बनारस की तर्ज पर सजेगा गंगा तट
प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times
उन्नाव: जनपद के धार्मिक और पर्यटन मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान बनाने की दिशा में आनंद घाट पर निर्माणाधीन भव्य ‘आरती स्थल’ का काम एक बार फिर पटरी पर लौट आया है। पिछले सात महीनों से गंगा के बढ़े जलस्तर और बाढ़ की विभीषिका के कारण रुका हुआ निर्माण कार्य अब दोबारा शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की देखरेख में बन रहे इस स्थल को बनारस (वाराणसी) के घाटों की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है।
बाढ़ ने लगा दिया था ‘ब्रेक’
पिछले साल 6 मार्च को सदर विधायक द्वारा भूमि पूजन के साथ इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव रखी गई थी। लखनऊ की एक प्रतिष्ठित कार्यदायी संस्था ने 15 जून से पिलर पाइलिंग (खंभों की खुदाई) का काम शुरू ही किया था कि कुदरत का कहर टूट पड़ा। जून के अंत से गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी शुरू हुई और 4 जुलाई तक पूरा निर्माण स्थल जलमग्न हो गया। सुरक्षा कारणों और तकनीकी दिक्कतों के चलते काम को पूरी तरह रोकना पड़ा। पिछले सात महीनों तक न केवल जलस्तर अधिक रहा, बल्कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद मिट्टी के सूखने और मशीनों के लिए आधार तैयार होने का इंतजार किया गया।
1 करोड़ 6 लाख की लागत से होगा कायाकल्प
राज्य सरकार ने इस परियोजना की गंभीरता को देखते हुए 1 करोड़ 6 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया है। आनंद घाट पर विकसित किया जा रहा यह आरती स्थल 25 मीटर लंबा और 11 मीटर चौड़ा होगा। इस विशाल मंच का निर्माण इस तरह किया जा रहा है कि यहां एक साथ कई अर्चक (पुजारी) भव्य गंगा आरती कर सकें और हजारों की संख्या में श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से इसे देख सकें।
निरीक्षण और गुणवत्ता के निर्देश
निर्माण कार्य फिर से शुरू होते ही पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि संदीप पांडे ने अपनी टीम के साथ मौके का मुआयना किया। उन्होंने मशीनों और श्रमिकों की प्रगति का जायजा लेते हुए कार्यदायी संस्था को स्पष्ट निर्देश दिए कि:
- काम की गुणवत्ता (Quality) में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- सात महीने के विलंब की भरपाई करने के लिए काम की गति बढ़ाई जाए।
- आगामी मानसून सत्र से पहले मुख्य ढांचे का काम पूरा कर लिया जाए ताकि दोबारा पानी बढ़ने पर बाधा न आए।
धार्मिक पर्यटन को लगेंगे पंख
स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं में इस खबर को लेकर खासा उत्साह है। आनंद घाट पर नियमित गंगा आरती होने से उन्नाव को एक नई धार्मिक पहचान मिलेगी। श्रद्धालुओं का मानना है कि इससे न केवल क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि गंगा के प्रति लोगों की आस्था और स्वच्छता को भी नया बल मिलेगा।
वर्तमान में कार्यदायी संस्था पिलर और बेस (आधार) के काम को प्राथमिकता दे रही है। माना जा रहा है कि अगर परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो जल्द ही उन्नाव वासी बनारस के अस्सी या दशाश्वमेध घाट की तरह अपने शहर में भी भव्य गंगा आरती का दिव्य दर्शन कर पाएंगे।
Truth India Times की रिपोर्ट: विकास कार्यों में प्रकृति की बाधाएं आती रहती हैं, लेकिन सात महीने के इंतजार के बाद काम का शुरू होना प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अब चुनौती यह है कि इस समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से कैसे पूरा किया जाए।
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