अजगैन रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन की चपेट में आने से महिला की दर्दनाक मौत
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद अंतर्गत अजगैन थाना क्षेत्र में सोमवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ रेलवे क्रॉसिंग के समीप पटरी पार करते समय एक महिला तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आ गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, इस हादसे ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब मृतका के बेटे ने घटना को सामान्य दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे संदिग्ध बताया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की गहन तफ्तीश शुरू कर दी है।
तेज रफ्तार ट्रेन बनी काल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अजगैन थाना क्षेत्र के गोकुल खेड़ा गांव की रहने वाली जनक दुलारी (55 वर्ष) पत्नी मैकू सोमवार सुबह किसी निजी कार्य से घर से निकली थीं। जब वह अजगैन रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुंचीं और ट्रैक पार करने का प्रयास कर रही थीं, तभी वहां से गुजर रही एक सुपरफास्ट ट्रेन की चपेट में आ गईं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि महिला का शरीर क्षत-विक्षत हो गया और उनकी तत्काल मृत्यु हो गई।
हादसे को देख आसपास मौजूद राहगीरों और दुकानदारों के रोंगटे खड़े हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत शोर मचाया और मामले की जानकारी रेलवे स्टेशन मास्टर तथा अजगैन थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा और ट्रैक पर बिखरे शव के अवशेषों को एकत्र कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
बेटे के आरोपों से सनसनी: हादसा या साजिश?
प्रेस और पुलिस की मौजूदगी के बीच उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब मृतका के पुत्र ने अपनी मां की मौत को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। परिजनों का कहना है कि जनक दुलारी जिस रास्ते पर गई थीं, वहां से ट्रैक पार करने का कोई ठोस कारण समझ नहीं आ रहा है। बेटे ने पुलिस के सामने दिए अपने बयान में घटना को ‘संदिग्ध’ बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
परिजनों के मन में सवाल है कि क्या यह महज एक असावधानी के कारण हुआ हादसा था या इसके पीछे कोई अन्य कारण या मानसिक दबाव था। पुलिस ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू पर काम करना शुरू कर दिया है।
बेटियों के सिर से उठा मां का साया
जनक दुलारी के निधन की खबर जैसे ही गोकुल खेड़ा गांव पहुंची, वहां सन्नाटा पसर गया। ग्रामीणों ने बताया कि जनक दुलारी एक कर्मठ महिला थीं, जो घरेलू कामकाज के साथ-साथ अपने परिवार और बेटियों की देखरेख बड़े ही जतन से करती थीं। उनके पति मैकू और बेटियां इस वज्रपात से सुध-बुध खो बैठे हैं। परिवार के सामने अब बेटियों के भविष्य और उनके विवाह की चिंता खड़ी हो गई है। गांव की महिलाओं ने बताया कि जनक दुलारी का व्यवहार सबके साथ बहुत मिलनसार था।
अजगैन क्रॉसिंग: “मौत का जंक्शन” बनती जा रही पटरियां
इस हादसे ने एक बार फिर रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्थानीय ग्रामीणों और दैनिक यात्रियों में रेलवे विभाग के प्रति भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि:
- सुरक्षा का अभाव: क्रॉसिंग पर ट्रेनों की आवाजाही बहुत अधिक है, लेकिन पैदल पार करने वालों के लिए कोई सुरक्षित ओवरब्रिज या अंडरपास की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
- फाटक बंद होने पर जोखिम: अक्सर फाटक बंद होने पर लोग जल्दीबाजी में नीचे से निकलकर या ट्रैक के किनारों से पटरी पार करने की कोशिश करते हैं, जो जानलेवा साबित होता है।
- चेतावनी तंत्र की कमी: कई बार घुमावदार ट्रैक होने के कारण तेज रफ्तार ट्रेनों की आहट दूर से सुनाई नहीं देती, जिससे लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अजगैन क्रॉसिंग पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ाई जाए और वहां एक फुट-ओवरब्रिज (FOB) का निर्माण कराया जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार का चिराग न बुझे।
पुलिस और रेलवे प्रशासन का पक्ष
अजगैन थाना पुलिस ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला ट्रेन की चपेट में आने से हुई दुर्घटना का ही लग रहा है, क्योंकि चश्मदीदों ने उन्हें ट्रैक पार करते देखा था। हालांकि, परिजनों द्वारा जताई गई आशंका के मद्देनजर पुलिस उनके कॉल डिटेल्स और हाल के दिनों में उनके पारिवारिक संबंधों की भी अनौपचारिक जांच कर सकती है।
थाना प्रभारी ने बताया, “शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के समय और शरीर पर लगी चोटों की प्रकृति स्पष्ट होगी। यदि परिजनों की ओर से कोई लिखित तहरीर मिलती है, तो उसके आधार पर अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
इस हादसे के कारण लखनऊ-कानपुर रेल मार्ग पर कुछ ट्रेनों की रफ्तार पर भी असर पड़ा और उन्हें डाउन लाइन पर धीमी गति से निकाला गया। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद ट्रैक को पूरी तरह साफ कराया जा सका।
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