कागजों पर बह रहा पानी, धरातल पर प्यासे खेत
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दावा करती है, लेकिन उन्नाव के सिंचाई विभाग में बैठे जिम्मेदार और ठेकेदार इस मंशा को ठेंगा दिखा रहे हैं। जनपद के न्योतनी-हसनगंज क्षेत्र में नहर सफाई के नाम पर सरकारी बजट के बंदरबांट का एक बड़ा मामला सामने आया है। हाईटेक ड्रोन सर्वे और लाखों के बजट के बावजूद धरातल पर नहरों की स्थिति बदतर है, जिससे किसानों की फसलें सिंचाई के अभाव में दम तोड़ रही हैं।
ड्रोन से हुआ सर्वे, फिर भी ‘टेल’ तक नहीं पहुँचा पानी
सिंचाई विभाग ने इस बार दावा किया था कि नहरों की सफाई में पारदर्शिता लाने के लिए ड्रोन से निगरानी की गई है। न्योतनी रजबहा, जिसकी कुल लंबाई लगभग 20 किलोमीटर है, की सफाई का कार्य दिसंबर माह में कागजों पर पूर्ण दिखाया गया। विभाग का दावा था कि 22 दिसंबर को नहर में पानी छोड़ दिया गया और वह अपनी अंतिम छोर (टेल) तक पहुँच रहा है। लेकिन ‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ की पड़ताल में विभागीय दावों की कलई खुल गई।
सच्चाई यह है कि सफाई कार्य मानकविहीन होने के कारण पानी ‘टेल’ तक तो दूर, बीच रास्ते में ही दम तोड़ रहा है। समदपुर गांव के पास रजबहा की ‘खांदी’ (कटाव) पिछले एक सप्ताह से कटी पड़ी है। विडंबना देखिए कि एक तरफ किसान पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कीमती पानी अशूरन खेड़ा गांव के नाले से होते हुए सीधे सई नदी में बेकार बह रहा है।
आधा दर्जन से अधिक गांवों में सिंचाई संकट
नहर कटने और समुचित सफाई न होने के कारण समदपुर, अशूरन खेड़ा, जसमड़ा बब्बन, इस्माइलाबाद, फिरोजपुर, गिरवरखेड़ा और गनेशखेड़ा समेत दर्जनों गांवों के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। नहर की क्षमता करीब 60 क्यूसेक पानी की है, लेकिन वर्तमान में आधा पानी भी नहीं आ पा रहा है। इस अव्यवस्था का सबसे बुरा असर चंदेशवा माइनर पर पड़ा है, जो आज भी पूरी तरह सूखी है। किसानों को मजबूरन निजी नलकूपों से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे उनकी खेती की लागत दोगुनी हो गई है।
ठेकेदार की ‘सेटिंग’ और विभाग की चुप्पी
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ठेकेदार और विभाग के अधिकारियों के बीच गहरी सांठगांठ है। आरोप है कि ठेकेदार बिना मानक पूरा किए 8 लाख रुपये का भुगतान निकालने की तैयारी में है। ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक नहर की खांदी को दुरुस्त नहीं किया जाता और सफाई की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक भुगतान रोका जाना चाहिए।
इससे पहले भी मियागंज, पुरवा और बिछिया क्षेत्र में विभाग की लापरवाही के कारण नहर कट गई थी, जिससे 50 बीघा से अधिक फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो गई थी। उन घटनाओं से सबक लेने के बजाय अधिकारी एसी कमरों में बैठकर ‘सब चंगा है’ की रिपोर्ट तैयार करने में व्यस्त हैं।
जिम्मेदारों का रटा-रटाया जवाब
जब इस गंभीर मामले को लेकर सिंचाई विभाग के XEN (अधिशासी अभियंता) दीपक यादव से बात की गई, तो उनका जवाब बेहद औपचारिक रहा। उन्होंने कहा, “मुझे खांदी कटने की जानकारी फिलहाल नहीं है। यदि ऐसा है, तो संबंधित जेई (अवर अभियंता) को निर्देशित कर तत्काल मरम्मत कराई जाएगी।”
यह बयान स्पष्ट करता है कि विभाग के उच्चाधिकारियों को धरातल की समस्याओं की कोई सुध नहीं है। जब किसान हफ्ते भर से परेशान हैं, तब एक्सईएन का ‘जानकारी न होने’ की बात कहना उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है।
तहसील प्रशासन से जांच की मांग
क्षेत्रीय किसानों ने अब मुख्यमंत्री पोर्टल और तहसील प्रशासन से गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि:
- नहर सफाई कार्य की स्थलीय जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या तहसील स्तरीय अधिकारी से कराई जाए।
- भ्रष्ट ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए और लापरवाही बरतने वाले जेई पर कार्रवाई हो।
- जब तक अंतिम खेत तक पानी न पहुँचे, तब तक सफाई कार्य का फाइनल पेमेंट न किया जाए।
उन्नाव के इन गांवों की मिट्टी और किसानों के पसीने की कीमत पर भ्रष्टाचार का यह खेल कब तक चलेगा, यह एक बड़ा सवाल है। ट्रुथ इंडिया टाइम्स इस मामले की तह तक जाकर सच्चाई उजागर करता रहेगा।
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