बोले- 'सत्ता के बिना मछली की तरह तड़प रहे हैं पूर्व CM'
प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उन्नाव। उन्नाव से भारतीय जनता पार्टी के सांसद साक्षी महाराज ने शनिवार को विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। अपने कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए सांसद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विदेशी दौरों और प्रदेश में आ रहे भारी-भरकम निवेश की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। इस दौरान उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की तुलना ‘बिना पानी की मछली’ से करते हुए कहा कि वे सत्ता के बिना तड़प रहे हैं।
विवेकानंद के बाद योगी का वैश्विक प्रभाव: साक्षी महाराज
सांसद साक्षी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया विदेश दौरों को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, “स्वामी विवेकानंद के बाद यह पहली बार है कि किसी धर्माचार्य ने विदेश जाकर भारत और उत्तर प्रदेश का इतना सशक्त प्रतिनिधित्व किया है।” उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये के निवेश की ‘विकास रूपी बरसात’ हो रही है।
साक्षी महाराज ने निवेश करने वाले देशों का आभार जताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि योगी सरकार निवेशकों के भरोसे पर पूरी तरह खरी उतरेगी। उन्होंने दावा किया कि विकास की इसी लहर के दम पर 2027 के विधानसभा चुनावों में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा पुनः भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी।
विपक्ष पर साधा निशाना: “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे”
समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के बयानों पर पलटवार करते हुए सांसद ने कहा कि विपक्ष हताश और निराश है। उन्होंने मुहावरे का प्रयोग करते हुए कहा, “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचती है। अखिलेश जी बिना सत्ता के वैसे ही तड़प रहे हैं जैसे बिना पानी के मछली तड़पती है। यही कारण है कि वे आजकल ऊल-जलूल बयानबाजी कर रहे हैं।”
भगवा वस्त्र और साधुत्व पर बड़ी टिप्पणी
एक धार्मिक पदाधिकारी से जुड़े हालिया विवाद के प्रश्न पर सांसद ने सीधे तौर पर नाम लेने से परहेज किया, क्योंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। हालांकि, उन्होंने संतों के वेश पर एक गंभीर टिप्पणी जरूर की। उन्होंने कहा, “हर रंगा हुआ कपड़ा पहनने वाला व्यक्ति संन्यासी, साधु, मंडलेश्वर या महंत नहीं हो सकता।” रावण का उदाहरण देते हुए उन्होंने आगाह किया कि वेशभूषा से किसी के चरित्र का आकलन नहीं करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर दूध का दूध और पानी का पानी कर देगा।
राम मंदिर आंदोलन और ‘अखिल भारतीय संत समिति’ का जिक्र
अपने संबोधन में साक्षी महाराज ने राम मंदिर आंदोलन के दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने ‘अखिल भारतीय संत समिति’ के संस्थापक महासचिव के रूप में देश भर के संतों को एक मंच पर लाने का कार्य किया था। इस दौरान उन्होंने दिवंगत संत स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का उल्लेख करते हुए कहा कि वे उस समय हमारे साथ मंच पर नहीं आए थे और उनका झुकाव कांग्रेस की ओर था।
सांसद ने उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जो आज संतों के सम्मान की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने राम भक्तों पर गोलियां चलवाईं और उनका दमन किया, वे आज राजनीति के लिए संतों के हितैषी बन रहे हैं। इतिहास को भुलाया नहीं जा सकता।” उन्होंने नसीहत दी कि यदि विपक्ष को हिंदू समाज और संतों की राजनीति करनी है, तो पहले उन्हें अपने अतीत के कृत्यों के लिए पूरे हिंदू समाज से माफी मांगनी चाहिए।
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