उत्पीड़न और प्रार्थना सभाओं में बाधा का आरोप
प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times
उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में मसीह समाज (ईसाई समुदाय) ने अपने ऊपर हो रहे कथित उत्पीड़न और धार्मिक गतिविधियों में बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया है। एक सामाजिक संगठन के बैनर तले एकजुट हुए समुदाय के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को ज्ञापन सौंपकर सुरक्षा और न्याय की मांग की है। संगठन का आरोप है कि कुछ अराजक तत्व शांतिपूर्ण प्रार्थना सभाओं में व्यवधान डाल रहे हैं और समुदाय के लोगों को निशाना बना रहे हैं।
प्रार्थना सभाओं में हस्तक्षेप का गंभीर आरोप
जिला मुख्यालय पहुंचे मसीह समाज के प्रतिनिधियों ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराया कि जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होने वाली उनकी नियमित प्रार्थना सभाओं में बाहरी तत्वों द्वारा हस्तक्षेप किया जा रहा है। आरोप है कि बिना किसी ठोस आधार के प्रार्थना सभाओं को रुकवा दिया जाता है और वहां मौजूद लोगों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है।
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से अपने धर्म का पालन कर रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से उन्हें डराने और धमकाने की घटनाएं बढ़ गई हैं।
धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन का मुद्दा
‘Truth India Times’ से बात करते हुए संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने और उसका प्रचार-प्रसार करने की स्वतंत्रता देता है। लेकिन उन्नाव में इस संवैधानिक अधिकार का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि प्रार्थना सभाओं में बाधा डालना न केवल धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की भी एक सोची-समझी साजिश है।
प्रशासन से तत्काल कार्यवाही की मांग
मसीह समाज ने जिलाधिकारी और एसएसपी से मांग की है कि:
- प्रार्थना सभाओं के दौरान पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
- जो लोग कानून को हाथ में लेकर प्रार्थना में व्यवधान डाल रहे हैं, उन्हें चिह्नित कर कड़ी कार्यवाही की जाए।
- समुदाय के लोगों में व्याप्त भय के माहौल को दूर करने के लिए पुलिस प्रशासन सक्रिय भूमिका निभाए।
प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि यदि उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा नहीं की गई और उत्पीड़न जारी रहा, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।
प्रशासन का रुख
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि मामले की गहनता से जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यदि किसी पक्ष द्वारा शांति भंग करने या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
पुलिस प्रशासन ने स्थानीय थाना प्रभारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में धार्मिक आयोजनों पर नजर रखें और यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
सामाजिक सौहार्द पर चिंता
उन्नाव हमेशा से गंगा-जमुनी तहजीब का केंद्र रहा है। ऐसे में मसीह समाज द्वारा लगाए गए इन आरोपों ने बुद्धिजीवी वर्ग और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच चिंता पैदा कर दी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि धर्म के नाम पर किसी का भी उत्पीड़न समाज के लिए घातक है। प्रशासन को चाहिए कि वह दोनों पक्षों की बात सुनकर मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकाले ताकि जिले की कानून व्यवस्था और भाईचारा बना रहे।
‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ का विश्लेषण
धार्मिक स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। उन्नाव पुलिस को इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी होगी। एक तरफ जहां जबरन धर्म परिवर्तन जैसे आरोपों की गहन जांच जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है कि किसी निर्दोष नागरिक को उसकी आस्था के कारण परेशान न किया जाए।
मसीह समाज का यह कदम प्रशासन को जगाने की एक कोशिश है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में पुलिस और प्रशासन इन शिकायतों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है।
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