'पटरी' से उतरी व्यवस्था
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
प्रिंट रेट को ठेंगा दिखाकर वसूले जा रहे मनमाने दाम, लोकल ब्रांड्स का बोलबाला
खुले में बिक रहे दूषित खाद्य पदार्थ दे रहे बीमारियों को दावत, जिम्मेदार बेखबर
संवाददाता, कन्नौज।
रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण खान-पान उपलब्ध कराने का दावा कन्नौज रेलवे स्टेशन पर पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है। प्लेटफार्म नंबर एक पर स्थिति यह है कि वेंडर न केवल रेलवे के नियमों को ताक पर रख रहे हैं, बल्कि यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर खुलेआम ‘लूट’ मचा रहे हैं। कहने को तो स्टालों पर रेट लिस्ट चस्पा है, लेकिन हकीकत में यात्रियों से वसूले जा रहे दाम और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का मानकों से दूर-दूर तक नाता नहीं है। बासी और दूषित भोजन के कारण यात्रियों को सफर के दौरान पेट दर्द और उल्टी जैसी समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है।
रेट लिस्ट महज दिखावा, समोसे के वजन और दाम में बड़ा खेल
नियमों के अनुसार, स्टेशन पर बिकने वाले प्रत्येक खाद्य पदार्थ का वजन और मूल्य निर्धारित है। सूची के मुताबिक 50 ग्राम के एक समोसे की कीमत 8 रुपये तय है, जिसमें चटनी देना अनिवार्य है। लेकिन वेंडर अपनी मनमानी करते हुए छोटे आकार के समोसे 20 रुपये में 4 थमा रहे हैं और चटनी के नाम पर हाथ खड़े कर देते हैं। ट्रेनों के संक्षिप्त ठहराव का लाभ उठाकर ये वेंडर यात्रियों को इस कदर जल्दबाजी में सामान बेचते हैं कि मुसाफिर न तो विरोध कर पाते हैं और न ही वजन की शुद्धता देख पाते हैं।
‘ठंडा’ के नाम पर लोकल ब्रांड का ‘खौफनाक’ खेल
पानी और शीतल पेय पदार्थों के मामले में भी खेल बड़े स्तर पर जारी है। नामी कंपनियों के बजाय स्टालों पर ऐसे लोकल ब्रांड्स का कब्जा है जो बाजार में कहीं नजर नहीं आते। पानी की बोतलों और कोल्ड ड्रिंक्स पर प्रिंट रेट से 5 से 10 रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। प्यास से बेहाल यात्री बिना मोलभाव किए इन अज्ञात ब्रांड्स का पानी खरीदने को विवश हैं, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक हो सकता है।
धूल फांकते पकवान: सेहत के साथ खिलवाड़ की ‘तस्वीर’
स्टेशन पर स्वच्छता मानकों की स्थिति बदतर है। प्लेटफार्म पर आने-जाने वाली ट्रेनों से उड़ने वाली धूल सीधे खाद्य पदार्थों पर जम रही है। नियमतः सभी खाद्य पदार्थ पारदर्शी ढक्कन या जाली से ढके होने चाहिए, लेकिन यहाँ समोसे और अन्य खाद्य पदार्थ घंटों खुले में रखे रहते हैं। यही दूषित खाना यात्रियों को बीमार बना रहा है, जिससे सफर का आनंद सजा में बदल जाता है।
शिकायतें बेअसर, वेंडरों के हौसले बुलंद
स्टेशन परिसर में ‘नो बिल-नो पेमेंट’ और हेल्पलाइन नंबर 139 के बोर्ड केवल शोभा बढ़ा रहे हैं। यात्रियों का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद धरातल पर कोई बदलाव नहीं दिखता। वेंडर इतने बेखौफ हैं कि विरोध करने पर यात्रियों के साथ अभद्रता और बदतमीजी करने पर उतारू हो जाते हैं।
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