अंततः सत्य की ही जीत होती है।”
जमानत और सुप्रीम कोर्ट के घटनाक्रम पर चर्चा
पंकज गुप्ता ने हालिया कानूनी गतिविधियों का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि न्याय प्रक्रिया में हर पक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि कुलदीप सिंह सेंगर को पहले हाईकोर्ट से राहत मिलते हुए जमानत मिली थी, लेकिन सीबीआई (CBI) ने कुछ तकनीकी बिंदुओं पर आपत्ति जताई और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इसके परिणाम स्वरूप सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने का आदेश दिया। विधायक ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी है और फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन (Sub-judice) है। उन्होंने जनता से अपील की कि अंतिम निर्णय आने तक धैर्य बनाए रखें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।
‘मीडिया ट्रायल’ पर विधायक की गहरी चिंता
पंकज गुप्ता ने अपने बयान में ‘मीडिया ट्रायल’ और ‘सोशल मीडिया नैरेटिव’ पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में साक्ष्यों और तथ्यों से ज्यादा महत्व मीडिया द्वारा बनाई गई धारणाओं को दिया जाने लगा है।
विधायक के बयान के प्रमुख बिंदु:
- न्यायिक प्रक्रिया में बाधा: मीडिया और सोशल मीडिया पर चलने वाली बहसें अक्सर निष्पक्ष न्याय की प्रक्रिया में अनचाही बाधाएं पैदा करती हैं।
- जनमानस की धारणा: जब सोशल मीडिया पर किसी को पहले ही ‘दोषी’ या ‘निर्दोष’ करार दे दिया जाता है, तो इससे जनमानस और व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं, जिससे न्याय मिलने में अनावश्यक देरी संभव है।
- पक्षपात रहित सुनवाई: उन्होंने आग्रह किया कि अदालत को दोनों पक्षों के गवाहों, सबूतों और प्रमाणों की निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए, न कि वायरल हो रहे दावों के आधार पर राय बनानी चाहिए।
“उन्नाव की दिव्य और भव्य छवि होगी बहाल”
राजनीतिक चर्चाओं से इतर, विधायक पंकज गुप्ता ने उन्नाव की गरिमा और पहचान को लेकर भी भावुक विचार साझा किए। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में कुछ विवादों के कारण उन्नाव की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
पंकज गुप्ता ने उम्मीद जताई कि वह समय दूर नहीं जब उन्नाव अपनी पुरानी ख्याति को पुनः प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा, “उन्नाव की पहचान साहित्य, शौर्य और विकास से रही है। बहुत जल्द ऐसा समय आएगा जब यह जिला एक बार फिर अपने दिव्य और भव्य रूप में दुनिया के सामने होगा, जिसकी ख्याति कभी देश-विदेश में हुआ करती थी।”
निष्कर्ष: न्याय की प्रतीक्षा
विधायक पंकज गुप्ता का यह बयान स्पष्ट करता है कि भाजपा के स्थानीय नेतृत्व का भरोसा अब भी पूरी तरह से न्यायपालिका पर टिका है। उनका यह बयान उन लोगों के लिए भी एक संदेश है जो सोशल मीडिया के माध्यम से अदालती फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। अब सभी की नजरें न्यायालय के अगले कदम पर टिकी हैं, जहाँ से सच और न्याय का फैसला होना है।
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