DM के आदेश के बाद दोबारा होगा पोस्टमार्टम
उन्नाव | प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक युवक की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। सदर कोतवाली क्षेत्र में कुछ समय पूर्व फंदे से लटके मिले एक युवक की मौत को पुलिस ने प्रथम दृष्टया आत्महत्या मानकर दफन करवा दिया था, लेकिन मृतक की मां के संघर्ष और हत्या के संगीन आरोपों के बाद अब प्रशासन को झुकना पड़ा है। जिलाधिकारी (DM) के विशेष आदेश पर सोमवार को भारी पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में युवक के शव को कब्र से बाहर निकाला गया। अब शव का दोबारा पोस्टमार्टम (Re-Postmortem) डॉक्टरों के एक पैनल द्वारा किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
मामला उन्नाव के सदर कोतवाली क्षेत्र का है, जहाँ कुछ दिनों पहले एक युवक का शव उसके घर के भीतर फंदे से लटकता हुआ पाया गया था। उस समय पुलिस ने मौके की स्थिति और शुरुआती जांच के आधार पर इसे आत्महत्या का मामला करार दिया था। कानूनी प्रक्रिया के बाद परिजनों ने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार शव को सुपुर्द-ए-खाक (दफन) कर दिया था।
हालांकि, मृतक की मां का दिल यह मानने को तैयार नहीं था कि उसके बेटे ने खुदकुशी की है। मां का आरोप है कि उसके बेटे की हत्या की गई और फिर उसे आत्महत्या का रूप देने के लिए फंदे से लटका दिया गया।
मां की गुहार और DM का कड़ा फैसला
बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए बुजुर्ग मां ने जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले हुए पोस्टमार्टम में कई तथ्यों को नजरअंदाज किया गया और पुलिस ने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। मां ने जिलाधिकारी को शपथ पत्र सौंपकर मांग की कि शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाए ताकि सच सामने आ सके।
मामले की गंभीरता और मृतक की मां की दलीलों को देखते हुए जिलाधिकारी ने मानवीय आधार और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए शव को कब्र से निकलवाने (Exhumation) की अनुमति दे दी।
कब्र खोदते समय मौजूद रहा भारी अमला
सोमवार को इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए सदर कोतवाली पुलिस, फॉरेंसिक टीम और मजिस्ट्रेट कब्रिस्तान पहुंचे। सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके को घेर लिया गया था। मजिस्ट्रेट की देखरेख में कब्र को खोदकर शव को बाहर निकाला गया। कई दिनों तक मिट्टी के भीतर रहने के कारण शव की स्थिति को देखते हुए फॉरेंसिक टीम ने विशेष सावधानी बरती। शव को सील कर सीधे जिला अस्पताल की मोर्चरी भेजा गया है।
दोबारा पोस्टमार्टम में क्या होगा खास?
सूत्रों के अनुसार, इस बार पोस्टमार्टम साधारण तरीके से नहीं होगा। जिलाधिकारी ने इसके लिए डॉक्टरों के एक विशेष पैनल (Panel of Doctors) का गठन किया है। साथ ही, पूरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात की गुंजाइश न रहे।
जांच के मुख्य बिंदु:
- गले के निशान: क्या गले पर लिगेचर मार्क (हेंगिंग के निशान) आत्महत्या की पुष्टि करते हैं या गला घोंटने के संकेत हैं?
- शरीर पर अन्य चोटें: क्या दफन होने से पहले शरीर पर संघर्ष के या मारपीट के कोई निशान थे?
- विसरा रिपोर्ट: यदि पहले पोस्टमार्टम में विसरा सुरक्षित नहीं रखा गया था, तो इस बार अंगों के नमूनों को सुरक्षित कर लैब भेजा जाएगा।
परिजनों ने जताई न्याय की उम्मीद
कब्रिस्तान के बाहर मौजूद मृतक की मां ने भर्राए गले से कहा, “मेरा बेटा कायर नहीं था, उसे मारा गया है। मुझे प्रशासन पर भरोसा है कि दोबारा होने वाली जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। हत्यारों को सजा मिलनी चाहिए।”
पुलिस का पक्ष
सदर कोतवाली पुलिस का कहना है कि वे कानून के दायरे में काम कर रहे हैं। जिलाधिकारी के आदेश का पालन करते हुए शव को कब्र से निकाला गया है। पोस्टमार्टम की नई रिपोर्ट के आधार पर मामले में अगली वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यदि रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि होती है, तो तत्काल संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
निष्कर्ष: उन्नाव पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल?
शव को कब्र से निकलवाने की नौबत आना कहीं न कहीं पहली जांच और शुरुआती पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पर सवालिया निशान लगाता है। अगर दोबारा पोस्टमार्टम में हत्या की पुष्टि होती है, तो यह स्थानीय पुलिस की लापरवाही को भी उजागर करेगा। फिलहाल, पूरे जिले की निगाहें अब पोस्टमार्टम की नई रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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